टू द पॉइंट

जनसहयोग ने बरकरार रखा भोपाल का गौरव

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स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 में इस बार पैरामीटर्स बदलने के साथ चुनौतियां बढ़ गईं, लेकिन नगर निगम ने हर पैरामीटर्स में अंक हासिल करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से तैयारी की। जनता के सहयोग से लगातार दूसरी बार देश में सबसे साफ सुथरी राजधानी भोपाल रही। स्वच्छता सर्वेक्षण का परिणाम आते ही शहर में जश्न का माहौल बन गया।

महापौर आलोक शर्मा, निगम आयुक्त प्रियंका दास सहित महापौर परिषद के सदस्य, पार्षद व निगम अधिकारियों की मौजूदगी में शहर के नागरिकों ने राजाभोज सेतु और महापौर निवास पर जमकर आतिशबाजी की। सभी ने एक दूसरे को बधाई दी। बता दें कि 1 जनवरी 2018 को भोपाल खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित हुआ था। ओडीएफ सर्टिफिकेट के इस बार 110 अंक तय थे।

– फीडबैक का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया। इसके लिए होर्डिंग पंपलेट के माध्यम से लोगों को सफाई रखने के लिए आग्रह किया।

– पब्लिक टॉयलेट, कम्युनिटी टॉयलेट सहित सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता के लिए बैनर पोस्टर लगाकर जागस्र्क किया गया।

– शहर से रोजाना डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने वाले कर्मियों और एनजीओ प्रतिनिधि घर-घर जाकर लोगों से स्वच्छता सर्वे की वेबसाइट या 1969 पर फोन कर स्वच्छता सर्वे में शामिल होने का आग्रह किया।

– महापौर आलोक शर्मा, आयुक्त प्रियंका दास सहित निगम अमला विभिन्न् सामाजिक, व्यापारिक, औद्योगिक, धार्मिक संगठनों, स्कूल-कॉलेज में जाकर सफाई के लिए प्रेरित किया।

– स्कूलों, अस्पतालों, मैरिज गार्डन, रहवासियों, व्यापारियों, सामाजिक धार्मिंक संगठनों, धर्मगुरुओं आदि की बैठक बुलाई गई।

– हमारे यहां दो वैक्यूम मशीनें हैं। जिससे आईएसबीटी के प्लेटफार्म और फर्श की सफाई के साथ ही पोंछा लगाया जाएगा। वहीं बड़ी मशीन से चौक बाजार और न्यूमार्केट एरिया की सफाई शुरू हो गई है। – ट्रांसफर स्टेशन बनाए गए जहां आने वाले गीले कचरे से कंपोस्ट और मीथेन गैस और बिजली बनाने का काम शुरू किया गया।

– कचरा वाहनों में दो हिस्से बनाए गए हैं, जिसमें एक तरफ गीला और दूसरी तरफ सूखा कचरा एकत्र करने की शुरुआत हुई।

– होटल, मैरिज गार्डन, पार्क आदि संस्थानों और कॉलोनियों में कुल 273 यूनिट तैयार किए गए। जहां कचरे से खाद बनाने का काम शुरू किया गया।

– चाय की चौपाल का आयोजन कर जागरूक किया, रोको-टोको अभियान, बाजारों में रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था व धुलाई, घर- घर दस्तक अभियान, कबाड़ से जुगाड़ जैसे नवाचार, स्वच्छता की पाठशाला, माय सिटी माय वाल ने नागरिकों को जोड़ा।

2017 में ये शहर थे टॉप टेन में

इंदौर – 1808

भोपाल – 1800

विशाखापटनम (आंध्रप्रदेश) – 1797

सूरत (गुजरात) – 1762

मैसूर (कर्नाटक) – 1743

तिरुचिपल्ली (तमिलनाडु) – 1716

नई दिल्ली म्युनिसिपल कांउसिल – 1708

नवी मुंबई (महाराष्ट्र) – 1705

तिरुपति (आंध्रप्रदेश) – 1704

वड़ोदरा (गुजरात) – 1703

2018 में कैटेगरी के हिसाब से बढ़ाए अंक

म्यूनिसिपल डॉक्यूमेंटेशन – 1400

इंडेपेंडेंट ऑब्जर्वेशन – 1200

सिटीजन फीडबैक – 1400

कुल अंक – 4000