सवाल दर सवाल

(कांग्रेस को उनके तीर से घायल कर रहे चौहान!) राकेश अग्निहोत्री ‘सवाल दर सवाल’ नया इंडिया

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(कांग्रेस को उनके तीर से घायल कर रहे चौहान!)

नरेंद्र मोदी से लेकर अमित शाह जिस शिवराज सिंह चौहान को देश के मुख्यमंत्रियों में सबसे बेहतर मानते .. जो सबसे अनुभवी और वरिष्ठ भी है.. इन दिनों जिस लाइन पर आगे बढ़ रहे हैं वह गौर करने लायक.. राष्ट्रीय नेतृत्व की अपेक्षाओं के अनुरूप प्रदेश का माहौल उन्होंने जिस तरह बदला उसने विपक्ष के मंसूबों पर फिलहाल पानी फेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी .. आलोचक और विरोधी जिस कार्यशैली को मुख्यमंत्री की कमजोरी मानते शिवराज ने उसी को ताकत बनाकर प्रदेश की राजनीति में पहले ही इतिहास रच डाला है.. तो प्रदेश में भाजपा की चौथी बार सरकार बनाने के लिए जिस सूझ-बूझ के साथ आगे बढ़ इसके लिए जरूरी कांग्रेस के मुद्दों की हवा निकाल रहे उसकी काट अभी भी कांग्रेस के पास नहीं.. कांग्रेस ना खुद समझ पा रही और ना ही जनता को समझा पा रही कि आखिर शिवराज का विकल्प हर कसौटी पर कौन कैसे बन सकता.. जिस तरह शिवराज नालायक से लेकर मदारी और अब वेश्या बताने पर गुगली मार कांग्रेस के नेताओं को उनकी क्रीज पर खड़े रहते हुए बोल्ड कर रहे उसने नाराजगी को खत्म कर सहानुभूति की लाइन को आगे बढ़ा दिया…. सवाल खड़ा होना लाजमी है क्या अपनी अलग अनूठी कार्यशैली को बरकरार रखते हुए क्या शिवराज सिंह चौहान कांग्रेस को उनके नेता राहुल गांधी से सीख लेने की यदि नसीहत दे रहे तो मोदी-शाह ही नहीं राजनाथ से भी बड़े लक्ष्य के लिए बहुत कुछ सीख कर वह आगे बढ़ रहे हैं… तो बड़ा सवाल क्या शिवराज कांग्रेस को उनके नेताओं को उनके द्वारा चलाए गए तीर से ही घायल कर रहे हैं..
इन दिनों मध्य प्रदेश की सियासी यात्राओं की तुलना कभी छत्तीसगढ़ तो कभी राजस्थान से हो रही… जहां कभी राहुल गांधी तो कभी वसुंधरा से लेकर रमन सिंह जनता के बीच पहुंच रहे.. इन यात्राओं की तुलना में जो भीड़ शिवराज के आगे पीछे प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में देखने को मिल रही है … उसने दिल्ली में बैठे नेताओं को भी चौंकाया है.. यही नहीं कांग्रेस के रणनीतिकारों को नए सिरे से सोचने को मजबूर किया.. तो भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से ले कर दूसरे राज्यों में भी इस लोकप्रियता की चर्चा ज्यादा है.. अभी तक शिवराज चुनाव जिताने की महारत हासिल रखने के लिए जाने जाते थे तो अपने कार्यकाल में सबसे ज्यादा भीड़ इस दौर में जुटा कर एक नई बहस को भी आगे बढ़ाया है.. कोई इसे बेहतर प्रबंधन तो विकास योजनाओं की पुण्याई तो हितग्राहियों का जमावड़ा बता रहा है जिसके लिए वर्ग समाज से ऊपर उठकर शिवराज ने कुछ ना कुछ जरूर किया है.. मध्यप्रदेश में शिवराज लगातार चुनौती वाले विधानसभा क्षेत्र पर फोकस बनाते हुए हिसाब-किताब के साथ अपनी उपलब्धियां तो दूसरों की खामियां गिनाते हुए व्यंग बाण भी खूब छोड़ रहे हैं ..चाहे फिर वह नालायक से शुरू हुआ बयान जब मदारी तक पहुंचा तो शिवराज ने बैकफुट पर आते हुए इस पर भी चौका जड़ दिया ..तो अब कांग्रेस नेता के वैश्या वाले बयान पर शिवराज का यह कहना कि वह तो उनकी बहन की तरह है ..कांग्रेस को बगले झांकने को मजबूर कर रही.. जनता के बीच में भी कांग्रेस के इस बयान पर अच्छी प्रतिक्रिया नहीं आ रही लोग इसे नेता की परिपक्वता तो पार्टी की पटरी से उतरती लाइन बता रहे ..ऐसा नहीं कि शिवराज का आक्रमक अंदाज कभी देखने को नहीं मिला जब मौका मिला तो फ्रंटफुट पर आकर सोनिया राहुल से लेकर कमलनाथ सिंधिया दिग्विजय सिंह को सीधे निशाने में लेने में वह पीछे नहीं रहे… लेकिन इन दिनों विशेष मौके पर लो प्रोफाइल कार्यशैली के साथ अपनी आलोचनाओं से बेखबर शिवराज एक अलग अंदाज में इन बयानों को बहस का मुद्दा बना रहे हैं ..