सवाल दर सवाल

कड़वे दिन में ‘चुनावी शंखनाद’ अच्छे दिन आएंगे..? राकेश अग्निहोत्री ‘सवाल दर सवाल’ नया इंडिया

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सवाल दर सवाल, ‘राकेश अग्निहोत्री ‘नया इंडिया
कड़वे दिन में ‘चुनावी शंखनाद’ अच्छे दिन आएंगे..?
गणेश विसर्जन के साथ.. श्राद्ध पक्ष के दौरान भाजपा यदि कार्यकर्ता महाकुंभ के जरिए चुनावी शंखनाद करने जा रही है.. तो राहुल गांधी अपने दौरों की निरंतरता मध्यप्रदेश में बढ़ाते हुए सतना-रीवा पहुंच रहे हैं.. जो पहले ही भोपाल में रोड शो कर चुके हैं.. लेकिन सवाल हिंदू और हिंदुत्व की पैरोकार भाजपा की रणनीति को लेकर अंदरखाने खड़े किए जा रहे हैं.. जो सोचने को भी मजबूर करते हैं.. निश्चित तौर पर भाजपा की मध्यप्रदेश में सरकार बनने के बाद सत्ता में रहते चुनावी शंखनाद के इस दिन की तारीख बतौर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2008 में मुकर्रर कर दी थी.. जिसके लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्मदिन को चुना गया और यह सिलसिला आगे बढ़ा और परंपरा का हिस्सा बना.. जब 2013 में शिवराज सिंह चौहान और नरेंद्र सिंह तोमर की जोड़ी ने कदमताल करते हुए चुनावी शंखनाद कर विजयश्री हासिल की.. 2018 विधानसभा चुनाव के लिए भी प्रदेश नेतृत्व ने इसे अपनी मंजूरी दी और केंद्रीय मंत्री रहते चुनाव अभियान समिति की कमान संभालने वाले नरेंद्र सिंह तोमर और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 25 सितंबर को ही चुनावी शंखनाद की रणनीति बनाई.. बस फर्क यह है कि इस बार दिल्ली में भाजपा की सल्तनत है और बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महाकुंभ का हिस्सा बनने वाले हैं.. तो प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका में सांसद राकेश सिंह होंगे.. पिछली बार इस महाकुंभ में मोदी जब शामिल हुए थे.. तो गुजरात के मुख्यमंत्री रहते उन्हें चुनाव अभियान समिति की कमान गोवा बैठक के बाद सौंप दी गई थी.. मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मोदी इस दिन को यादगार बनाने के लिए देश को नहीं, मध्यप्रदेश को भी कई सौगात दे सकते हैं.. लेकिन सवाल श्राद्ध पक्ष में भाजपा का चुनावी शंखनाद आखिर चुनाव में क्या गुल खिलाएगा? वह भी तब जब भाजपा जो मुहूर्त का इंतजार कर अपने फैसले सुनाती तो नए आयाम गढ़ती रही है.. पिछले 2 विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार दिल्ली में भाजपा की सरकार होने के बावजूद कांग्रेस के निशाने पर भाजपा से ज्यादा शिवराज हैं.. दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सभी शिवराज की घेराबंदी करने में जुटे हैं.. शिवराज ने इस बार भी जन आशीर्वाद के जरिए मतदाताओं का भरोसा जीतने की कोशिश की है.. लेकिन पिछले दो महाकुंभों की तुलना में इस बार जन आशीर्वाद यात्रा का समापन 25 सितंबर को नहीं किया जाएगा.. तो सवाल यह भी अच्छे दिन आएंगे तो कैसे और किसके…
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(देशद्रोही मामले में शिवराज के खिलाफ एक हफ्ते में कोर्ट जाएंगे दिग्विजय)
दिग्विजय सिंह ने ऐलान कर दिया है कि देशद्रोही वाले मामले में वो 1 हफ्ते के अंदर कोर्ट जाएंगे.. मानहानि का दावा करने के अपने वादे को निभाने का दावा दिग्गी राजा ने तब किया है जब व्यापमं पार्ट 2 को लेकर न्यायालय ने 20 दिसंबर की तारीख मुकर्रर की है.. यानी विधानसभा चुनाव को लेकर जब प्रचार निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुका होगा.. तब व्यापमं पर नए सिरे से न्यायालय को गौर करना है.. जिसके लिए कपिल सिब्बल, विवेक तन्खा जैसे नामी वकील दिग्विजय सिंह के बयान देने के वक्त मौजूद थे.. दिग्विजय सिंह ने 27000 पन्नों से जुड़े तथ्य के दम पर कहा है कि इसकी असली जड़ शिवराज है.. जबकि जांच एजेंसियों से लेकर न्यायालय पहले ही मुख्यमंत्री को क्लीनचिट दे चुके हैं.. लेकिन दिग्विजय सिंह के तेवर नरम नहीं पड़े.. उन्हें भरोसा है कि सच जरूर सामने आएगा.. अनादि टीवी के दफ्तर पहुंचे दिग्विजय सिंह ने व्यापमं घोटाले पर अपनी लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने का दावा किया, तो लगे हाथ यह भी साफ कर दिया कि वो कमलनाथ और सिंधिया के साथ हैं.. इसे दिग्विजय रिटर्न कहना सही नहीं होगा.. जो पहले ही चुनाव ना लड़ने का ऐलान कर चुके हैं और एक सवाल के जवाब में उन अटकलों पर भी यह कहकर विराम लगा दिया कि धर्मपत्नी अमृता राय सिंह भी कोई चुनाव नहीं लड़ेंगी.. नर्मदा परिक्रमा के दौरान दिग्गी राजा के साथ पूरे समय यात्रा की सहयोगी बनी अमृता राय के चुनाव लड़ने की अटकलें जोर पकड़ रही थीं.. कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में दिग्विजय सिंह ने भले ही खुद को नाथ-सिंधिया के मुकाबले पीछे खड़ा रखा है.. लेकिन जिस तरह उन्होंने आक्रामक रुख शिवराज के खिलाफ अख्तियार किया.. वो उनकी प्रभावी मौजूदगी दर्शाता है.. जिन्होंने व्यापमं पार्ट 2 की लड़ाई नए सिरे से शुरू कर दी है.. तो पिछले दिनों देशद्रोही मामले में लाव-लश्कर के साथ टीटी नगर थाने जा पहुंचे राजा ने कहा था कि यदि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया और झूठे आरोप लगाए गए तो वो जल्द ही मानहानि का दावा करेंगे.. तो एक ओर व्यापमं पार्ट 2 और दूसरी ओर देशद्रोही के मामले में एक हफ्ते के अंदर न्यायालय जाने का दावा करने वाले दिग्विजय सिंह जिस तरह फ्रंटफुट पर नजर आ रहे हैं.. दूसरे नेता पीछे छूटते देखे जा सकते हैं.. दिग्विजय सिंह ने पहला कदम यदि कार्यकर्ता महाकुंभ से ठीक पहले उठाकर प्रदेश की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है.. तो राहुल गांधी के दूसरे दौरे से पहले और भाजपा के मोदी-शाह दौरे के बाद एक बार फिर मानहानि को लेकर न्यायालय जाने वाले हैं.. तो कह सकते हैं कि राजा के इरादे बुलंद हैं और वो समझौते की सभी गुंजाइश खत्म कर चुके हैं और न्यायालय की लड़ाई को लेकर उन्होंने अपना मन बना लिया है.. देखना दिलचस्प होगा कि व्यापमं पार्ट 2 का अंत क्या होगा? और राहुल गांधी कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व की नजर में दिग्विजय सिंह की अहमियत पीढ़ी परिवर्तन के दौर में क्या रहेगी..?

