सवाल दर सवाल

(‘सियासत’ की धुरी बनी एंटी ‘इनकंबेंसी’) राकेश अग्निहोत्री ‘सवाल दर सवाल’ नया इंडिया

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सवाल दर सवाल
(‘सियासत’ की धुरी बनी एंटी ‘इनकंबेंसी’)
इंट्रो
बीजेपी ने पंचायत चलो अभियान के साथ भले ही कार्यकर्ताओं को काम पर लगाकर सरकार की उपलब्धियों का ढिंढौरा पीटना शुरू कर दिया हो, लेकिन अभी टॉप गियर के लिए इंतजार करना होगा..क्योंकि कर्नाटक के परिणाम सामने आने के साथ ही मोदी-शाह की स्िक्रप्ट सामने आना बाकी है.. तो कांग्रेस ने चेहरा बदल नाथ और सिंधिया को सामने रखकर भाजपा की घेराबंदी की जिस योजना को अंजाम तक पहुंचाने का सोच रखा है ..उसके लिए भी इंतजार करना होगा.. ज्योतिरादित्य भले ही परिवर्तन यात्रा के जरिए जनता के बीच पहुंचने लगे लेकिन कमलनाथ की टीम सामने आना अभी भी बाकी है.. दोनों दलों की अपनी रणनीति वो भी हाईकमान के सीधे हस्तक्षेप के बाद इस चुनाव की दिशा और बनने वाले माहौल को बखूबी समझा जा सकता है, लेकिन एंटी इनकंबेंसी का चुनाव में केंद्र बिंदु बनना तय है..सबसे ज्यादा कार्यकर्ता, मजबूत कैडर, राज्य से लेकर केंद्र में सरकार, फिर भी चिंता भाजपा के नेता और कार्यकर्ता के खिलाफ और सत्ता-संगठन के अंदर एंटी इनकंबेंसी उसकी सबसे बड़ी समस्या बनकर सामने है, जिससे निजात दिलाने के लिए भाजपा पहले कार्यकर्ताओं, फिर मतदाताओं का भरोसा हर हाल में जीतना चाहती है तो कांग्रेस की रणनीति भी इस सरकार को एक्सपोज कर विकास की आड़ में भ्रष्टाचार को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाकर रणनीति शिवराज ही नहीं मोदी के खिलाफ जनता को लामबंद कर उन्हें जगाना ही होगा..तरीका बदल सकता है, लेकिन निशाने पर एंटी इनकंबेंसी ही होगी तो सवाल खड़ा होना लाजमी है कि क्या मूल मुद्दे मध्यप्रदेश चुनाव में भी पीछे छूट जाएंगे या फिर स्थानीय, क्षेत्र और प्रादेशिक मुद्दों के साथ मोदी सरकार की विफलता को सामने रखकर उपलब्धियों से ध्यान भटकाना ही कांग्रेस की रणनीति होगी..जब अमित शाह और रामलाल दिल्ली में देश के भाजपा अध्यक्ष और संगठन महामंत्रियों के साथ मोदी सरकार के 4 साल पूरे होने पर 48 साल बनाम 48 महीने के अभियान को सफल बनाने की रणनीति बना रहे थे.. तब मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गांव चलो अभियान के सपने को पूरा करने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक रखी थी..


