सवाल दर सवाल

राहुल संदेश’ की मप्र में उड़ाई जा रही ‘धज्जियां’… राकेश अग्निहोत्री ‘सवाल दर सवाल’ नया इंडिया

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सवाल दर सवाल, राकेश अग्निहोत्री ,नया इंडिया
राहुल संदेश’ की मप्र में उड़ाई जा रही ‘धज्जियां’…

बिगड़े बोल बिगाड़ेंगे कमलनाथ की कांग्रेस का गणित.!
नालायक, मदारी के बाद वैश्या ने मचाया बवाल..

 

कांग्रेस ने भले ही अपने विधायक सुंदरलाल तिवारी के उस विवादित बोल बयान से पल्ला झाड़ लिया हो, लेकिन पहले नालायक फिर मदारी और अब वैश्या ने सियासी बवाल मचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है…. इन बयानों के जरिए कहीं ना कहीं कांग्रेस ने शिवराज को निशाने पर लिया, लेकिन दांव उल्टा पड़ता नजर आता है.. कांग्रेस बैकफुट पर आई या फिर शिवराज ने अपने अंदाज में पूरे मामले को ट्विस्ट कर जनता को यह सोचने को मजबूर किया कि क्या यह सब कुछ उस कांग्रेस की हताशा है, जिसे शिवराज की जनआशीर्वाद यात्रा में उमड़ रही भीड़ खटक रही है? सवाल यहीं पर खड़ा होता है कि कांग्रेस नेताओं के बिगड़े बोल पार्टी के चुनावी गणित को कहीं गड़बड़ा तो नहीं देंगे? कुछ ऐसे ही विवादित बोल के चलते राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की यदि किरकिरी हुई तो मोदी ने उसे खूब भुनाया, चाहे फिर वह सियासी मैदान में बवाल मचाने वाले बयान मौत का सौदागर, चायवाला और नीच ही क्यों न हों.. इसके बाद ही राहुल गांधी ने नफरत की राजनीति का जवाब प्यार से दे अपनी रणनीति को बदला ..जिन्होंने अपने विरोधियों को गले लगाने का संकेत देकर उदारता, विनम्रता और मर्यादा में आक्रामक अंदाज में अपनी बात कहने की एक नई लाइन को आगे बढ़ाया.. लेकिन अब दिल्ली से दूर मध्यप्रदेश में भी बिगड़े बोल कांग्रेस की परेशानी बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे.. बड़ा सवाल आखिर मध्यप्रदेश में राहुल गांधी के संदेश और उस गाइडलाइन की धज्जियां क्यों उड़ाई जा रही हैं, जिसका संदेश उन्होंने संसद के अंदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गले लगाकर दिया था… क्या इसे जिम्मेदार नेताओं की अनुशासनहीनता माना जाएगा दो राहुल संदेश चाहे फिर से नसीहत मशवरा सलाह और निवेदन ही क्यों ना कहें कम से कम मध्य प्रदेश में इस लाइन को कोई आत्मसात करने को तैयार नहीं…

