सवाल दर सवाल

नोटबंदी से बेरोजगार मजदूर शिवराज का ‘नया वोट बैंक’ राकेश अग्निहोत्री ‘सवाल दर सवाल’ नया इंडिया

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सवाल दर सवाल, राकेश अग्निहोत्री नया इंडिया
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नोटबंदी से बेरोजगार मजदूर शिवराज का ‘नया वोट बैंक’

मामा का अब बाबा के नाम पर मास्टर स्ट्रोक
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मिशन 2018 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा ऐलान करने वाले हैं.. जिसका स्पष्ट संकेत दिल से बात के दौरान उन्होंने दे दिया..बाबा साहब अंबेडकर की जयंती पर उनके नाम पर असंगठित मजदूर योजना के जरिए एक ‘नया वोट बैंक’ तैयार करेंगे, जो चुनाव में भाजपा सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी की भरपाई भी करेगा..बतौर मुख्यमंत्री लगातार तीन कार्यकाल में जाति, धर्म, वर्ग, समुदाय विशेष से ऊपर उठकर जिन कार्ययोजनाओं को शिवराज ने लागू करवाया उस वोट बैंक के जरिए भाजपा ने अपने सियासी हित पहले भी खूब साधे हैं.. लाड़ली लक्ष्मी योजना से लेकर किसानों के लिए जो सौगातें दी गईं उसने कांग्रेस को सोचने को मजबूर किया.. एक बार फिर असंगठित क्षेत्र के मजदूरों पर फोकस कर उनका पंजीयन कराने की मुहिम चलाते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मजदूरों और उनके परिवार की पढ़ाई, इलाज और रहने के लिए जमीन, मकान समेत दूसरी सुविधाओं के लिए आर्थिक सहायता का बंदोबस्त सुनिश्चित करने जा रहे हैं..ये वो वर्ग है, जो अभी तक या तो बेरोजगार था या फिर अपने दम पर कोई व्यवसाय या काम शुरू नहीं कर पा रहा था और रही सही कसर नोटबंदी ने पहले ही पूरी कर दी थी.. इस वर्ग को उसका हक देने के लिए मोदी सरकार ने भी बीमा से लेकर पीएफ योजना में पहले ही बड़ी राहत दे रखी है। तो सवाल खड़ा होना लाजमी है कि मध्यप्रदेश में पिछले दिनों भड़की हिंसा के बाद जब दलित वोट बैंक भाजपा से छिटकने की आशंका जताई जा रही थी तब क्या शिवराज की नई योजना भरपाई के साथ उसका तोड़ निकालने में भी सफल होगी।

मध्यप्रदेश में पिछले दिनों किसान आंदोलन से लेकर भड़की हिंसा के साथ बने माहौल ने जब चुनाव में नई चुनौतियों का इजाफा कर शिवराज और उनकी सरकार को संकट में डालने में कोई कसर नहीं छोड़ी.. तब भी चौहान के हौसले न सिर्फ बुलंद नजर आते, बल्कि तेजी से बनते-बिगड़ते समीकरणों के बीच वो अपनी उपयोगिता के साथ अब दूरदर्शिता को भी साबित कर रहे हैं, चाहे फिर वो सरकार और संगठन से जाने-अनजाने में हुए कोई चूक हो या फिर पर्दे के पीछे गॉडफादर संघ की बढ़ती अपेक्षाएं..शिवराज पूरा फोकस चुनाव पर बनाए रखते हुए खुद को लगातार आगे बढ़ते दिखाने में काफी हद तक सफल नजर आ रहे हैं..बाबा साहब अंबेडकर की जयंती पर जब देश की राजनीति गरमाई हुई है और ग्वालियर चंबल में हुई मौतों ने मध्यप्रदेश को सुर्खियों में ला दिया था..तब भी मुख्यमंत्री ने ना तो अपना धैर्य खोया और ना ही अपनी पकड़ कमजोर होने दी..अलबत्ता विरोधी ही नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर से भी सवाल खड़े किए गए तो भी शिवराज एक साथ कई मोर्चों पर अपने फैसलों से न सिर्फ भाजपा बल्कि खुद को मजबूत साबित कर रहे बल्कि एक बार फिर युवाओं, महिलाओं, वृद्धजनों सभी वर्ग और समुदाय विशेष को किसी न किसी योजना का लाभ पहुंचाने वाले शिवराज ने जिस बाबासाहेब आंबेडकर योजना का खाका तैयार किया है वो भाजपा के लिए एक बड़ा वोट बैंक साबित हो सकता है..हाथ ठेला वाले या रिक्शा रिक्शा चलाने वाले लोगों को रोजगार के लिए ऋण मुहैया कराने के साथ असंगठित मजदूरों के लिए जमीन-मकान के साथ बच्चों की पढ़ाई और उपचार की सभी सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए जो कदम उठाएंगे.. वो निश्चित तौर पर शिवराज के मानवीय पहलू का मुरीद जरूर हो जाएगा..केंद्र और राज्य सरकार की कई पुरानी योजनाओं के साथ इस योजना का फोकस जिन असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों पर किया जा रहा है वो भाजपा के एक नया वोट बैंक में तब्दील हो सकता है, जिसके लिए लगातार प्रचार-प्रसार के साथ उनका पंजीयन कराया जा रहा है..इस योजना का पूरा लाभ क्षेत्र विशेष के मतदाताओं को मिले, इसलिए विधायक, मंत्री और सांसद के साथ पंचायत स्तर तक एक पूरी कार्ययोजना तैयार की जा रही है..इस वोट बैंक की संख्या को लेकर पंजीयन खत्म होने का इंतजार करना होगा.. असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए संघ का अनुषांगिक संगठन भारतीय मजदूर संघ बहुत पहले से जमीनी स्तर पर काम कर रहा है तो इस वर्ग को मोदी सरकार की नोटबंदी योजना ने परेशान कर रखा था..यही नहीं भाजपा और संघ के अलावा देश में कई दूसरे मजदूर संगठन भी असंगठित क्षेत्र की इस लड़ाई को बहुत पहले से लड़ रहे हैं..देखना दिलचस्प होगा कि शिवराज सिंह चौहान सरकार की जय बाबा साहेब आंबेडकर मजदूर योजना भाजपा के वोट बैंक में कितना इजाफा करती है.. लेकिन  इतना तय है कि विरोधी दलों की परेशानी जरूर बढ़ाने वाली है..चुनावी साल में इस वर्ग को जो सौगात मिलेगी वो जरूर सियासत गर्माएगी.. भाजपा की रणनीति न सिर्फ दलित, बल्कि महिला अत्याचार की बढ़ती घटनाओं से ध्यान हटाने की है, बल्कि किसान और कर्मचारी की नाराजगी को भी पीछे छोड़ने की है.. इसके लिए किसान सम्मान यात्रा और उसके समापन पर किसानों को सौगात देने का सिलसिला भी जारी रखा जाएगा…