सवाल दर सवाल

संजीदा ‘सिंधिया’ की पार्ट टाइम पॉलिटिक्स.. राकेश अग्निहोत्री ‘सवाल दर सवाल’ नया इंडिया

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सवाल दर सवाल, राकेश अग्निहोत्री नया इंडिया
संजीदा ‘सिंधिया’ की पार्ट टाइम पॉलिटिक्स

प्रभात झा ने टाइमिंग पर खड़े किए सवाल, कहा- चुनावी युद्ध में सेनापति गायब
इंट्रो
कांग्रेस सांसद और प्रदेश चुनाव प्रचार अभियान के प्रमुख ज्योतिरादित्य सिंधिया के विदेश दौरे पर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ने सवाल खड़े किए.. तो कांग्रेस ने   सिंधिया के देश से बाहर होने की पुष्टि तो की है.. लेकिन वो इसे ज्यादा तूल नहीं देना चाहती.. सिंधिया की ये कोई पहली विदेश यात्रा नहीं है.. इससे पहले भी वो समय-समय पर विदेश जाते रहे हैं.. लेकिन इस बार उनकी यात्रा अचानक यदि चर्चा में है तो उसकी वजह है पार्टी के दूसरे नेताओं की चुनाव को लेकर सौंपी गई जिम्मेदारी के तहत सक्रियता के बीच   सिंधिया का प्रदेश की जनता, अपनी पार्टी, कार्यकर्ता और सहयोगी नेताओं से दूरी बनाना, जिनको क्रमशः कुछ दिन पहले ही राहुल गांधी ने अपनी प्राथमिकता में सबसे ऊपर रखा था.. ऐसे में प्रभात झा ने चुनाव में कांग्रेस के सेनापति की गैरमौजूदगी पर सवाल खड़े कर निशाना साधा है उन्होंने आरोप लगाया कि सिंधिया जनसेवक नहीं हैं, पार्ट टाइम पॉलिटिक्स करते हैं.. जो इस बहस को आगे ले जाते.. आखिर वजह क्या है… क्या कांग्रेस में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं है.. और यदि संशय की स्थिति है तो फिर उसकी वजह क्या है.. आखिर ज्योतिरादित्य मैदान में मोर्चा खोलने में देरी क्यों कर रहे हैं.. क्या इसके पीछे कांग्रेस के कुनबे की कलह है, जिसकी एकता का राग जरूर अलापा जा रहा है, लेकिन अभी तक सभी दिग्गज नेता जनता के बीच एक मंच पर नजर नहीं आए..
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 11 जून को चुनाव प्रचार समिति की दूसरी बैठक लेने के साथ युवा संसद और दूसरे कार्यक्रमों में अपनी सक्रिय भागीदारी जताई थी.. उसके साथ ही अखबारों में  उनके पुत्र की चाट के ठेले तक पहुंचने की  खबर और फोटोग्राफ्स  चर्चा का विषय बनी थी ..तब तक किसी को नहीं पता था कि वो विदेश दौरे पर जा रहे हैं और ना ही समिति की बैठक के बाद प्रचार में सिंधिया की भूमिका और उसके रोडमैप को लेकर कोई खुलासा किया गया.. ध्यान देने वाली बात ये है कि राहुल गांधी ने मंदसौर दौरे के दौरान कमलनाथ और ज्योतिरादित्य दोनों पर संयुक्त फोकस बनाकर पार्टी के दूसरे नेताओं, कार्यकर्ताओं और जनता को ये संदेश दिया था कि किसानों और युवाओं की लड़ाई लड़ने के लिए बिना समय गंवाए ये जोड़ी जनता के बीच में नजर आएगी, जिसे उन्होंने नेता और कार्यकर्ता की तुलना में सबसे ऊपर बताया था.. उस जनता यानी प्रदेश के मतदाताओं के बीच कांग्रेस के दूसरे नेता अपनी सक्रियता बनाए हुए हैं, खासतौर से नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह दूसरे चरण की अपनी न्याय यात्रा पूरी करने वाले हैं तो इसी तरह सांसद राजमणि पटेल की संविधान बचाओ यात्रा का समापन जब 15 जून को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर होगा.. तब ज्योतिरादित्य की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनने वाली है.. यही नहीं, आने वाले समय में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव जो अपने पिता स्व. सुभाष यादव की बरसी पर पिछड़े वर्ग और किसानों के बीच अपनी ताकत दिखाने वाले हैं, जिन्होंने कार्यक्रम में खासतौर से राहुल गांधी को आमंत्रित किया था तो सिंधिया की इस कार्यक्रम में भी मौजूदगी को लेकर सस्पेंस है तो कमलनाथ जरूर पुष्टि कर चुके हैं कि वो अरुण यादव के साथ कसरावद में मंच साझा करेंगे.. दिग्विजय सिंह और सत्यव्रत चतुर्वेदी तमाम मतभेद भुलाकर कार्यकर्ताओं के बीच चुनाव में गुटबाजी से परे घोषित उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कराने की कसमें खा रहे हैं, ऐसे में सिंधिया का अचानक कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति  से ही नहीं, जनता के बीच से दूरी बना लेना चर्चा का विषय बन गया है.. इस विदेश यात्रा का कोई ना कोई मकसद और एजेंडा जरूर होगा और संभवतः वो बहुत पहले भी तय कर लिया गया होगा, लेकिन राहुल गांधी ने जो मंदसौर में जुटी और जुटाई गई भीड़  के बीच खासतौर से किसानों और युवाओं के बीच जो माहौल बनाया था ..उसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि सिंधिया मुख्य प्रचारक की भूमिका में जनता के बीच जल्द पहुंचेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.. कांग्रेस को अच्छी तरह मालूम है यह मौका यदि हाथ से निकल गया तो फिर मध्यप्रदेश में कांग्रेस के अस्तित्व पर सवाल खड़ा होना तय..  तो गुजरात और कर्नाटक के बाद मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 और लोकसभा चुनाव 2019 में राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता का आंकलन होगा.. ऐसे में भाजपा जिसे अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानती है और जिसकी घेराबंदी के लिए  मैदान में यदि प्रभात झा को  उतार दिया गया है  और  दूसरे मोर्चों पर  भाजपा सक्रिय है.. वो ज्योतिरादित्य सिंधिया ही हैं, जिससे कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ही नहीं सहयोगी नेताओं को भी कुछ ज्यादा ही उम्मीद है.. वो विदेश यात्रा पर निकल जाते हंै तो सवाल खड़ा होना लाजमी है कि क्या कांग्रेस अतिआत्मविश्वास में है, जो ये समझ बैठी है कि राहुल गांधी के कर्ज माफी के ऐलान के वादे के बाद किसान शिवराज की मुसीबत बढ़ाएंगे और कांग्रेस को जीत का रास्ता मिल जाएगा.. एक ओर शिवराज किसानों ही नहीं अपने दूसरे हितग्राहियों और नए वोट बैंक को मजबूत करने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं तब ना तो कमलनाथ अभी तक जनता के बीच पहुंचे और ना ही प्रदेश अध्यक्ष ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को मतदाताओं के बीच पहुंचने की रणनीति को अंतिम रूप दिया.. ऐसा नहीं है कि ज्योतिरादित्य का जादू युवाओं के सिर चढ़कर नहीं बोल रहा .. उनके अपने संसदीय क्षेत्र गुना-शिवपुरी के उपचुनाव में उनका तिलिस्म बरकरार है, लेकिन ये भी सच है कि जिस सिंधिया में पार्टी के कार्यकर्ता शिवराज की काट देख रहे हैं वो नई भूमिका, नए अंदाज में अभी तक नए सिरे से मध्यप्रदेश की जनता के बीच नहीं पहुंचे.. कांग्रेस पार्टी का दावा है कि कमलनाथ और सिंधिया के बीच समन्वय बन चुका है और चुनाव को लेकर रोडमैप को अंतिम रूप दिया जा चुका है, दोनों नेता सार्वजनिक तौर पर एक दूसरे का नसीब सम्मान करते हैं बल्कि एकजुटता का राग भी अलापते हैं लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और है .. जहां अनुभवी और पुरानी पीढ़ी के कमलनाथ  और नई पीढ़ी के युवा तुर्क ज्योतिरादित्य  कि एक दूसरे से अपेक्षाएं कुछ अलग और ज्यादा  नजर आती है ..भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा जैसे नेता आरोप लगा रहे हैं, कि कमलनाथ कारोबारी है तो  ज्योतिरादित्य को जनसेवक मानने को ही तैयार नहीं हैं.. प्रभात ने सिंधिया की पार्ट टाइम पॉलिटिक्स पर भी सवाल खड़े किए हैं.. प्रभात कहते हैं कि कहीं सिंधिया नाराज होकर तो विदेश नहीं चले गए.. ये शोध का विषय है, क्योंकि कांग्रेस इसका खुलासा नहीं कर रही है, इसलिए मीडिया को इसकी तह तक जाना चाहिए.. प्रभात याद दिलाते हैं कि ये चुनाव किसी युद्ध से कम नहीं है और जो अपने आपको कांग्रेस का सेनापति मानते हैं आखिर उन्होंने मैदान क्यों छोड़ा.. वो यही नहीं रुकते.. वो कहते हैं कि राजनीति को सुरक्षा कवच बनाकर ज्योतिरादित्य कभी मध्यप्रदेश का भला नहीं कर पाएंगे.. फिलहाल उन्हें पलायन नहीं करना चाहिए.. सर्वे रिपोर्टों में भी ज्योतिरादित्य को दूसरे नेताओं के मुकाबले आगे माना गया है लेकिन सरकार की परेशानी बनने वाले मुद्दे कांग्रेस के हाथ से फिसलते जा रहे हैं..चाहे फिर वो लाल परेड से मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से गिरफ़्तार लड़कियों  का जेल से रिहा होने के बाद , प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ से मिलने उनके निवास पर आना हो… जिन्होंने कमलनाथ को पूरी आपबीती सुनाई कि किस प्रकार, उनके साथ दमन का रवैया अपनाया गया…उन्हें जेल में डाला गया…उन्हें मानसिक यातनाएं दी गईं.. कांग्रेस की नजर में यह बड़ा मुद्दा था तो फिर कमलनाथ और उनके नेताओं ने पीड़ित के घर तक आने का इंतजार क्यों किया यही पर सवाल खड़ा होता है कि मुद्दा बिखरे हुए हैं लेकिन उसे भुलाने में कोई दिलचस्पी नहीं है और ना ही कोई रणनीति.. शायद ज्योतिरादित्य को मैदान में उतारने से पहले कमलनाथ पदाधिकारियों की अपनी टीम का ऐलान कर उन्हें जमीनी स्तर पर कुछ जिम्मेदारी सौंपना चाहती.. जिसके अभाव में कांग्रेस के मीडिया सेल से जुड़े मुख्य प्रवक्ता और दूसरे प्रवक्ता भाजपा के खिलाफ लड़ाई या तो विज्ञप्तियों और बयान जारी कर लग रहे या फिर टीवी डिबेट का हिस्सा बनकर रह जाते हैं..
सवाल
– महाराजा ज्योतिरादित्य सिंधिया का विदेश दौरा निजी-पारिवारिक जरूरी हो सकता, लेकिन क्या ये समय सही है?
– जब प्रदेश नहीं छोड़ना चाहिए तब सिंधिया देश से बाहर हैं, इससे जनता और कार्यकर्ताओं में क्या संदेश जाएगा?
– राहुल गांधी कहते हैं, पहले जनता फिर कार्यकर्ता, बाद में नेता, तो ऐसे में सिंधिया का एक्शन प्लान कितना सही?
– आखिर वजह क्या है, जो जूनियर सिंधिया नई भूमिका में मध्यप्रदेश की जनता के बीच सक्रिय अभी तक नहीं हुए?
– जब मानसून दस्तक देने वाला है तब सिंधिया प्रदेश के हर जिले तक कैसे पहुंचेंगे?
–  क्या ज्योतिरादित्य पार्टी के दूसरे नेताओं के दौरों से नाराज हैं और दबाव बनाने के लिए विदेश चले गए?
– क्या अजय सिंह, राजमणि पटेल, दिग्विजय सिंह के दौरे खत्म होने के बाद प्रचार पर निकलेंगे सिंधिया?
– क्या सिंधिया को राहुल गांधी से लेकर कमलनाथ ने फ्रीहैंड नहीं दिया है, इसलिए प्रचार में उनकी दिलचस्पी सीमित हो गई है?
– क्या नई भूमिका में सिंधिया प्रदेश में अपने गिने-चुने समर्थकों के क्षेत्र तक खुद को सीमित रखना चाहते हैं?
– प्रदेश अध्यक्ष के नाते कमलनाथ, ज्योतिरादित्य का बेहतर, प्रभावी और असरदार इस्तेमाल क्यों नहीं कर रहे हैं?
– क्या ज्योतिरादित्य ने प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को आगे रखकर खुद को पीछे कर लिया है?
– सिंधिया क्या ये मान बैठे हैं कि कांग्रेस के अंदर दिग्विजय सिंह, कांतिलाल भूरिया, अजय सिंह और कमलनाथ अभी भी उनकी राह में रोड़ा हैं?
– क्या सिंधिया के विदेश दौरे और मध्यप्रदेश से बनाई गई दूरी को चुनाव में भाजपा पॉलिटिकल टूरिज्म से जुड़कर मुद्दा बनाएगी?
– पार्ट टाइम पॉलिटिक्स के आरोप से सिंधिया खुद को कैसे और कब बाहर निकालेंगे?