मध्यप्रदेश में इस विशेष अभियान के साथ भाजपा ने 23 हजार से ज्यादा पंचायतों पर युवा मोर्चा द्वारा गठित स्पेशल-11 को सामने रखकर सरकार से उपकृत हितग्राहियों तक पहुंचने की कोशिश की..जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के साथ जाने पहचाने चेहरे नजर आए.. केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियां तो अटल बिहारी बाजपेई से लेकर नरेंद्र मोदी के विकास के एजेंडे के साथ कांग्रेस की विफलताओं की याद दिलाना भाजपा ने शुरु कर दिया.. इस दौरान क्षेत्र के कार्यकर्ता इन नेताओं के नाम पर इकट्ठा  हो गए थे..यहां तो भाजपा मजमा लगाने में सफल रही, लेकिन दूरदराज के क्षेत्र में जनता को ना तो पीले चावल पहुंचाने वाले नजर आए और ना ही जनता में जोश देखने को मिला..इसके लिए भाजपा ने समीपवर्ती राज्यों के मंत्रियों और बड़े नेताओं को भी आमंत्रित किया था..अलबत्ता पंचायत अभियान में बड़े शहरों में बूथ चलो अभियान फीका साबित हुआ..राजधानी भोपाल में महापौर आलोक शर्मा को छोड़ दिया जाए तो ये औपचारिकता भी गिने-चुने स्थानों तक सिमटकर रह गई..बीजेपी ने ये धारणा बनाने की जरूर कोशिश की कि उसके एजेंडे में अब गांव सबसे ऊपर है और उसके लिए शिवराज से लेकर नरेंद्र मोदी सरकार ने बहुत कुछ किया..पिछले दिनों अमित शाह द्वारा कार्यकर्ताओं को सिखाए गए जीत के मंत्र के बाद ये पहला मौका था, जब भाजपा संगठन ने युवा मोर्चा के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी..भाजपा नेताओं की कोशिश थी कि मीडिया के मार्फत उसकी भागीदारी चर्चा में आ जाए, लेकिन जो संदेश भाजपा की ओर से प्रदेश की जनता तक पहुंचाया गया वो कहीं ना कहीं सरकार की उपलब्धियों के इर्द-गिर्द और उसके प्रचार-प्रसार तक सीमित था..ये कहना गलत नहीं होगा कि भाजपा और संघ द्वारा कराए गए सर्वे-रिपोर्ट में विधायक से लेकर सरकार तक जिस एंटी इनकंबेंसी को जीत की राह में बड़ी बाधा बताया जा रहा है उससे मतदाताओं का ध्यान हटाना भी बीजेपी का एक बड़ा मकसद था, जिसके लिए उपलब्धियों का बखान और हितग्राहियों का भरोसा-समर्थन हासिल करने की कोशिश तेज कर दी गई है..कुल मिलाकर भाजपा ने स्पेशल-11 के साथ पंचायत स्तर पर अपनी सक्रियता तो दर्ज करा दी है, एक साथ प्रदेश की सभी पंचायतों तक पहुंचने का लक्ष्य जिसकी कल्पना कांग्रेस कर नहीं सकती..भाजपा के दावे पर यकीन किया जाए तो उसने ये काम बखूबी कर लिया है, लेकिन ये सिक्के का एक पहलू है, दूसरा पहलू ये भी है कि कार्यकर्ता ग्रामीण क्षेत्र का अभी भी द्वंद्व से बाहर नहीं निकल पा रहा है, जिसने अपनी सरकार में रहते उपेक्षा का दंश झेला तो छोटे-बड़े अधिकारियों की नाराजगी की यादें भुला पाना उसके लिए अभी भी आसान नहीं है..कर्नाटक चुनाव परिणाम सामने आने के बाद भाजपा विकास यात्रा निकालने जा रही है, जिसका उद्देश्य हर वर्ग-समुदाय के लिए सरकार द्वारा चलाई गई योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर मकसद सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी को चुनावी फ्रेम से बाहर करना ही होगा.. इसके साथ ही विकास यात्रा के जरिए सरकार की उपलब्धियों का लेखा-जोखा जनता के सामने रखा जाएगा तो सुझाव के नाम पर समस्याओं के निराकरण की कोशिशें आने वाले समय में लोकार्पण और सौगात के ऐलान के साथ तेज होने वाली। भाजपा के हौसले इसलिए बुलंद है क्योंकि कांग्रेस जागकर भी भाजपा की नींद उड़ा देने की स्थिति में अपने आप को अभी तक पेश नहीं कर पाई। कह सकते है कि भाजपा से सीख लेते होंगे कांग्रेस मंडलम के जरिए बूथ मैनेजमेंट को अपनी प्राथमिकता में सबसे ऊपर लाने की कोशिश कर रही है.. तो सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी को हवा देने के लिए कांग्रेस सरकार की घोषणाओं और जमीनी हकीकत से मतदाताओं को रूबरू कराने के लिए एक विशेष योजना पर काम शुरू कर चुकी है। जिसे मंदसौर गोलीकांड की पहली सालगिरह 6 जून के बाद सामने लाया जाएगा इन्हीं चुनोतियों को ध्यान में रखते हुए भाजपा प्रदेश स्तर पर अपने स्तर पर चुनावी मोड में आ चुकी है लेकिन अमित शाह के हस्तक्षेप के बाद बहुत कुछ सामने आना बाकी है।
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(पंचायत का सियासी पंच और सवाल)
– भाजपा का ये पंचायत अभियान क्या सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी दूर करने में मददगार साबित होगा?
– क्या इस अभियान से स्थानीय और क्षेत्रीय नेता मजबूत होंगे या फिर जमीनी हकीकत इन्हें एक्सपोज करेगी?
– क्या ऐसे कार्यक्रमों से भाजपा के निष्ठावान-उपेक्षित कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर होगी या और बढ़ेगी?
– कार्यक्रम युवा मोर्चा का तो क्या अकेले दम पर ये उसके लिए संभव नहीं था जो मंत्रियों और बड़े नेताओं को दूसरे राज्यों से आयात किया गया?
– क्या सिर्फ मीडिया में माहौल बनाने से गांव की ओर चलो अभियान सफल हो जाएगा?
– भाजपा का ये विशेष अभियान क्या कांग्रेस पर दबाव बनाने में सफल होगा जो अभी अपनी टीम ही घोषित नहीं कर पाई?
– एक माह तक चलने वाली विकास यात्रा से ठीक पहले पंचायत पर फोकस कर आखिर भाजपा क्या हासिल करना चाहती है?
– बतौर प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के लिए ये पहला बड़ा मौका और बड़ा अभियान उन्हें कितनी ताकत देगा?
– क्या इस अभियान में उन कार्यकर्ताओं को भी सूचीबद्ध किया गया जो एक करोड़ में शामिल थे लेकिन उनका अता-पता पार्टी के पास नहीं है?
– युवा मोर्चा से जुड़े इन 11/11 कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी चुनाव तक क्या चिन्हित पंचायतों तक सीमित कर दी जाएगी?
– बड़ा सवाल भाजपा का पंचायत चलो अभियान यानि सियासी पंच भाजपा खासतौर से शिवराज को कितनी ताकत देगा..