सवाल दर सवाल

अच्छे-अच्छे अधिकारी काम पर लग गए.. राकेश अग्निहोत्री ‘सवाल दर सवाल’ नया इंडिया

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: सवाल दर सवाल, राकेश अग्निहोत्रीी
अच्छे-अच्छे अधिकारी काम पर लग गए..
(मोदी का राज , शिवराज की मौजूदगी में उमाश्री का मशवरा)
केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहां  मोदी के राज में अच्छे-अच्छे अधिकारी काम पर लग गए हैं.. अधिकारियों के अच्छे काम के लिए प्रशंसा जरूर की जाना चाहिए लेकिन जहां की जाना चाहिए वहीं ..अधिकारी कभी ईमानदारी की आड़ लेकर तो कभी नियमों का हवाला देकर सिर्फ वही काम करते हैं जो उनको करना है ..जो नहीं करना वह नहीं होने देते.. ऐसी ईमानदारी किस काम की.. उमा श्री ने अधिकारियों की गरिमा उनके क्राइटेरिया का हवाला देकर जो कुछ कहा उसका लब्बोलुआब और उसमें छिपे संदेश का मतलब सियासी भी निकाला जाएगा.. कह सकते हैं कि इशारों इशारों में उस नौकरशाही पर निशाना साधा जो अपनी जवाबदेही और अपेक्षा के कारण आम आदमी के साथ भाजपा के कार्यकर्ता और नेता के निशाने पर पहले भी आती रही है..जिस पर अलग-अलग मंच पर सवाल खड़े किये जाते रहे.. यह सच है कि उमा ने पूरे उद्बोधन के द्वारा ना किसी का नाम लिया और ना ही किसी पुराने प्रसंग से इस बात को जोड़ा… लेकिन यह भी सच है की स्वच्छता मिशन के मंच पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मंत्री गोपाल भार्गव विश्वास सारंग और केंद्र-राज्य के दूसरे जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी में जो कुछ भी कहा उसे मंच पर आने से पहले उनके द्वारा किए गए ट्वीट से जोड़कर जरूर देखा जा रहा है… स्वयं उमाश्री ने भी इसी मंच से इस बात को यह कहकर आगे बढ़ाया था कि हर बात की वह गहराई तक जाती तो बन रही धारणा की तह तक जाने की कोशिश वो करती हैं। तो निश्चित तौर पर एक अखबार में प्रकाशित खबर से भले ही इस सरकारी मंच को पूरे घटनाक्रम से दूर रखा  लेकिन इस परिदृश्य में उनके ट्वीट पर ट्वीट को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता..
राजधानी के रविंद्र भवन के इस विशेष मंच पर मीडिया का फोकस पहले से ही था क्योंकि लंबे अरसे बाद शिवराज सिंह चौहान और उमा भारती को  साथ आना था.. मिशन मोदी यानि  स्वच्छता के मंच पर एक बार फिर शिवराज और उमा एक साथ मजबूती से खड़े नजर आए.. दोनों ने हाथ उठाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया …दोनों ने न सिर्फ एक दूसरे की दिल खोलकर प्रशंसा की शिवराज ने दीदी के नाम पर तालियां भी खूब बजवाई.. यही नहीँ दोनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व और स्वछता के मोर्चे पर महात्मा गांधी के बाद उनकी सकारात्मक सोच की तारीफ की। मुद्दा स्वच्छता  मिशन मोदी फिर भी एक ऐसा मौका आया जब उमा की नाराजगी कहें या फिर सलाह और मशवरे की आड़ में छुपी चेतावनी और नाराजगी कहीं ना कहीं अधिकारियों की भूमिका पर नए सवाल जरूर खड़े कर गई। जिसे कुछ समय पहले ही सोशल मीडिया के जरिए ट्वीट कर उमा भारती कि उस बात से जोड़कर देखा गया जिसमें मार्च में लिखी गई चिट्ठी और प्रसंग को आज के संदर्भ में अस्तित्वहीन बता पर सवाल खड़ा किया गया। क्या यह केंद्र सरकार की छवि को खराब करने का प्रयास है .. एक साथ साथ ट्वीट कर उमा ने यदि स्पष्टीकरण दिया तो पत्र के संदर्भ और प्रसंग पर कहा कि वह अपना अस्तित्व खो चुके हैं…उन्होंने  यह कहकर कि इस मुद्दे पर वह अपनी बात मीडिया के सामने कल रखेंगी के साथ अपील की  कि आज इस घोर अनैतिक चेष्टा की अनदेखी की जाना चाहिए.. दरअसल चिट्ठी एक आईएस अधिकारी को प्रमोट किए जाने की सिफारिश पर केंद्रित थी उसी सोशल मीडिया पर उमाश्री की चिट्ठी वायरल हो चुकी है.. जिसमें उन्होंने मौन व्रत तोड़ने की बात कही को एक साथ यहीं पर कई सवाल खड़े होते हैं.. वह बात और है कि केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने पूरा फोकस स्वच्छता अभियान और उसके दूसरे चरण की जरूरत के इर्द-गिर्द रखा ..जिसमें समाज की भूमिका सरकार से आगे बताते हुए जिम्मेदारी और जवाबदेही का एहसास बखूबी उन्होंने कराया.. एक पुरानी चिट्ठी और दो अलग-अलग प्लेटफार्म पर केंद्रीय मंत्री उमा भारती की बात  को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.. जिन्होंने कहीं ना कहीं स्वच्छता और उसमें समाज के साथ अधिकारियों की भूमिका को जब  यह कहकर जोड़ा कि
