सवाल दर सवाल

नमो-शिवाय की मुसीबत बढ़ाएगा राफेल-व्यापमं..! राकेश अग्निहोत्री ‘सवाल दर सवाल’ नया इंडिया

सवाल दर सवाल
नमो-शिवाय की मुसीबत बढ़ाएगा राफेल-व्यापमं..!

देश के साथ विदेश की धरती से राफेल सौदे में भ्रष्टाचार के साथ केंद्र से राज्य की राजनीति में भ्रष्टाचार से जुड़ा मध्यप्रदेश का चर्चित घोटाला व्यापमं एक बार फिर चर्चा में है.. राहुल गांधी के जिस भूकंप लाने की बात का भाजपा ने जमकर कभी माखौल उड़ाया था.. आखिर उसे जोर का झटका देते हुए मानो मोदी के रणनीतिकारों को बैकफुट पर ला खड़ा किया है.. जिसका स्पष्टीकरण सवालों के घेरे में.. तो दूसरी ओर एक बार फिर व्यापमं का जिन्न निकालने के लिए दिग्विजय सिंह ने मशहूर वकील कपिल सिब्बल की साख भी दांव पर लगाकर उन्हें मीडिया के सामने पेश किया.. व्यापमं के मुद्दे पर विधानसभा के चुनाव हार चुकी कांग्रेस का दावा है कि इस बार ई-टेंडरिंग और दूसरे मुद्दों के साथ व्यापमं को वो बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने जा रही है … उनके निशाने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान होंगे.. बड़ा सवाल क्या व्यापमं का मुद्दा चुनावी बेला में शिवराज का सिरदर्द बढ़ाने वाला है तो राफेल की गूंज मोदी के तिलिस्म को कहीं भेद तो नहीं देगी.. बड़ा सवाल क्या जिस नमो-शिवाय की जोड़ी के भरोसे अमित शाह ने मध्यप्रदेश में चौथी बार लगातार सरकार बनाने के लिए मिशन मोदी 2019 का ताना-बाना बुना टूट सकता है… या फिर ये सिर्फ चुनावी स्टंट साबित होगा.. क्या नमो शिवाय की साख कसौटी पर है और भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जो परसेप्शन बन रहा है वह पॉलिटिक्स का गणित गड़बड़ा सकती है..फिर भी मौसम चुनाव का है और ये पब्लिक है ये सब जानती है…

