सवाल दर सवाल

मंगल के दंगल में’ दिग्गजों के दांव’ पर रहेगी नजर.. राकेश अग्निहोत्री ‘सवाल पर सवाल’ नया इंडिया

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मंगल के दंगल में’ दिग्गजों के दांव’ पर रहेगी नजर..
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(कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी दिल्ली में अमित शाह मंगलवार को मध्य प्रदेश के दौरे पर , अखिलेश खजुराहो में करेंगे प्रेस कॉन्फ्रेंस..)
विधानसभा चुनाव के परवान चढ़ने के साथ.. मध्यप्रदेश से लेकर दिल्ली में टिकट की माथापच्ची तेज हो चुकी है.. तो उम्मीदवार के एलान के साथ कांग्रेस भाजपा बगावत रोकने के लिए डैमेज कंट्रोल की रणनीति बनाने में जुट गए हैं.. कांग्रेस दिल्ली में बैठक कर स्क्रीनिंग कमेटी के जरिए पहली सूची के लिए सर्वसम्मति बनाने का प्रयास कर रही है.. तो भाजपा भी सर्वे-रिपोर्टों को आधार बनाकर अंदरखाने जिताऊ उम्मीदवार की तलाश कर रही है.. कई सीटों पर सर्वसम्मति लगभग बना दी गई.. तो शिवराज की जन आशीर्वाद यात्रा के बाद सड़क पर माहौल बनाने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के इर्द-गिर्द फोकस बनाने को मजबूर हुई.. उधर मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में छोटे-छोटे दल और क्षेत्रीय दलों के नेता भी हाथ-पांव मारने लगे हैं.. चाहे फिर खजुराहो पहुंचे समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव का कांग्रेस-भाजपा से नाराज नेताओं के लिए अपने दरवाजे खोलना हो या फिर गोंगपा का सपा से दूरी बनाते हुए आदिवासी संगठन जयस के नजदीक नजर आना जितना गौर करने लायक है.. उतना ही सवर्णों की लड़ाई लड़ रहे सपाक्स मे बगावत की स्थिति निर्मित की जा रही जो आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने को लेकर असमंजस में है.. इन सबके बीच मिशन 2019 के महागठबंधन की हवा निकालकर मध्यप्रदेश के समीकरणों को प्रभावित करने का दंभ भरने वाली बीएसपी अप्रत्याशित तौर पर साइलेंट मोड में आगे बढ़ रही है.. सवाल यहीं पर खड़ा होता है कि मध्यप्रदेश की लड़ाई में नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की पोजिशनिंग के बीच शिवराज की सरकार बनाने के लिए एक साथ कई मोर्चों पर सक्रिय हो चुके अमित शाह इस बनते बिगड़ते समीकरण को आखिर भाजपा के पक्ष में कैसे लाएंगे? जहां एंटी इनकंबेंसी की चुनौती के साथ क्षत्रपों की अनबन दूर करने के लिए भाजपा को किसी स्वीकार फार्मूले की दरकार है.. तो सवाल, शिवराज की चुनाव तारीख का ऐलान होने के बावजूद आगे बढ़ रही जन आशीर्वाद यात्रा के समापन को लेकर भी खड़े होते हैं.. तो मतदाताओं को लेकर न्यायालय में सस्पेंस बरकरार रखने के बीच नवरात्रि शुरू होने से ठीक पहले आखिरी मंगलवार को होने वाले सियासी दंगल में दिग्गजों पर नजर रहेगी, जो अपने दांव से विरोधियों को पटखनी देने की पटकथा लिख रहे हैं…

मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव तारीख का ऐलान होने के साथ बंद कमरे में राजनीतिक दलों को यदि जिताऊ उम्मीदवार की दरकार है तो सड़क की लड़ाई को रोचक बनाने के लिए सेंधमारी, तोड़फोड़ की स्कि्रप्ट भी आगे बढ़ाई जा रही है.. इसी क्रम में भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल अचानक दिल्ली गए और लौटकर उन्होंने सत्ता और संगठन के चुनिंदा शीर्ष नेताओं से मंथन किया.. इस बीच प्रदेश प्रभारी विनय सहस्रबुद्धे भी भोपाल में सक्रिय हुए.. अमित शाह का दूसरा संभागीय दौरा यादगार बनाने के लिए भाजपा चौकन्नी है.. जो नहीं चाहती कि शाह को मालवा दौरे की तरह विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़े या फिर कार्यकर्ताओं की कमी संगठन की ताकत पर सवाल खड़े करे.. इसलिए दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाले गुना में रोड शो को लेकर क्षेत्र से बाहर के कार्यकर्ताओं को भी पाबंद किया जा रहा है.. तो राजमाता सिंधिया की कर्मस्थली सिलिप का जन्मस्थली से भी आगे प्रभाव वाले क्षेत्रों पर फोकस बनाने की तैयारी भी जोरों पर है.. जब 12 अक्टूबर जन्मदिन पर विशेष कार्यक्रम की शुरुआत होगी.. मंगलवार को अमित शाह के दौरे से पहले रामलाल की सक्रियता को चुनाव के दौरान क्षत्रपों को साधने और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के साथ टिकट चयन प्रक्रिया में मतभेदों को बड़े नेताओं के बीच पहले ही सुलझा लेने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.. भाजपा अपने कुछ सांसदों को विधानसभा का चुनाव लड़ाने का मन बना चुकी है.. तो कई सीटों पर कांग्रेस के बागियों के लिए भी स्थान छोड़कर रखने की रणनीति पर वह काम कर रही है.. इसके अलावा भाजपा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के उम्मीदवारों के नाम के साथ अपनी भलाई मान रही है.. जिसने समाजवादी पार्टी से ही दूरी नहीं बनाई, बल्कि कांग्रेस को ठेंगा दिखाकर कई सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए.. खबर यह आ रही है कि दो बड़े क्षेत्रीय आदिवासी संगठन गोंगपा और जयस नजदीक आ रहे हैं, लेकिन चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी सपाक्स के पास आरक्षित सीटों पर उम्मीदवारों का टोटा साफ देखा जा सकता है.. सपाक्स में रघुनंदन शर्मा की बगावत और घर वापसी के साथ भाजपा में आना इस बात का संकेत है कि आगे भी तोड़फोड़ जमकर होने वाली है.. बुंदेलखंड के खजुराहो पहुंचे सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कांग्रेस और भाजपा से निराश चुनाव लड़ने वाले नेताओं के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं, जो मंगलवार को ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी रणनीति का खुलासा करेंगे.. अखिलेश पहले ही बसपा सुप्रीमो मायावती के गठबंधन से दूरी बनाने के बाद कांग्रेस को यह कहकर निशाने पर ले चुके हैं कि अब इंतजार ज्यादा नहीं करेंगे, लेकिन इस बीच समाजवादी पार्टी ने बुधनी से जिस अर्जुन आर्य को टिकट दिया था उसने सपा से दूरी बनाकर कांग्रेस के भरोसे चुनाव में उतरने के संकेत दिए हैं.. दिल्ली में कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी में मधुसूदन मिस्त्री की मौजूदगी में हुई बैठक से जो खबर निकलकर आ रही है उसमें पहली सूची नवरात्रि के दौरान आ सकती है, लेकिन इस सूची में एआईसीसी और कमलनाथ, ज्योतिरादित्य द्वारा कराए गए सर्वे को आधार बनाकर सहमति बनाने की कोशिश के बीच कई सीटों पर विवाद की स्थिति निर्मित हो चुकी है.. कांग्रेस के इस सबसे बड़ी फोरम पर लगातार चल रही माथापच्ची के चलते कांग्रेस से भी बागी उम्मीदवारों की महत्वाकांक्षाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.. जो कांग्रेस की एकता पर सवाल खड़े कर सकते हैं.. इस बीच अमित शाह एक बार फिर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में गुना, शिवपुरी और ग्वालियर में अलग-अलग फोरम पर मंगलवार को ही विरोधियों पर आक्रमक करते हुए नजर आने वाले हैं.. जो मालवा के जोड़े में सीएम मिनिस्टर और एमएलए पर फोकस उठाते हुए कार्यकर्ता और राष्ट्रीय अध्यक्ष के बीच समन्वय बनाने की लाइन स्थापित कर चुके.. अमित शाह भी पिछले 2 माह में मध्यप्रदेश के कई सर्वे करा चुके हैं.. तो शिवराज के सर्वे के साथ निजी एजेंसी के दूसरे सर्वे ने भी भाजपा के वर्तमान विधायकों की नींद उड़ा दी है.. संघ का फीडबैक भी इन सर्वे रिपोर्ट ओं पर सवाल खड़ा कर रहा है ..कॉमन सर्वे रिपोर्ट में कई मंत्रियों के टिकट काटे जा सकते हैं.. तो बड़ी संख्या में विधायकों के परफारमेंस पर सवाल खड़े हो रहे हैं.. कांग्रेस ने भले ही एकला चलो की नीति पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, लेकिन उसकी नजर भी जातीय समीकरणों को दुरुस्त करने के लिए विरोधियों खासतौर से छोटे दलों के उम्मीदवारों पर है.. तो भाजपा में अमित शाह का वीटो पॉवर चर्चा में है.. देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली में कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी तो अमित शाह का मध्यप्रदेश पहुंचकर सिंधिया के गढ़ में रोड शो के साथ केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के ग्वालियर में संवाद और शिवपुरी में विशेष मंच पर कार्यकर्ताओं से रूबरू होना भाजपा में कितना जोश भर पाता है, जो 12 अक्टूबर से राजमाता सिंधिया के जन्म शती समारोह का आगाज करने जा रही है.. सवाल यह भी खड़ा होता है कि शिवराज सिंह चौहान की जन आशीर्वाद यात्रा जिन विधानसभा क्षेत्रों तक नहीं पहुंची थी आखिर उन सीटों के लिए भाजपा की रणनीति क्या होगी.. भाजपा की कोशिश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रचार में उतारने से पहले अमित शाह को सामने रखकर राहुल गांधी के रोड शो के मुकाबले भाजपा को बेहतर साबित करना है …तो सरकार ,मंत्री, विधायक के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी की आशंका को ध्यान में रखते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित कर उन्हें हर हाल में भाजपा को सत्ता में लाने के लिए काम पर लगाना रणनीति का हिस्सा है …अमित शाह तीसरे मोर्चे पर निर्णायक मतदाता माने जाने वाले जाति ,वर्ग और समुदाय से जुड़े लोगों को भरोसे में लेना है.. चाहे फिर वह आदिवासी या किसान और युवा सम्मेलन ही क्यों न हो राष्ट्रीय नेतृत्व की कोशिश चीफ मिनिस्टर शिवराज का चेहरा सामने रखने के बावजूद मोदी और शाह पर फोकस बनाने की नजर आती है …👍