सवाल दर सवाल

एग्रेसिव मूड में BJP तो कांग्रेस का साइलेंट मूव… राकेश अग्निहोत्री ‘सवाल दर सवाल’ नया इंडिया

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सवार दर सवाल, राकेश अग्निहोत्री, नया इंडिया
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बीजेपी एग्रेसिव तो कांग्रेस का साइलेंट मूव…

दिग्विजय सिंह के बाद सिंधिया के दौरे में भी सामने आया विवाद 
मिशन 2018 विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी यदि एग्रेसिव मूड में नजर आ रही है.. तो कांग्रेस के साइलेंट मूव को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.. पिछले एक महीने में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का दूसरा दौरा भले ही शिवराज सिंह चौहान की जनआशीर्वाद यात्रा को हरी झंडी दिखाने के लिए हो रहा हो, लेकिन प्रदेश प्रभारी विनय सहस्रबुद्धे की सक्रियता संगठन में नए सिरे से कसावट की ओर भी इशारा करती है.. दूसरी ओर कांग्रेस ने इस बार गलतियों से सीख लेकर संगठन की बूथ और मंडल स्तर पर प्रभावी मौजूदगी की कवायद गंभीरता के साथ आगे बढ़ाई तो अब कलमगिरी के बाद कांग्रेस के नाथ कमलनाथ ने पदाधिकारियों की अपनी टीम को भी काम पर लगा दिया.. वह बात और है कि दिग्विजय सिंह से लेकर सिंधिया के दौरे भी विवादों में आने लगे.. ये कहना गलत नहीं होगा कि भाजपा की तैयारियों के मुकाबले कांग्रेस बहुत पीछे है, लेकिन पिछले चुनाव के मुकाबले कांग्रेस एक साथ कई मोर्चों पर ज्यादा सजग और सतर्क दबे पांव ही सही मैदानी लड़ाई लड़ने का मानस बना चुकी है.. इस बीच भाजपा के अंदर राष्ट्रीय नेतृत्व का मध्यप्रदेश में बढ़ता हस्तक्षेप तो कांग्रेस के अंदर नाथ और सिंधिया की जोड़ी के बीच सब कुछ ठीक-ठाक नहीं होने के संदेश और संकेत दोनों मिलते रहे.. तो सवाल खड़ा होना लाजमी है कि क्या भाजपा का एग्रेसिव मूड कांग्रेस के साइलेंट मूव पर भारी साबित होगा.. क्या भाजपा अपनी बढ़त को बरकरार रखते हुए एक बार फिर कांग्रेस को तमाम तैयारियों के बावजूद बहुत पीछे धकेलने में सफल होगी.. या फिर कांग्रेस की बदलती रणनीति भाजपा को मात देने में कारगर सिद्ध होगी..
मानसून की दस्तक के साथ ही मध्यप्रदेश की सियासत में भी उफान देखने को मिलने लगा है.. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ज्यादा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की मध्यप्रदेश में बढ़ती दिलचस्पी के बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी की प्रदेश इकाई को जगा गए.. कांग्रेस और भाजपा जमीनी जमावट के साथ अब पब्लिक के बीच जाने को तैयार हैं.. इस मोर्चे पर भाजपा ने अपने सेनापति मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को जिस जनआशीर्वाद यात्रा के साथ मैदान में उतारने का फैसला किया है.. उसका लक्ष्य सभी 230 विधानसभा सीटों तक पहुंचना है.. शिवराज की इस यात्रा को हरी झंडी दिखाने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एक बार फिर उज्जैन पहुंच रहे हैं.. जिस रथ पर सवार होकर शिवराज जनता का आशीर्वाद मांगेंगे उस रथ को खासतौर से बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में लाया जा रहा है, जिसमें लंबे सफर को ध्यान में रखते हुए आधुनिक तकनीक के साथ सभी पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जा चुके हैं, बावजूद भाजपा की सबसे बड़ी चिंता शिवराज की इस यात्रा के दौरान भाजपा की गुटबाजी और कलह सामने नहीं आने देना तो वह कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को लेकर भी सतर्क है .. इसके साथ ही प्रदेश प्रभारी विनय सहस्रबुद्धे इसयात्रा और अमित शाह के पहले भोपाल पहुंच रहे हैं, तो निश्चित तौर पर भाजपा में महत्वपूर्ण बैठकों का दौर आगे बढ़ेगा.. खबर आ रही है कि जनआशीर्वाद यात्रा की सफलता सुनिश्चित करने के अलावा पांच वरिष्ठ नेताओं शिवराज सिंह चौहान, राकेश सिंह, सुहास भगत, नरेंद्र सिंह तोमर और विनय सहस्रबुद्धे के बीच महत्वपूर्ण बैठक हो सकती है, तो घोषित तौर पर कोर कमेटी की बैठक भी भाजपा द्वारा बुलाई जा सकती है.. संदेश साफ है कि जबलपुर में अमित शाह द्वारा तय किए गए एजेंडे की प्रोग्रेसिव रिपोर्ट के साथ संगठन फॉलोअप की तैयारी में है.. इस बीच राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल संभागीय दौरे पूरे कर चुके हैं, तो राकेश सिंह के जिला स्तर के  दौरे आगे बढ़ रहे ..