राष्ट्रीय राजनीति में मोदी सरकार के खिलाफ राफेल के मुद्दे पर राहुल गांधी की कांग्रेस का आक्रामक रवैया.. ऐसे में सवाल मौजू है क्या उसके साइड इफेक्ट मध्यप्रदेश चुनाव पर असर छोड़ेगा? इसके नफा-नुकसान का आंकलन किसी निष्कर्ष पर पहुंच पाता या फिर कोई माहौल बनता और बिगड़ पाता.. इस बीच मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं घोटाले का जिन्न भी बाहर लाया गया है.. वो भी तब जब नरेंद्र मोदी करीब 3 घंटे के भोपाल दौरे पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्मदिन के दिन भाजपा कार्यकर्ता महाकुंभ में आ रहे हैं.. तब भ्रष्टाचार से जुड़े राफेल मामले में मोदी राहुल गांधी के निशाने पर आ चुके हैं.. खुद राहुल गांधी भी मोदी के मध्यप्रदेश दौरे के बाद एक बार फिर 27-28 सितंबर को रीवा-सतना के दौरे पर आएंगे.. जिनका रोडशो पहले ही कुछ दिन पहले भोपाल में हो चुका है.. राष्ट्रीय राजनीति में कहें या दिल्ली में यूपीए-एनडीए गठबंधन से दूर मोदी और राहुल जिस तरह आमने-सामने आ खड़े हुए हैं.. उसकी गूंज मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में भी सुनाई देगी.. ऐसे में नमो-शिवाय यदि कांग्रेस के निशाने पर आए हैं.. तो उसकी वजह उनका सरकार में रहना और सरकार में रहते लिए गए फैसले और उनका विवादों से नाता.. चाहे फिर वो मोदी सरकार का राफेल सौदा हो या फिर मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार रहते सामने आया चर्चित व्यापमं घोटाला.. राफेल यदि सैन्य शक्ति, व्यापमं मध्यप्रदेश की शिक्षा और नौकरियों से जुड़ा एक ऐसा घोटाला है.. जिसने युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया.. शायद यही वजह है कि जब देश के साथ मध्यप्रदेश में आरक्षण समर्थक और विरोधी के बीच सवर्ण और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के समर्थक राजनीतिक और गैर राजनीतिक अधिकारी-कर्मचारी संगठन इस लड़ाई में कूदकर मध्यप्रदेश में एक नया माहौल बना चुके हैं.. तब सवाल ये खड़ा होता है कि क्या विकास और दूसरे वादों के साथ बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार चुनाव में बनने वाला है और नमो-शिवाय की जोड़ी को सत्ता में रहते भाजपा को इससे बाहर लाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा.. एक ओर राहुल गांधी का रुख सख्त और वो अपनी बात पर कायम हैं तो दूसरी ओर दिग्विजय सिंह ने व्यक्तिगत तौर पर परिवाद के जरिए न्यायालय में नए सिरे से इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया है.. दिग्गी राजा के समर्थन में कांग्रेस के जाने-माने वकील कपिल सिब्बल, विवेक तन्खा ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ खुलकर सामने आ चुके हैं यानी व्यापमं की परतें एक बार फिर नए सिरे से खोली जा रही हैं.. जिस मुद्दे की चुनाव में हवा निकल चुकी और देश की जानी-मानी एजेंसी के साथ न्यायालय कहीं ना कहीं शिवराज को बड़ी राहत पहले ही दे चुके हैं.. एक बार सिर्फ कांग्रेस उनकी घेराबंदी में जुट गई है.. यह सब तब सामने आया है जब नेतृत्व-चेहरे के संकट से जूझ रही कांग्रेस अभी तक शिवराज के मुकाबले बड़ा विकल्प मतदाता के सामने पेश नहीं कर पा रही है और शिवराज जनआशीर्वाद यात्रा के जरिए अपने मतदाताओं का भरोसा जीतने के लिए सड़क पर हैं.. शिवराज विदिशा के अपने उस गणेश मंदिर भी पहुंचे जिनके प्रति उनकी अगाध आस्था ऐसा लगा वह अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों से बेफिक्रे …जिस व्यापमं मुद्दे की चुनाव में पहले ही हवा निकल चुकी है.. उसे मशहूर वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने नए तर्क, नए तथ्य सामने रखकर हार्ड डिस्क से लेकर 27 हजार पेजों के लेखा-जोखा की ओर मीडिया का ध्यान आकर्षित किया.. उस पर न्यायालय को सोचना और फैसला लेना है.. लेकिन सीबीआई से लेकर एसटीएफ और दूसरी जांच एजेंसियों की प्रक्रिया पर नए सिरे से सवाल खड़े कर कपिल सिब्बल ने पूजा प्वाइंट ये संदेश तो दे ही दिया है कि व्यापमं घोटाले को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.. सरकार की ओर से प्रवक्ता संसदीय मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सफाई देने के साथ पलटवार कर इसे चुनावी स्टंट करार देने में कोई कसर नहीं छोड़ी.. लेकिन सवाल यहीं पर खड़ा होता है कि सच्चाई क्या सामने आ चुकी है या फिर इंतजार करो सच सामने आएगा.. कांग्रेस से ज्यादा दिग्विजय सिंह की रणनीति भी सोचने को मजबूर करती है कि आखिर पूर्व मुख्यमंत्री ने इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने का संकल्प लिया है.. तो क्या इसमें दम है और उससे भी बड़ा सवाल ये है कि नए सिरे से मामला यदि न्यायालय में पहुंच चुका है तो क्या ये चुनाव में बड़ा मुद्दा बनेगा और युवाओं की सोच बदलेगा.. युवाओं के लिए नरेंद्र मोदी से लेकर शिवराज ने बहुत कुछ करने का दावा किया है.. बड़ा सवाल कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में क्या कमलनाथ-ज्योतिरादित्य के मुकाबले एक बार फिर दिग्विजय सिंह फ्रंट फुट पर नजर आएंगे और ये चेहरा जिसे अभी तक भाजपा मिस्टर बंटाधार बताकर सियासी हित साधती रही है.. क्या इस बार दिग्विजय सिंह का ये पलटवार भाजपा को चुनाव में डैमेज करेगा और कांग्रेस के िलए ताकत साबित होगा.. क्या इस व्यापम मामले में कांग्रेस और भाजपा सीमित हो जाएगी और दिग्विजय सिंह और शिवराज ही अंत में आमने-सामने खड़े नजर आएंगे.. दिग्विजय सिंह और शिवराज पिछले डेढ़ दशक में मानहानि और दूसरे मामलों में न्यायालय की चौखट तक जा चुके हैं और उनके निशाने पर दूसरे नेता रहे.. शिवराज को मोदी शाह की बीजेपी ने एक बार फिर मिशन 2018 के लिए भाजपा का चेहरा घोषित किया है तो दिग्विजय सिंह सीएम इन वेटिंग की दौड़ से कांग्रेस खेमे में पहले ही बाहर खुद को कर चुके हैं.. तो देखना दिलचस्प होगा की जब मध्य प्रदेश में मोदी शाह राहुल गांधी के दौरे पड़ चुके और जनता सभी बड़े नेताओं के कार्यक्रमों में नजर आ रही तब व्यापम मुद्दे पर बवाल मचने के बाद क्या रफेल का मुद्दा मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव का गणित ही नहीं बल्कि कांग्रेस और भाजपा में दिग्गी राजा और शिवराज भैया की केमिस्ट्री बनाने और बिगाड़ने में बड़ी भूमिका तो नहीं निभाएगा