सवाल दर सवाल

शाह की शह पर मोदी देंगे राहुल को मात… राकेश अग्निहोत्री ‘सवाल पर सवाल’ नया इंडिया

सवाल दर सवाल
शाह की शह पर मोदी देंगे राहुल को मात…

— (कांग्रेस -भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आज मध्य प्रदेश में, राहुल चंबल, महाकौशल तो अमित शाह मालवा के दौरे पर)

मिशन मोदी 2019 के लिए जरूरी 2018 मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की तूफानी दौरों से पहले चुनावी बिसात बिछाने पहुंच रहे अमित शाह की शह पर क्या भाजपा एक बार फिर कांग्रेस के साथ बतौर राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को मात दे पाएंगे …जो नाथ सिंधिया की जोड़ी बनाकर नेतृत्व और चेहरा विहीन कांग्रेस को एक साथ बस में लेकर घूम रहे हैं? यह सवाल इसलिए मायने रखता है.. क्योंकि पिछले कुछ दिनों से राहुल गांधी रोड शो के जरिए मालवा, विंध्य के बाद अब ग्वालियर-चंबल के महाकौशल में उस वक्त कांग्रेस को ताकत देने के लिए आ रहे हैं.. जब जंबूरी मैदान में नमो-शिवाय की जोड़ी के साथ पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरने के बाद अमित शाह उस मालवा क्षेत्र में पहुंच रहे हैं.. जहां पहले ही राहुल गांधी की धमाकेदार एंट्री हो चुकी है.. यहीं पर सवाल खड़ा होता है कि चुनावी बिसात पर अमित शाह मध्य प्रदेश के लिए विशेष तौर पर तैनात किए गए चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, मीडिया की जिम्मेदारी संबित पात्रा जैसे अपने मोहरों को फिट कर शह देते हुए नजर आ रहे हैं.. तो फिर सवाल बसपा से गठबंधन तोड़ भाजपा के लिए सीधी चुनौती देने का मूड बना चुके राहुल गांधी को क्या नरेंद्र मोदी को मात दे पाएंगे.. जिन्होंने लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम के साथ मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव को सेमीफाइनल मानकर अपनी प्रतिष्ठा से पहले ही जोड़ लिया है.. इसे संयोग ही कहा जाए या कांग्रेस और भाजपा की काउंटर राजनीत की दोनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष एक ही दिन मध्यप्रदेश में प्रवास के दौरान एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोलने जा रहे हैं… तो बने सियासी माहौल का आंकलन हम उस वक्त कर रहे हैं.. जब चर्चा चुनाव आचार संहिता की तारीख को लेकर ज्यादा है.. जो शुक्रवार के दिन ही ठीक एक हफ्ते बाद मुख्य चुनाव आयुक्त के विदेश दौरे से लौटने के बाद कभी भी घोषित की जा सकती है..