स्वयं विनय सहस्रबुद्धे नर्मदापुरम संभाग की बैठक ले चुके हैं.. भाजपा ने अमित शाह के उज्जैन दौरे को सफल बनाने यानी भीड़ जुटाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है, जो शिवराज की जनआशीर्वाद यात्रा को हरी झंडी दिखाएंगे तो निश्चित तौर पर कार्यकर्ताओं में नया जोश पैदा करने की कोशिश एक बार फिर अमित शाह की होगी, जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद सत्र के नजदीक आने के साथ ही पंजाब के साथ उत्तरप्रदेश, बिहार और दूसरे राज्यों के दौरे पर निकल चुके हैं ..तो संदेश साफ है कि विधानसभा के साथ राष्ट्रीय नेतृत्व को लोकसभा चुनाव की तैयारी भी सता रही है.. देखना दिलचस्प होगा कि शिवराज जो अपनी सरकार की उपलब्धियों के साथ लंबी लेकिन क्रमिक यात्रा पर निकलने वाले हैं तो फोकस सिर्फ विधानसभा चुनाव पर रहता  या फिर बात दूर तलक जाएगी.. भाजपा की बड़ी चिंता सोशल मीडिया बनकर उभरा है.. राष्ट्रीय नेतृत्व की सीधी निगरानी के बावजूद आईटी सेल के परफॉर्मेंस पर सवाल पार्टी के अंदर खड़े हो रहे हैं.. वह बात और है कि शिवराज सिंह चौहान ने इनका हौसला बढ़ाया है.. दूसरी ओर कांग्रेस ने कमराबंद बैठकों के जरिए लंबी एक्सरसाइज के साथ उस टीम को अंतिम रूप पहले ही दे दिया, जिसके भरोसे भोपाल से लेकर जिला मुख्यालयों  और मंडल स्तर पर कांग्रेस इस बार मोदी, शाह और शिवराज की भाजपा को संगठन स्तर पर चुनौती देने की जुगत में है.. कमलनाथ द्वारा बुलाई गई पदाधिकारियों की बैठक में बंद लिफाफे थमाकर हर पदाधिकारी की जिम्मेदारी सुनिश्चित कर दी गई है, इन्हें दो से 3 विधानसभा क्षेत्र के मंडल स्तर पर संगठन की कसावट का जिम्मा सौंपा गया ..तो कार्यकर्ताओं से तमाम मत भेद चार माह के लिए छोड़ कर सिर्फ चुनाव जीतने के लिए जुट जाने का आवाहन भी कमलनाथ ने किया है.. राहुल गांधी के टीम के राष्ट्रीय सचिव और प्रदेश प्रभारी की इन पर पैनी नजर रहने वाली है.. पिछले दो महीनों में कमलनाथ ने कांग्रेस के अंदर अनुशासन के साथ काफी हद तक जोश भरकर नेता और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी के साथ जवाबदेही का अहसास कराया, जो पिछले चुनाव में इस समय देखने को नहीं मिला था, तो दूसरी ओर कांग्रेस के चुनाव अभियान समिति के प्रमुख ज्योतिरादित्य सिंधिया खजुराहो से संभागीय दौरे की शुरुआत कर जिला स्तर के अपनी टीम के सदस्यों से मुलाकात तक खुद को सीमित ना रखते हुए दूसरे कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों के साथ जनता से मेलमिलाप का सिलसिला शुरू कर चुके हैं.. इस पहले दौरे में ही  कांग्रेस  के समन्वय की धज्जियां उड़ती हुई नजर आई जब खबर आई कि पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी नाराज होकर बैठक बीच में ही छोड़कर चले गए .. आयोजकों की व्यवस्था और आमंत्रित कार्यकर्ताओं की क्राइटेरिया को लेकर  बुंदेलखंड के इन 3 जिले में  गुटबाजी फिर देखने को मिली.. चुनावी सियासत से सन्यास  के बावजूद दिग्विजय सिंह की पहल पर  कार्यकर्ताओं के बीच  पहुंचे सत्यव्रत को सिंधिया का समर्थक ही माना जाता है ..सिंधिया लगातार युवाओं की नब्ज पर हाथ रखने के लिए 30 फीसदी टिकट नए चेहरों को दिए जाने की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर भोपाल से खबर आ रही है कि पहली किस्त में करीब 70 टिकट के दावेदारों के नामों की घोषणा कर दी जाएगी.. यानी वर्तमान विधायक समेत करीब 40 सीटों पर कांग्रेस सीधे फोकस बनाना चाहती है, जहां उम्मीदवार को लेकर कोई विवाद नहीं है.. कांग्रेस के अंदर दिग्विजय सिंह का मैदानी दौरे में विवाद सामने आने लगा है, चाहे फिर वो स्थानीय मीडिया से हो या फिर गुटबाजी में उलझी कांग्रेस के टिकट के दावेदारों द्वारा महसूस की गई उपेक्षा.. धार के बाद बड़वानी में भी विरोध के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं.. जो कहीं ना कहीं खुद दिग्विजय सिंह द्वारा जिला स्तर पर बनाए जाने वाली समन्वय की पहल पर सवाल खड़ा कर रहे.. ऐसे में प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया पर सबकी नजर टिक गई है कि सिंधिया के मैदान में कूदने के बाद आखिर कमलनाथ कब जनता के बीच जाएंगे.. कुल मिलाकर कांग्रेस के साइलेंट मूव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है, क्योंकि पिछले चुनाव में ना तो कांग्रेस इतनी गंभीर नजर आई और ना ही पार्टी के अंदर अनुशासन और चुनाव जीतने का जज्बा.. वह बात और है कि भाजपा एक साथ कई मोर्चों पर न सिर्फ बैठकों का दौर आगे बढ़ा रही है, बल्कि शिवराज सरकार की उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार को लेकर भी वो अपनी योजना को अंजाम तक पहुंचाने में जुट गई..