चाहे फिर मदारी के तौर पर मध्य प्रदेश में गरीब बेसहारा लोगों के लिए चलाई जा रही योजना से तार जोड़ना हो… या फिर वैश्या के मामले में दीन हीन उपेक्षित हर वर्ग के लिए मुख्यमंत्री के दायित्व से पीछे नहीं हटने की बात… शिवराज ने अपने विरोधियों को चौंकाया तो आलोचकों को भी सोचने को मजबूर किया है.. कि कोई 13 साल का मुख्यमंत्री विपक्ष कि नफरत उपेक्षा का जवाब विनम्रता और सहजता के साथ दे सकता है… वह चाहते तो दूसरे भी कई विकल्प थे और इस मुद्दे पर दूरी बना सकते थे लेकिन समाज में इस वर्ग जिसे उपेक्षित माना जाता है कोई बड़ा वोट बैंक भी नहीं है उसके प्रति भी सहानुभूति जता कर कहीं ना कहीं आम जनता की सहानुभूति हासिल करने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी… ऐसा नहीं कि शिवराज की कार्यशैली पर तमाम सवाल खड़े नहीं किया जा सकते लेकिन नीति के साथ नियत और सकारात्मक सोच के साथ समस्या का समाधान बहुत कुछ सोचने समझने को मजबूर करती है.. भाजपा के दूसरे नेता और खुद शिवराज इस बात को स्वीकार नहीं करेंगे कि उन्हें दूसरे नेताओं से सीख लेने की कोई आवश्यकता है.. लेकिन जिस उदारता ,प्यार की लाइन को उन्होंने इन विवादित बयानों से जोड़कर आगे बढ़ाया वह कहीं ना कहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की उस नसीहत के बारे में सोचने को मजबूर करती है.. जिसमें उन्होंने संसद के अंदर नरेंद्र मोदी पर नफरत की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए गले मिलकर जब आप प्यार से जीने की बात कही थी …जिसमें संदेश कांग्रेस के दूसरे नेताओं के लिए भी छुपा था कि वह भी मोदी हो या फिर दूसरे नेता जिसमें शिवराज भी शामिल होंगे कि आरोप प्रत्यारोप में आक्रमक अंदाज हो लेकिन समाज और देश के हित में अपनी ओर से नफरत की गुंजाइश को खत्म करो …जबकि मध्य प्रदेश में कोई शिवराज को नालायक मदारी और अब उन्हें वेश्या बता रहा है …ऐसे शब्दों का उपयोग इससे पहले चुनावों में कम से कम मध्यप्रदेश में देखने को तो नहीं मिला.. तो सवाल यहीं पर खड़ा होता क्या कांग्रेस के नेताओं का माकूल जवाब देने के लिए उनके अध्यक्ष की कार्यशैली को भी कहीं ना कहीं शिवराज ने आईना दिखाते हुए सही समय पर आगे बढ़ाया …जिसका फायदा भी उन्हें मिल रहा.. दूसरे मुद्दे पीछे छूट रहे और कांग्रेस न सिर्फ भटक रही बल्कि कमजोर भी साबित हो रही … दूसरी ओर और शिवराज कभी मोदी और शाह के अंदाज में जरूरत पड़ने पर मुखर हो जाते हैं.. तो विकास के एजेंडे को ट्विस्ट देना नहीं भूलते …पिछले दिनों जो बात भोपाल दौरे के दौरान देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश उपचुनाव में हुई हार के परिणाम पर कही थी.. कहीं ना कहीं शिवराज की कार्यशैली में उसकी भी झलक मिल रही है.. जो अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देने के लिए बैक फुट पर आ जाते लेकिन चौका छक्का मारने में सफल हो जाते ..यानी दो कदम आगे तो चार कदम पीछे आकर भी शिवराज बड़े लक्ष्य को लेकर लंबी छलांग की तैयारी में नजर आते है ..यदि मुख्यमंत्री रहते शिवराज ने मध्यप्रदेश में कई कीर्तिमान स्थापित किए ..तो यह सब समय के साथ फैसला लेना और दूर दृष्टि के जरिए चुनोतियों के भाप लेने से ही संभव हुआ है.. जिन्होंने सियासत में सामाजिक सरोकार के महत्व को न सिर्फ समझा बल्कि समझाया भी …तो कह सकते हैं कि राजनाथ से लेंगे राहुल गांधी से जरूरी सीख लेकर शिवराज कांग्रेस को उनकी भाषा में तो कभी अपने तरीके से ऐसा जवाब दे रहे हैं… जिसके बाद कांग्रेस बगले झांकने को मजबूर होती है.. शिवराज अच्छी तरह जानते कि छत्तीसगढ़ के बाद राजस्थान पहुंचे राहुल गांधी जिस तरह अशोक गहलोत और सचिन पायलट को एक बस में लेकर रोड शो कर रहे हैं… लगभग उसी तर्ज पर सितंबर के पहले सप्ताह में वह मध्य प्रदेश के क्षत्रपों को लेकर मध्य प्रदेश की गलियों की खाक छानेंगे ..इसलिए इस जन आशीर्वाद यात्रा के जरिए यदि प्रदेश में एक सकारात्मक माहौल बनाना जरूरी है तो विकास के एजेंडे पर सहयोग के साथ मतदाताओं की सहानुभूति भी उतनी ही जरूरी है जिसे भरोसे की कसौटी पर चलना होगा.. मुख्यमंत्री रहते शिवराज में जो सियासी फसल बोई अब उसके काटने का समय आ गया है.. इसलिए जन आशीर्वाद यात्रा में वह अपनी सरकार की उपलब्धियों से ज्यादा फोकस उन्हीं योजनाओं पर बनाए हुए ..जो लोगों की समस्या का समाधान बनी और इस भीड़ में ज्यादातर वही लोग हैं.. जिसके शिवराज के राज में अच्छे दिन भले ही नहीं आए हो लेकिन बुरे दिन जरूर खत्म हो गए..