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में हुए भाजपा के कार्यकर्ता महाकुंभ और राहुल गांधी के लगातार रोड शो के बीच जब शिवराज सिंह चौहान की जनआशीर्वाद यात्रा सुर्खियां बटोर रही है.. तब देश के 2 सबसे बड़े राजनीतिक दलों के बतौर अध्यक्ष कमान संभालने वाले राहुल गांधी और अमित शाह लगभग एक समय पर अलग-अलग स्थान पर मध्यप्रदेश में नजर आएंगे.. राहुल गांधी सुबह करीब 11 बजे जब ग्वालियर से मुरैना पहुंचकर पी वी राजगोपाल और सुब्बाराव की मौजूदगी में दिल्ली कूच कर चुके किसानों से मुलाकात करेंगे.. तब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह लगभग इसी समय ग्वालियर-चंबल से दूर मालवा के इंदौर में पैदल मार्च कर भाजपा के लिए वोट और सपोर्ट मांगेंगे.. राहुल गांधी और अमित शाह दोनों दिल्ली लौटने से पहले जिस मंच पर नजर आने वाले हैं वह गौर करने लायक है.. राहुल गांधी किसानों से मुलाकात के बाद ग्वारीघाट-जबलपुर में नर्मदा पूजन करेंगे और रोड शो में शामिल होंगे.. तो अमित शाह कार्यकर्ताओं से चर्चा कर इंदौर से निकलकर झाबुआ में आदिवासी सम्मेलन तो जावरा में किसान सम्मेलन को संबोधित करने के बाद उज्जैन में पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर महाकाल के दर पर जाकर उनका आशीर्वाद भी लेंगे.. कह सकते हैं कि दोनों शिवभक्त राहुल बाबा और अमित शाह एक बार फिर सियासत में धर्म को महत्व देते हुए नजर आएंगे.. राहुल गांधी मध्यप्रदेश पहुंचने से पहले एक कार्यक्रम में मध्यप्रदेश में गठबंधन की संभावना लगभग खत्म होने के बावजूद उम्मीद जता चुके हैं कि 2019 में मायावती उनके साथ होंगी.. उन्होंने कहा कि बेहतर होता कि मध्यप्रदेश में बसपा और कांग्रेस साथ आगे बढ़ते.. लेकिन यह स्थिति निर्मित नहीं हुई.. तो कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला.. सवालों के जवाब में राहुल ने फिर स्पष्ट किया है कि सहयोगी दल चाहेंगे तो प्रधानमंत्री की उनकी उम्मीदवारी पर सहमति बन जाएगी.. राहुल ने कहा कि राज्य में गठजोड़ और केंद्र में एक साथ आना दोनों अलग-अलग बातें हैं.. यानी पिछले रोड शो के मुकाबले राहुल गांधी को बसपा और गठबंधन के बिना कांग्रेस को आगे ले जाने का जिम्मा निभाना होगा.. तो दूसरी ओर साधु-संत जब अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाए जाने की मांग कर मामले को गर्मा चुके हैं … पिछले दिनों अमित शाह साधु संतों से मुलाकात कर चुके हैं और विश्व हिंदू परिषद के बैनर तले यही साधु संत मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल कर एट्रोसिटी एक्ट और शाहबानो प्रकरण की तरह कांग्रेस को याद दिलाते हुए मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग कर रहे जो राष्ट्रपति से मिले तो एक बार फिर दिल्ली के तालकटोरा में नवंबर में इकट्ठे होने वाले हैं.. सरसंघचालक मोहन भागवत पहले ही राम मंदिर के मुद्दे को यह कहकर उठा चुके हैं किस निर्माण का विरोध करना विरोधी दलों के लिए भी अब आसान नहीं होगा .. ऐसे में दीपावली के बाद के बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के अयोध्या पहुंचने के ऐलान ने मोदी और शाह की भाजपा को मंदिर निर्माण पर सीमित विकल्प का चयन करने का दबाव बनाया.. तब अमित शाह मध्यप्रदेश आ रहे हैं.. जिनकी पिछली बैठक सवर्णों के सड़क पर होने के कारण स्थगित कर दी गई थी.. राहुल गांधी हों या अमित शाह दोनों ने अपनी प्राथमिकताओं में किसानों को सबसे ऊपर रखा है.. तो सोशल इंजीनियरिंग के नाम पर भाजपा ने उस आदिवासी वोट बैंक की भूमिका को भी समझा है.. जिस पर कांग्रेस की नजर है.. तो जयस ने शक्ति प्रदर्शन कर सारे गणित गड़बड़ाने के संकेत दिए.. अमित शाह जिस झाबुआ में आदिवासियों से मिलेंगे वहां रातों-रात पार्टी के जिलाध्यक्ष को बदल दिया गया.. तो उसका सेक्स स्कैंडल कनेक्शन चर्चा में है.. कुल मिलाकर मायावती ने जिस तरह लोकसभा चुनाव के लिए जरूरी महागठबंधन को अस्तित्व में लाने के पहले ढेर कर दिया.. भाजपा उसका पूरा फायदा उठाने की फिराक में है.. लेकिन सत्ता में रहते मोदी सरकार का एट्रोसिटी एक्ट के प्रति रवैया शिवराज की भाजपा के लिए भी बड़ी चुनौती बनकर सामने है.. पिछले दिनों विनय सहस्रबुद्धे और रामलाल जैसे बड़े नेताओं के भोपाल दौरे के दौरान यह खबर सामने आई थी कि शिवराज सिंह चौहान, राकेश सिंह, सुहास भगत और नरेंद्र सिंह तोमर के बीच वह तालमेल नहीं बन सका.. जो 2013 और 2008 में सत्ता और संगठन के बीच नजर आ चुका है.. तो सवाल यहीं पर खड़ा होता है कि क्या राष्ट्रीय नेतृत्व और केंद्र में भाजपा की सरकार होने के कारण राज्यों की सरकारों से सामंजस्य कमजोर हुआ है.. अभी तक कांग्रेस-भाजपा के दिग्गज नेताओं को अपने विरोध प्रदर्शन से परेशान करने वाले सवर्णों का विरोध प्रदर्शन और आंदोलन क्या अमित शाह और राहुल गांधी के लिए भी सिरदर्द बनेगा …या फिर दोनों पार्टियां यह नकारात्मक संदेश ना जाए.. इसके लिए कमर कस चुकी हैं.. राहुल गांधी मध्यप्रदेश के दौरों में रोड शो के दौरान मोदी को राफेल तो शिवराज को व्यापम समेत दूसरे मुद्दों पर घेर चुके हैं.. देखना दिलचस्प होगा कि मायावती द्वारा कांग्रेस को कोसने के बाद राहुल गांधी मोदी-शाह और भाजपा को आखिर किन मुद्दों पर घेरते हैं तो राहुल बाबा को खरी-खोटी सुना कर उनसे लगातार सवाल पूछते नजर आ रहे अमित शाह इस दौरे में राहुल गांधी को कैसे घेरेंगे? जहां तक बात चुनावी माहौल में मोदी सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल के दाम कम करने की है.. तो कांग्रेस इसे ऊंट के मुंह में जीरा बता चुकी है.. तो भारत और रूस के साथ सैन्य समझौते और हथियार खरीदी से हिंदुस्तान का स्वाभिमान जगाने की बात है तो यह सब कुछ उस वक्त हो रहा है जब राफेल सौदे पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी रोज नए सिरे से आक्रामक होते जा रहे हैं.. शिवराज सिंह चौहान की जन आशीर्वाद यात्रा जारी है जिन्होंने पिछले दिनों राहुल गांधी पर फन मशीन बताकर हमला किया था.. कुल मिलाकर राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के सभी छात्रों को एक साथ लेकर कांग्रेसमें जो जान भूखी और रोड शो के दौरान जनता का जो समर्थन हासिल किया उसके बाद अमित शाह का यह द्वारा मायने रखता है …क्योंकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार संहिता लगने से पहले ना सिर्फ संगठन के नेताओं कार्यकर्ताओं बल्कि समाज के हर वर्ग चाहे किसान आदिवासी बुद्धिजीवी अनुसूचित जाति सभी से रूबरू होना चाहते हैं तो देखना दिलचस्प होगा कि अगले 1 सप्ताह में जब चुनाव आचार संहिता जारी होगी …तब तक राहुल गांधी और अमित शाह मध्यप्रदेश में चुनावी माहौल किस हद तक गरमा पाते हैं चर्चा नरेंद्र मोदी के भी चुनाव तारीख घोषित होने से पहले मध्य प्रदेश का एक और दौरा करने की है..