सवाल दर सवाल

(दांव… प्रभात झा का उल्टा तो नहीं पड़ेगा ) राकेश अग्निहोत्री’ सवाल दर सवाल’ नया इंडिया

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सवाल दर सवाल, राकेश अग्निहोत्री नया इंडिया
(दांव… प्रभात झा का उल्टा तो नहीं पड़ेगा )
(जीतू पटवारी का जन जागरण क्या भाजपा को डैमेज कंट्रोल को मजबूर करेगा)
जनआशीर्वाद यात्रा पर निकलने से पहले.. शिवराज की कांग्रेस द्वारा अचानक, लेकिन सुनियोजित घेराबंदी कितनी कारगर सिद्ध होगी.. यह तो समय बताएगा, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.. सवाल चुनावी माहौल और सियासत की दिशा को लेकर खड़े होने लगे हैं.. आखिर यह स्थिति क्यों निर्मित हुई और क्या सोई कांग्रेस जाग गई, जो भाजपा और शिवराज के लिए अब खुला मैदान छोड़ने को तैयार नहीं है.. वजह साफ तो लक्ष्य क्या.. कांग्रेस द्वारा कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी को शिवराज के पीछे-पीछे दौड़ाने का.. कांग्रेस की इस रणनीति पर भाजपा यदि पलटवार की तैयारी में तो उसके जिम्मेदार नेता अब यह कहते हुए सुने जा सकते हैं कि कमलनाथ और ज्योतिरादित्य को सीधे निशाने पर लेने का जवाब देने के लिए कांग्रेस ने जीतू पटवारी को आगे कर पोल-खोल यात्रा निकालने की छूट दी है.. शिवराज और नरेंद्र जैसे शीर्ष नेताओं को पीछे छोड़ते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभात झा ने नाथ और सिंधिया को सीधे निशाने पर लेकर पिछले 2 माह से कांग्रेस नेतृत्व का जो संकट बढ़ा रखा था, यह उस का पलटवार है.. तो सवाल खड़ा होना लाजमी है… कहीं प्रभात झा का यह दांव उल्टा न पड़ जाए और भाजपा से ज्यादा शिवराज के लिए सिर दर्द साबित न हो.. क्योंकि अब शिवराज के सामने खुले तौर पर जीतू पटवारी को ला खड़ा कर दिया गया है.. जिसका मकसद शिवराज की उपलब्धियों पर सवाल खड़े कर रायता बगराना है..

शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश भाजपा कार्यालय में रथ की पूजा-अर्चना कर जो कुछ कहा, उसका लब्बोलुआब यही है कि मुख्यमंत्री को अपनी सरकार की उपलब्धियों और किए गए काम पर भरोसा है.. और वो इस यात्रा के दौरान इसे जनता के सामने विस्तार से रखेंगे.. कांग्रेस द्वारा खड़े किए गए सवालों का जवाब देने में कोई दिलचस्पी नहीं लेते हुए शिवराज ने साफ कर दिया कि वो व्यक्तिगत राग-द्वेष और आरोप-प्रत्यारोप की सियासत से आगे विकास के अपने एजेंडे को ही आगे बढ़ाएंगे.. ऐसे में जब कांग्रेस ने भाजपा द्वारा निकाले गए यात्रा के मुहूर्त से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पोल-खोल जनजागरण अभियान का एजेंडा साफ कर दिया ..कि मध्यप्रदेश की दूसरी तस्वीर को भी वो जनता के सामने रखकर नेतृत्व पर सवाल खड़ा करेगी.. पिछले विधानसभा चुनाव पर नजर डालें, तो कांग्रेस-भाजपा और उसका शीर्ष नेतृत्व कभी आर-पार की लड़ाई के इस निर्णायक मोड पर नजर नहीं आया.. यात्रा की सफलता की जिम्मेदारी भाजपा की ओर से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा को सौंपी गई है, जिन्होंने बहुत पहले से ही कमलनाथ को कारोबारी, तो सिंधिया को महाराजा बताकर चुनौती देना शुरू कर दिया था कि वो अपने संसदीय क्षेत्र से बाहर आकर चुनाव जीतकर दिखाएं.. प्रभात झा ने और भी बहुत कुछ कहा, लेकिन शायद उन्हें भी ये उम्मीद नहीं रही होगी कि जिस जनआशीर्वाद की सफलता सुनिश्चित करने के लिए वो रथ के आगे-पीछे रक्षा कवच के तौर पर माहौल नहीं बिगड़ने देंगे, उसमें जीतू पटवारी की एंट्री भी हो सकती है.. शिवराज और पटवारी की तुलना का कोई ओर-छोर जरूर नजर नहीं आता है, लेकिन विधानसभा के दोनों सदस्य हैं, तो जीतू कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष के साथ पार्टी के राष्ट्रीय सचिव भी हैं, जो निशाने पर शिवराज को लेने वाले हैं.. लेकिन इससे पहले उन्हें प्रभात झा से तर्क और तथ्यों के साथ दो-दो हाथ करना पड़ेंगे.. मीडिया फ्रेंडली प्रभात झा के बारे में कहा जाता है कि वो अपनी सुविधा से सही समय पर मीडिया का बेहतर उपयोग कर लेते हैं.. उन्हें अखबारों की सुर्खियां बनना आता है, तो दावा यह भी किया जाता है कि टीवी न्यूज का एजेंडा भी वो सेट कर देते हैं.. वो बात और है कि कुछ नेशनल और रीजनल चैनल तक ही वो अपने को सीमित रखते हैं.. जब से उन्होंने भाजपा मीडिया समन्यवक की भूमिका संभाली है तब से वो छाए हुए हैं.. मीडिया प्रभारी और प्रवक्ताओं की टीम बहुत पीछे छूट गई और उनके हौसले भी अब दम तोड़ते हुए नजर आ रहे.. भाजपा मीडिया विभाग से किस प्रवक्ता और किस नेता के नाम से बयान जारी होंगे कौन सोशल मीडिया पर सक्रिय रहेगा इसके लिए बनाई गई नई गाइडलाइन ने युवा जुझारू और होनहार टीम का सिरदर्द बढ़ा रखा है.. अमित शाह से लेकर राकेश सिंह से मुलाकात और जरूरी बैठक के क्राइटेरिया को लेकर भी सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है .. जिम्मेदार पदों पर बैठे नेता अपने समर्थकों को ही महत्व दे रहे .. प्रभात झा की तारीफ की जाना चाहिए जो अपने सभी सहयोगियों को संकट में ना डालते हुए कमलनाथ और ज्योतिरादित्य के खिलाफ आग उगलने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देते हैं.. पार्टी के दूसरे नेताओं और कार्यकर्ताओं में भी खूब जोश भरने की कोशिश की .. वह बात और है कि प्रभात झा ने कांग्रेस और उनके नेताओं खासतौर से कमलनाथ को भी जगा दिया ..ऐसे में सवाल ये खड़ा होता है कि प्रभात झा यात्रा के दौरान जीतू द्वारा उठाए जाने वाले उन सवालों का जवाब कैसे देंगे और क्या वो बात आम जनता के गले उतरेगी? जनआशीर्वाद के दौरान जनता शिवराज की उपलब्धियों के दावे पर यकीन करेगी या फिर कांग्रेस द्वारा खड़े किए गए सवालों को लेकर भी वो सोचने को मजबूर होगी.. कमलनाथ के इरादों और जीतू की दृढ़ता को समझा जाए तो प्रभात झा को डैमेज कंट्रोल की रणनीति बनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.. राजधानी भोपाल से दूर संभागीय और जिला स्तर पर प्रभात झा का मीडिया प्रबंधन दांव पर होगा.. क्षेत्र के जिन विधायकों-सांसदों के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी को लेकर भाजपा चिंतित नजर आती है उनके अपने क्षेत्र में जीतू पटवारी द्वारा खड़े किए जाने वाले सवाल कहीं भाजपा की समस्या में इजाफा ना कर दें.. सवाल ये भी खड़ा होता है कि जीतू पटवारी को दिग्विजय सिंह की सिफारिश पर कमलनाथ ने सीधे शिवराज के सामने मैदान में उतारा या फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी के अंदर सीमित और संतुलन बनाने के लिए ये फैसला लिया? इससे आगे भी सवाल भाजपा के अंदर भी खड़े हो रहे ..आखिर प्रभात के हमले से तिलमिलाए कमलनाथ ने जिस जीतू पटवारी को शिवराज का जवाब देने के लिए सामने लाया इसमें कहीं ना कहीं प्रभात झा और उनके बयानों का भी योगदान है.. नरेंद्र सिंह और शिवराज ने यदि प्रभात झा को मोहरा बनाया तो क्या नाथ सिंधिया ने जीतू को शिवराज का पिछलग्गू बना दिया ..