कहते हैं, जंग में चाहे फिर वह चुनावी ही क्यों ना हो सब जायज है.. जीत तो जीत होती है और हार तो हार, शायद यही वजह है कि कांग्रेस में हालात सुधरने की बजाय अब हाथ से निकलते जा रहे हैं, चाहे फिर वह कमलनाथ जैसे अनुभवी, दूरदर्शी और प्रबंधन में माहिर प्रदेश अध्यक्ष के कमान संभालने के बाद प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया के बयान और दूसरे विवाद या फिर अब सामने आ रहे विवादित बोल, यह सब उस वक्त हो रहा है जब मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव सिर्फ कमलनाथ और ज्योतिरादित्य के लिए नहीं, बल्कि राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य के लिए कुछ ज्यादा ही मायने रखते हैं.. शायद यही वजह है कि राहुल गांधी ने गुजरात और कर्नाटक में अपनी छाप छोड़ने के बाद संसद के अंदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में नफरत का जवाब प्यार से देने का जो संदेश दिया ..उसमें कहीं ना कहीं सिर्फ विरोधी या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा या देश की जनता के साथ कांग्रेस के जिम्मेदार नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए भी बड़ा संदेश छुपा था.. यदि एक लाइन में कहें तो खुद को हिंदू, शिवभक्त बताते हुए राहुल गांधी ने मोदी की कार्यशैली, आचरण, व्यवहार सब पर सवाल खड़ा कर खुद को एक ऐसी पार्टी और उसका नेता बताया था, जिसके इरादे और अंदाज आक्रामक हो सकता है, लेकिन व्यवहार और सम्मान के मापदंड पर वह बदलने को तैयार है कांग्रेस में नफरत की राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है अब उसके नेता प्यार की झप्पी और गांधीगिरी से उसका जवाब देंगे राहुल ने कहा था, चाहे फिर आप पप्पू बताकर मजाक उड़ाओ कोई फर्क नहीं पड़ता, शायद कांग्रेस की कमान संभालने के बाद राहुल गांधी तमाम मतभेदों के बावजूद राजनीति में एक-दूसरे का दिल और भरोसा जीतने की गुंजाइश जरूर बरकरार रखना चाहते हैं, विवादित बयानों का खामियाजा गुजरात से लेकर राष्ट्रीय राजनीति में भाग चुकी कांग्रेस की नई गाइडलाइन का मध्य प्रदेश में कोई मतलब नहीं रह गया.. मध्यप्रदेश में कांग्रेस शायद आक्रमक अंदाज में विकास पर सवाल खड़ा कर भ्रष्टाचार उजागर करने की जल्दबाजी में सारी मर्यादाएं ताक पर रखकर चुनाव जीतने का इरादा रखती है.. कुछ दिन पहले इशारों-इशारों में शिवराज को नालायक कहे जाने का बयान कांग्रेस को तब महंगा पड़ा, जब शिवराज ने इसकी दिशा ही बदल दी.. बावजूद इसके मदारी का बयान भी सामने आया और अपने अंदाज में मुख्यमंत्री ने इसे जनता और प्रदेश के विकास से जोड़ दिया.. अब विधायक और तेजतर्रार कांग्रेस नेता सुंदरलाल तिवारी ने जनआशीर्वाद यात्रा के प्रबंधन पर सवाल खड़ा करते हुए शिवराज की तुलना एक वैश्या से कर डाली.. जिस पर कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता शोभा ओझा को पल्ला झाड़ने को मजबूर होना पड़ा, तो भाजपा नेताओं ने इस पर पलटवार करने में देर नहीं लगाई, चाहे फिर वह मंत्री नरोत्तम मिश्रा प्रदेश उपाध्यक्ष विजेश लूनावत प्रवक्ताओं की टीम से जुड़े रजनीश अग्रवाल हों या फिर दूसरे नेता, इस बहस में कूद पड़े.. संदेश यही गया कि सियासत में शालीनता, मर्यादा, शिष्टता, संयम, सद्भाव पीछे छूट रहा है, तो यहीं पर सवाल खड़ा होता कि मध्यप्रदेश के जिस विंध्य क्षेत्र में पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपने प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया के साथ हाथापाई की, आखिर उसी क्षेत्र से शिवराज पर कांग्रेस विधायक सुंदरलाल तिवारी, मुख्यमंत्री पर ऐसी विवादित टिप्पणी करते हुए सामने आए.. सवाल सिर्फ चुनावी माहौल में बिगड़े बोल, बनते बिगड़ते समीकरण और राजनीति में मर्यादा के मापदंड पर ही सवाल खड़े नहीं होते हैं, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि राहुल गांधी का क्या अपनी पार्टी पर कमांड नहीं है? अखिल कांग्रेस को बदलने और नफरत का जवाब प्यार से देने की उनके संदेश की धज्जियां मध्य प्रदेश के नेता क्यों उड़ा रहे.. क्या फिर सब कुछ उनकी जानकारी में हो रहा है? चाहे फिर वह कमलनाथ का मदारी वाला बयान हो या फिर सुंदरलाल तिवारी का वैश्या वाला ताजा विवादास्पद बयान.. सुंदरलाल तिवारी द्वारा खड़े किए गए सवाल में दम हो सकता है, लेकिन उनके द्वारा उपयोग किए गए शब्द, कहने का तरीका और अंदाज पर खुद कांग्रेस ने एतराज जताया है, तो समझा जा सकता है कि यह बयान राहुल गांधी को कितना रास आएगा? वह भी तब जब वह नेतृत्वविहीन मध्यप्रदेश, बेबस कांग्रेस और उसके जिम्मेदार नेताओं को अपनी बस में सवार करके शिवराज के राज में भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे.. सवाल प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के नेतृत्व और इरादों पर भी खड़े हो रहे हैं, क्योंकि सौ दिन पूरे होने की उनकी उपलब्धियों में अनुशासन सबसे ऊपर आने वाला था, लेकिन दीपक बावरिया के साथ एक के बाद एक लगातार घटनाएं कहीं ना कहीं नए सवाल खड़े कर गई.. ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि क्या नेतृत्व ने अपने नेताओं को छूट दे दी है कि वह शिवराज के खिलाफ आग उगलें और ऐसे में जो मर्यादा तार-तार हो रही है, उसे कांग्रेस को समझना चाहिए कि शिवराज की गिनती एक लो प्रोफाइल मुख्यमंत्री के तौर पर होती है, जिसके प्रशंसक कांग्रेस के अंदर भी मौजूद हैं, जिन्हें ऐसे बयानों को भुनाना खूब आता है.. लाख टके का सवाल यह है कि क्या शिवराज की जनआशीर्वाद यात्रा में उमड़ रही भीड़ ने कांग्रेस के नेताओं की नींद उड़ा दी है, जो इसे प्रबंधन साबित कर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं.. सवाल यदि इसे शिवराज और उनके रणनीतिकारों का प्रबंधन मान भी लिया जाए तो क्या कमलनाथ का मैनेजमेंट फेल साबित हो गया है? जहां तक बात प्रबंधन की है तो अमित शाह के आने के बाद से भाजपा इस मोर्चे पर बहुत आगे बढ़ चुकी है.. सवाल कांग्रेस नेताओं के बिगड़े बोल, कहीं कांग्रेस के चुनावी गणित को बिगाड़ तो नहीं देंगे? क्या राहुल गांधी सुंदरलाल तिवारी के इस बयान को गंभीरता से लेंगे? क्योंकि प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया के साथ हाथापाई का मामला राहुल की मौजूदगी में दिल्ली बैठक में उठ चुका .. इसके बावजूद विदिशा प्रवास के दौरान फिर यही घटना दोहराई गई जिसके लिए कमलनाथ ने एक समिति का गठन भी किया तो… सवाल क्या सुंदरलाल तिवारी के बयान से कमलनाथ और राहुल गांधी इत्तेफाक रखते या फिर बात निकली है तो दूर तलक जाएगी.. जल्द राहुल गांधी विदेश दौरे पर जाने वाले और उसके बाद मध्यप्रदेश में उनकी बस यात्रा शुरू होगी.. ऐसे में क्या यह विवादित और बिगड़े बोल कांग्रेस की सियासी सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं..