सवाल दर सवाल

सिंधिया के गढ़ में ‘राजमाता’ भरोसे शाह की भाजपा.. राकेश अग्निहोत्री ‘सवाल दर सवाल’ नया इंडिया

मेन हेडर-
सिंधिया के गढ़ में ‘राजमाता’ भरोसे शाह की भाजपा
राजमाता सिंधिया के जन्मशती समारोह से पहले भाजपा करेगी चुनावी शंखनाद

राजमाता सिंधिया के जन्म सदी कार्यक्रम के आगाज से ठीक पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का शिवपुरी गुना और ग्वालियर का दौरा गौर करने लायक है, पॉलिटिक्स में टाइमिंग और परसेप्शन के महत्व को यदि समझा जाए, तो टाइमिंग को सिर्फ विधानसभा चुनाव और राजमाता के जन्मदिन से जोड़कर सीमित नहीं किया जा सकता, बल्कि बड़ा लक्ष्य, जो परसेप्शन बन रहा है, वह यह है, कि अमित शाह की नजर मिशन मोदी पर है, और उनके टारगेट पर सिंधिया परिवार के ही ज्योतिरादित्य सिंधिया होंगे, जो कहीं ना कहीं मध्य प्रदेश में भाजपा के सेनापति शिवराज सिंह चौहान को कांग्रेस की ओर से बड़ी चुनौती दे रहे हैं, जिन्हें भले ही सीएम इन वेटिंग तक सीमित रख दिया गया, और कमलनाथ के साथ कदमताल कर राहुल गांधी के लक्ष्य, यानी मिशन 2019 लोकसभा चुनाव से पहले, मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सत्ता का वनवास खत्म करना चाहते हैं, लेकिन अमित शाह ने दोनों संभागों की इस श्रृंखला में, क्षेत्र के पार्टी कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों के अलावा युवाओं से संवाद तक अपने आप को सीमित नहीं रखा है, बल्कि जनसंपर्क और रोड शो के साथ वह सिंधिया के गढ़ में भाजपा के लिए माहौल बनाने जा रहे हैं, जहां शिवराज सिंह चौहान विधानसभा के अंतिम दो उपचुनाव हार चुके हैं, और भाजपा मध्य प्रदेश में जीत की हैट्रिक बनाने के बावजूद, इस क्षेत्र में सिंधिया के गढ़ को अभी तक नहीं भेद पाई। ज्योतिरादित्य के संसदीय क्षेत्र शिवपुरी-गुना ज़िले की सीटों को कभी अमित शाह ने छिंदवाड़ा और झाबुआ के साथ जोड़कर उत्तर प्रदेश के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को अलग से जिम्मेदारी सौंपी थी, तो सवाल यहीं पर खड़ा होना लाजमी है, कि क्या अमित शाह भाजपा और शिवराज के लिए चुनौती बनने की क्षमता रखने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया को उनके संसदीय क्षेत्र और सिंधिया घराने के वर्चस्व वाले ग्वालियर चंबल की राजनीति में सीमित कर भाजपा की ताकत में इजाफा करेंगे जहां कांग्रेस एकजुट होती हुई नजर आ रही है, तब जबकि ग्वालियर संसदीय सीट पर भाजपा के केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर का कब्जा है। इस बीच मालवा दौरे के बाद अमित शाह गुना में जनसंपर्क करें या रोड शो करेंगे..
विधानसभा चुनाव 2018 के साथ 2019 लोकसभा यानी मिशन मोदी को लेकर भी अमित शाह संभागीय दौरे के दूसरे पड़ाव में बड़े सियासी हित साधने जा रहे हैं। शिवपुरी में कार्यकर्ता सम्मेलन तो ग्वालियर में युवा संवाद.. सिंधिया घराने का वर्चस्व वाला क्षेत्र जहां आज भी राजमाता सिंधिया के नाम पर भाजपा वोट मांगती रही है, शिवपुरी-गुना ज्योतिरादित्य का संसदीय क्षेत्र जहां टीम शिवराज कोलारस मुंगावली अंतिम दो विधानसभा के उपचुनाव हारी थी। उस वक्त मुख्यमंत्री ने पुराने हार के आंकड़े में भाजपा का ग्राफ बढ़ने का दावा कर पार्टी की लाज बचाई थी, तो चित्रकूट उपचुनाव में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह को मिली जीत के श्रेय के बाद ज्योतिरादित्य, कांग्रेस की अंदरूनी पॉलिटिक्स में सीएम के बड़े दावेदार के तौर पर उभर कर सामने आए, जिन्होंने पहले ही अटेर उपचुनाव में भी कमल नहीं खिलने दिया था। बाद में कांग्रेस मैदान में भाजपा को चुनौती देती हुई नज़र आई, यह वही क्षेत्र है, जहां भाजपा के शिवराज को राजमाता सिंधिया के नाम पर वोट मांगना पड़ता, तो यहीं से विधायक सह मंत्री और राजमाता की पुत्री यशोधरा राजे की नाराजगी की खबरें भाजपा की अंदरूनी सियासत में उबाल मारती रही हैं। शिवपुरी-गुना का मतलब बहुत पहले अमित शाह के निशाने पर आ चुकी लोकसभा की जिन 3 सीट के लिए झाबुआ और छिंदवाड़ा की उत्तर प्रदेश के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को अलग से यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लोकसभा चुनाव में यहां कमल खिलाना बड़ा मकसद रहा, यह बात और है, कि इक्का-दुक्का दौरे करने के बाद भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व अपने इस एजेंडे को भूल गया था। क्षेत्र से लगातार लोकसभा का चुनाव जीत कर भाजपा की परेशानी में इजाफा करते रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए नारे लगने लगे थे, कि अबकी बार सिंधिया सरकार, जो दिल्ली में यदि राहुल गांधी के सबसे करीबी नेताओं में शामिल हैं, तो मध्यप्रदेश में कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनते-बनते रह गए, और उन्हें चुनाव अभियान समिति की कमान संभालनी पड़ी। बावजूद इसके अनुभवी कमलनाथ के साथ युवा ज्योतिरादित्य एक जोड़ी के तौर पर अभी भी कांग्रेस के अंदर मुख्यमंत्री के दो बड़े दावेदारों में से एक बने हुए हैं, जो लगातार शिवराज के खिलाफ अपने विशेष अंदाज में मैदान में मोर्चा संभाले हुए हैं, तो खुद प्रभात झा, जयभान सिंह पवैया जैसे नेताओं के निशाने पर हैं। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, राज्य के संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा के साथ कई मंत्री और पदाधिकारी इस संसदीय क्षेत्र में लगातार सक्रियता बनाए हुए हैं। पिछले 6 माह में ज्योतिरादित्य ने दिग्विजय सिंह और उनके पुत्र जयवर्धन सिंह के साथ बेहतर तालमेल स्थापित कर अपने संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस की गुटबाजी पर लगभग विराम लगाया है। गुना-शिवपुरी से लेकर ग्वालियर-चंबल की राजनीति में भिंड-मुरैना तक सिंधिया ने दिग्विजय सिंह समर्थकों को भरोसे में लेकर, भाजपा की घेराबंदी मजबूत की और अपनी लोकप्रियता साबित की है। इधर नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने राजमाता सिंधिया के जन्म तिथि12 अक्टूबर से समारोह की भव्य तैयारियां कर इस चुनावी साल में विशेष आयोजन की स्क्रिप्ट तैयार की, जिसमें भाजपा नेत्री और शिवराज कैबिनेट में शामिल मंत्री राजमाता की पुत्री यशोधरा राजे को भले ही स्थान नहीं मिला, लेकिन पार्टी नेतृत्व द्वारा राजमाता को महत्व दिया जाने पर यशोधरा ने संतोष ही नहीं व्यक्त किया, बल्कि खुशी भी जताई। भाजपा की अंदरूनी राजनीति में महल विरोधी नेताओं से खटपट, कांग्रेस और ज्योतिरादित्य को कहीं ना कहीं ताकत देती रही है, तो सवाल यहीं पर खड़ा होता है अमित शाह की संभागीय बैठकों का सिलसिला, जो नए सिरे से मालवा से शुरू हो चुका है, आखिर उस शिवपुरी में क्या गुल खिलाएगा, जहां शिवराज और उनके रणनीतिकार पिछले 15 साल में ज्योतिरादित्य को बड़ी चुनौती नहीं दे पाए। अमित शाह का शिवपुरी पहुंचना विधानसभा ही नहीं बल्कि लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए, एक बड़ा मूवमेंट माना जा सकता है। शाह हमेशा बड़ी चुनौती स्वीकार कर आगे बढ़े हैं और अब जब राहुल गांधी के रोड शो में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य की जोड़ी शिवराज ही नहीं नरेंद्र मोदी और अमित शाह के लिए परेशानी खड़ा करने की रणनीति पर काम कर रही है, तब देखना दिलचस्प होगा कि अमित शाह ज्योतिरादित्य को टारगेट पर लेकर कांग्रेस के मंसूबों पर पानी फेर पाते हैं या फिर यह दांव भी उल्टा पड़ेगा, क्योंकि एक और अमित शाह से लेकर शिवराज सिंह चौहान, राजमाता सिंधिया के नाम पर इस क्षेत्र में महल की राजनीति में भाजपा के वर्चस्व को स्थापित करने की कोशिश करेंगे, तो दूसरी ओर ज्योतिरादित्य की घेराबंदी को असरदार सिद्ध करना उनका बड़ा मकसद होगा। अमित शाह ने शिवराज की जन आशीर्वाद यात्रा के चलते, जबकि पीएम नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश में चुनावी सभाएं करने से पहले संभागीय दौरों का जो कार्यक्रम बनाया, यह उसका दूसरा पड़ाव होगा। जहां वह ज्योतिरादित्य और दिग्विजय सिंह के प्रभाव वाले गुना से लेकर शिवपुरी और ग्वालियर में तीन अलग-अलग कार्यक्रमों में शिरकत करने वाले हैं। क्षेत्र से शिवराज मंत्रिमंडल में कई दिग्गज नेता शामिल हैं तो केंद्र में मोदी सरकार के अंदर नरेंद्र तोमर प्रतिनिधित्व करते हैं। कुल मिलाकर इस क्षेत्र में सिंधिया घराने का असर रहा है, और इस परिवार से जुड़े बुआ भतीजे, दो अलग-अलग दलों से जुड़े हुए हैं, भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व राजमाता सिंधिया के जन्मदिन पर, एक साल तक जो विशेष कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला लिया है, अमित शाह के दौरे के ठीक बाद 12 अक्टूबर से उसकी शुरुआत होने वाली है। यूं तो पूरे प्रदेश में अभियान के तौर पर यह काम भाजपा ने अपने हाथों में लिया है, लेकिन सागर से राजमाता के रिश्ते को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय मंत्री उमा भारती जैसी नेता भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बन सकती हैं