{शिवराज को मुख्यमंत्री बनाने के लिए मोदी शाह करेंगे जंबूरी से शंखनाद}

जंबूरी का वही मैदान जहां से भाजपा ने शिवराज के मुख्यमंत्री रहते 2008 और 2013 में चुनाव का शंखनाद पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्मदिन पर किया था एक बार फिर वही तारीख लेकिन इस बार श्राद्ध पक्ष यानी कल भेजें हिंदुत्व के पैरोकार और भगवाधारी चुनावी शंखनाद करने जा रहे हैं बेबी पार्टी के सबसे लोकप्रिय नेता नरेंद्र मोदी जो देश के प्रधानमंत्री की मौजूदगी में यानी पर्दे के पीछे संघ की रणनीति का हिस्सा और अनुभवी नेताओं की दूरदर्शिता जब कांग्रेस को लगातार चौथी बार मध्य प्रदेश की सत्ता से दूर रखने के लिए दांव पर लग चुकी है तब पॉलिटिक्स इलेक्शन और उसकी टाइमिंग गौर करने लायक है..पित्र पक्ष की शुरुवात मंगलवार से राजनीति का वैभव इस वक्त चरम पर है। मामला शिवराज और दिग्विजय की अदावत पर आकर टिक गया है। पित्रपक्ष की शुरुवात मसलन अशुभ मानी जाती है, मगर ये देखना होगा कि राम भक्त भगवा धारियों के लिए मंगलवार कितनो का मंगल करेगा ..कौन राजनीति का मैदान मारेगा। भाजपा कार्यकर्ता महाकुम्भ 25 सितंबर मतलब कड़वे दिन का आगाज , इसका मतलब कड़वे दिन में सार्थक शुरुवात। वेसे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इनको महत्व नही देते,लेकिन उनके बारे में कहा जाता है कि वो अपने लिहाज से पंडितो से सलाह करते है। फिर भी मध्यप्रदेश के बन पड़े सियासी परिदृश्य से मोदी का यह दौरा कार्यकर्ताओ को कितना दम दे पाएगा देखना होगा। क्योंकि दूसरे राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश की राजनीति गरमाई हुई है चाहे फिर वह भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं का व्यक्तिगत तौर पर आमने सामने खड़े नजर आना या फिर पिछले 3 विधानसभा चुनाव के मुकाबले आरक्षण समर्थक विरोधी सवर्ण और अनुसूचित जाति जनजाति से जुड़े राजनीतिक और गैर राजनीतिक संगठनों का शक्ति प्रदर्शन और रस्साकशी दोनों प्रमुख दलों के लिए सिरदर्द बना हुआ है . तो ऐसे में सवाल खड़ा होना लाजमी है कि कल में दिल में भाजपा का चुनावी शंखनाद आखिर किसके अच्छे दिन लाएगा या फिर सिंहस्थ से लेकर दूसरे सारे मिथक छोड़कर शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर नया कीर्तिमान बनाएंगे