हो सकता भाजपा जीतू को इतनी गंभीरता से नहीं ले रही हो, लेकिन इस चुनावी साल में भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व कांग्रेस के इस पलटवार को शायद नजरअंदाज ना कर पाए.. क्योंकि इस यात्रा के दौरान ही अमित शाह की भी मध्यप्रदेश में संभागीय बैठकों का सिलसिला शुरू होने वाला है.. पिछली दो जनआशीर्वाद यात्रा की तुलना में इस बार शिवराज की जनआशीर्वाद यात्रा जिस बदलते परिदृश्य में होने जा रही है उसमें जनता का आशीर्वाद का महत्व बढ़ जाता है.. यदि भाजपा ने जीतू पटवारी को विधायक मानकर उसकी यात्रा को हल्के में लिया, तो ये उसकी सेहत के लिए अच्छा नहीं होगा.. क्योंकि सकारात्मक माहौल बनाने में जितनी ज्यादा मेहनत भाजपा को करना पड़ती है वो किसी से छुपी नहीं है.. और यदि शिवराज की इस यात्रा के आगे विधायक के खिलाफ जनता का आक्रोश देखने को मिला, तो उनके पीछे चल रहे जीतू पटवारी के लिए कहने को बहुत कुछ मिल जाएगा, शिवराज और भाजपा का मकसद चुनाव तक हर विधानसभा क्षेत्र में यात्रा के जरिए एक सकारात्मक माहौल बनाना ही होगा जो पीछे पीछे 4 दिन बाद उसी राह से आगे बढ़ते हुए जीतू जब सवाल खड़ा करेंगे.. तो फिर भाजपा की मेहनत पर पानी फिरने से इनकार नहीं किया जा सकता.. और यदि विधानसभा के साथ लोकसभा चुनाव को लेकर दोनों दल आगे बढ़ेंगे तो फिर राष्ट्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप से इनकार नहीं किया जा सकता.. प्रभात झा का राज्यसभा का दूसरा कार्यकाल बाकी है.. और चुनाव शिवराज के साथ नरेंद्र सिंह को ही लड़ना है.. कांग्रेस की रणनीति भाजपा से पहले 70 से100 विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवार घोषित कर देने की है.. ऐसे में यदि पोल खोल अभियान में स्थानीय मुद्दों को कांग्रेस में हवा दी तो फिर भाजपा के सामने एक नई समस्या खड़ी हो सकती है जो बड़ी संख्या में विधायकों के टिकट काटने का मन बना चुकी है..
इसलिए अपनी साख और पुण्याई दांव पर लगाकर जनता के बीच जा रहे शिवराज को सोचना होगा.. कि प्रभात झा के आक्रामक बयान उनके मददगार सिद्ध होते या नहीं.. देखना ये भी दिलचस्प होगा कि कमलनाथ और ज्योतिरादित्य के बराबर खुद को खड़ा करने की जुगत में जुटे रहते प्रभात झा खुद जीतू पटवारी द्वारा खड़े किए गए सवालों का जवाब देंगे, तो वो जनता के गले किस हद तक उतरेंगे? प्रभात में मुंगावली कोलारस और उससे पहले भी सिंधिया से लेकर कमलनाथ के खिलाफ जितने आरोप लगाए वह उसे ना तो धार दे पाए ना ही अंजाम तक पहुंचा पाए.. सिंधिया के खिलाफ लगातार एक दर्जन प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का दावा एक जुमला साबित हुआ.. मध्य प्रदेश की सियासत में पोखरण विस्फोट के लिए जाने वाले प्रभात झा ही नहीं उनकी उस टीम के लिए भी अब नई चुनौतियां खड़े होने से इनकार नहीं किया जा सकता.. प्रभात झा ने जिस तरह नात और सिंधिया को अपने संसदीय क्षेत्र से बाहर भोपाल जबलपुर इंदौर ग्वालियर से चुनाव लड़ने की चुनौती दी ..उससे यह संदेश पहले ही जा चुका है कि भाजपा यह मान चुकी है कि गुना शिवपुरी और छिंदवाड़ा वह आगे भी जीतने की सामर्थ नहीं रखती है.. तो बड़ा सवाल मिशन 2018 विधानसभा चुनाव के लिए माहौल बनाने निकली जनआशीर्वाद यात्रा में शिवराज सिंह चौहान को सुनना पसंद करेंगे या फिर प्रभात झा और जीतू पटवारी के बयानों को.. और यदि जीतू पटवारी के जवाबी हमले और पलटवार के लिए प्रभात झा को सामने लाया गया.. तो फिर शिवराज जो माहौल चुनाव जीतने के लिए बनाना चाहते हैं शायद उस पर नए सिरे से सवाल खड़े हो जाएं.. जो भी हो जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान मीडिया के आकर्षण का केंद्र प्रभात झा ही बनेंगे चाहे वह रथ पर सवार शिवराज के साथ हो या फिर.. इस यात्रा के आगे आगे माहौल बनाने के लिए या फिर शिवराज की यात्रा के पीछे चुनौती देते हुए आगे बढ़ने वाले जीतू पटवारी का जवाब देने के लिए.. प्रभात मीडिया कोऑर्डिनेटर बनने की नई भूमिका के साथ भोपाल से लेकर जिला स्तर पर मीडिया से अपने संबंध प्रगाढ़ बना लिए.. जन आशीर्वाद यात्रा में सिर्फ भाजपा संगठन और सरकार का प्रबंधन ही नहीं बल्कि मीडिया से रिश्ते भी कसौटी पर होंगे..