 मंच में पीछे बैठे अधिकारी और सामने बैठे सभी लोग  स्वच्छता स्वयं से तय करेंगे। उन्होंने  गांव शहर  की स्वच्छता  पर जोर दिया लेकिन अधिकारियों की भूमिका से जुड़ा तो लगा कि व्यवस्था में भी स्वच्छता की बात  शायद वह करना चाहती हैं ..तो फिर सुबह किए गए उनके ट्वीट से इसे जोड़कर देखने को मजबूर हुए.. उन्होंने याद दिलाया
 जब एक ऊँगली आप उठाते हो तो तीन उंगलिया आप की ओर  होती है। अधिकारियो की प्रशंसा करने में कई बार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री संकोच करते है। पहली बार मोदी ने उस अधिकारी पर मीडिया का फोकस बनवाया जिसके कारण यह अभियान सफल हुआ, अधिकारियों में एक चीज़ होती है, एक गरिमा और एक ओरा होता  लेकिन एक जकड़न भी होती है। आईपीएस,आईएएस काम नहीं करना  तो कहेंगे की यह नहीं हो सकता। जिनको करना है कह देंगे की हो सकता है और कर के दिखा देंगे।
 कई लोग यह भी कह देते है कि मै तो ईमानदार हूँ यह नहीं हो सकता है। ऐसे लोगो से मै कहती  कम से कम इससे तो बेईमान अच्छे वो काम तो कर देगे। तुम्हारी ईमानदारी का क्या करेंगे।
और बेईमान तो मेरे साथ  रह नहीं सकता उनको तो मैं ठीक कर देती हूँ। इससे पहले केंद्रीय मंत्री ट्वीट कर एक अखबार और चैनल का हवाला दे कर एक पुरानी चिट्ठी को संदर्भहीन करार चुकी थी बावजूद इसके अधिकारियों की सोच और उनके मापदंड सवाल खड़े करने के साथ प्रहार कर कहीं ना कहीं उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं की नब्ज पर जरूर हाथ रख दिया.. जिनको भरोसे में लेने के लिए पिछले दिनों राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने चुनाव में संगठन की भूमिका नए सिरे से समझा कर एक बहस पहले ही छोड़ दी थी..ऐसे में सवाल खड़ा होना लाजमी है कि क्या उन्होंने सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी में अधिकारियों की भूमिका खासतौर से उनकी कार्यशैली को ध्यान में रखते हुए कार्यकर्ताओं की अपेक्षा को इस मंच पर अपने अंदाज में सामने रखा। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री शिवराज की मौजूदगी में मोदी के राज में अधिकारियों को काम पर लगाने की बात कह कर एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।
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{ उमा के ट्वीट और स्पष्टीकरण}
 प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने अपने उस पत्र पर सफाई दी है जिसे लेकर एमपी की राजनीति में बवाल मचा हुआ है। उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट करते हुए लिखा कि हमारे प्रधानमंत्री तथा केंद्र सरकार के इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम को खराब करने की कुचेष्टा के अंतर्गत मार्च के अंतिम सप्ताह में उत्तराखंड से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को लिखे गए मेरे एक पत्र को एक समाचार पत्र ने छापा और एक टीवी चैनल में दिखाया जा रहा है।उन्होंने लिखा कि कमाल यह है कि इस खबर में से समाचार पत्र ने लिखने का दिन एवं महीना गायब कर दिया तथा पत्र के अलग-अलग वाक्यों को जोड़कर एक समाचार बना दिया। इससे पत्र के असली तथ्य ही गायब हो गए हैं तथा इस तथ्य पर तो कोर्ट ने भी अपनी राय दे दी है।
उमा भारती ने लिखा कि इसलिए पत्र तथा उसका प्रसंग आज के संदर्भ में अपना अस्तित्व खो चुके हैं किंतु, महत्वपूर्ण बात यह है कि आज का दिन इसके लिए क्यों चुना गया? यह हमारे केंद्र सरकार की छवि को खराब करने का प्रयास है तथा हमारे प्रधानमंत्री के महत्वपूर्ण उपलब्धि से ध्यान हटाने का प्रयास है।
बकौल उमा भारती कार्यक्रम की गरिमा एवं महत्व को कम करने के लिए किसी दूसरे संदर्भहीन हो गए विषय को उठाने के इस अनैतिक प्रयास की मैं निंदा करती हूं। मेरी मीडिया के सभी वर्गों से अपील है कि आज इस घोर अनैतिक चेष्टा की अनदेखी करिए। मैं कल भोपाल में हूं, इस विषय पर कल बात करूंगी।
उमा भारती ने इस साल मार्च में मुख्यमंत्री शिवराज से राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी विनय निगम को IAS प्रमोट करने के लिए चिट्ठी लिखी थी। उमा भारती की चिट्ठी में डीपीसी की चयन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए गए थे।
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(साध्वी की समस्या और सवाल)
 शिवराज सिंह चौहान के नाम 22 मार्च 2018 को लिखी चिट्ठी के कारण साध्वी उमा भारती एक बार फिर चर्चा में आ गई। जिसमें उमा  ने राज्यसेवा के 1994 बैच के डिप्टी कलेक्टर विनय निगम से करीब दो दशक पुराने संबंधों का हवाला देकर उनका नाम डीपीसी के लिए नहीं भेजे जाने पर सवाल खड़े कर  कोई रास्ता निकालने का आग्रह किया ।यह पत्र काफी पुराना कितना प्रासंगिक कह नहीं सकते..  उन्होंने अपना मौन व्रत तोड़ कर यह संदेश लिखित तौर पर मुख्यमंत्री तक भेजा है। तो इसकी जानकारी डीओपीटी मिनिस्टर जीतेंद्र सिंह को भी भेजी है.. अलबत्ता व्यापम कार्ड को छोड़ दिया जाए तो अधिकारी या पार्टी कार्यकर्ताओं की ऐसी कोई सिफारिश उमा भारती की पहले कभी मीडिया की सुर्खियां नहीं बनी .. 2 पन्नों की इस चिट्ठी में अधिकारी विनय निगम से संबंध, झूठे आरोपों को नकार कर ईमानदार अधिकारी बता कर  उनके साथ अन्याय का जिक्र जिस तरह विस्तार के साथ किया गया है गौर करने लायक है.. जो एक साथ कई सवाल खड़े करता है.. सवाल यह चिट्ठी यदि उमा और शिवराज के बीच की है तो मीडिया तक कैसे पहुंची.. खड़े किए गए सवालों में कितना दम इसमें प्रशासनिक मापदंड और दूसरे पेंच की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है .. जिसके सियासी मायने भी निकालें जाना तय है.. क्या यह सिर्फ एक भरोसेमंद करीबी अधिकारी को न्याय दिलाने की पहल तक सीमित है या फिर संदेश और सवाल खडे कर व्यवस्था में बदलाव की ओर ध्यान आकर्षित करना भी है.. क्या उन्होंने उस पुरानी बहस को आगे बढ़ाया है जो नौकरशाही को लेकर पार्टी के अंदर और बाहर चर्चा का विषय बनती रही.. क्या वजह  जो उन्हें गंगा किनारे मौन व्रत तोड़ कर चिट्ठी लिखना पड़ा.. क्या साध्वी अपने समर्थकों और शुभचिंतकों के लिए भी मौन तोड़कर चुनाव में उनकी अपेक्षाएं पूरी करवाने के लिए इसी तरह सामने आएंगी.. जिनसे अब मेल-मुलाकात में भी उनकी कोई दिलचस्पी नहीं रह गई … केंद्रीय मंत्री और झांसी उत्तर प्रदेश से सांसद होने के कारण कार्यक्षेत्र भले ही उनका बदल गया लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री के नाते आज भी मध्य प्रदेश में उनके समर्थकों को उनका इंतजार है। वह भी तब जब वह 2019 तक कोई चुनाव लड़ने से लगातार वो इंकार कर रही हैं। फायर ब्रांड से वाटर ब्रांड तक का लंबा सियासी सफर तय कर चुकी उमाश्री हमेशा अपनी उम्र का हवाला देकर सक्रिय राजनीति में धैर्य, संयम और सही समय के इंतजार का संदेश देती रही। जिनकी गिनती कभी आक्रमक राजनीति और कहीं भी कभी भी कुछ भी बोल देने वाले ऐसे नेता के तौर पर होती रही जिनके बयान चर्चा में विवाद पैदा करते रहे। भाजपा में वापसी के बाद उमा ने अपने आप को बदल कल धैर्यवान और संयमी  नेता के तौर पर भी स्थापित किया है। तो बड़ा सवाल मध्य प्रदेश की सियासत से जुड़े  सवालों को अक्सर टाल देने वाली उमाश्री क्या अपना सियासी मौन आगे भी बरकरार रहेगा या फिर सियासी  व्रत तोड़ने का मानस बना चुकी है।