सवाल दर सवाल

BJP: सर्जिकल स्ट्राइक की एक्सरसाइज में सक्रिय संघ.. राकेश अग्निहोत्री ‘सवाल दर सवाल’ नया इंडिया

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सवाल दर सवाल, राकेश अग्निहोत्री’ सवाल नया इंडिया
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BJP: सर्जिकल स्ट्राइक की एक्सरसाइज में सक्रिय संघ

अमित शाह के जाने के बाद कोर कमेटी की बैठक पहली बार आज
संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल की मौजूदगी में होगा चिंतन-मंथन
संघ और भाजपा की समय-समय पर समन्वय बैठक के साथ करीब 6 माह बाद भाजपा कोर कमेटी की बैठक में चिंतन मंथन होने जा रहा है। समन्वय बैठक दिल्ली से लेकर भोपाल तक पहले भी होती रही, जिसमें सत्ता और संगठन के नेता शिरकत करते रहे हैं..एक बार फिर समन्वय बैठक के नाम पर विधानसभा-लोकसभा चुनाव की चुनौतियों को चिन्हित कर चिंतन के लिए संघ ने भाजपा के मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष, संगठन महामंत्री को बुलाया है… यानी इस बैठक की पहल संघ ने की है और इसकी अगुवाई भाजपा और संघ के बीच समन्वय की अधिकृत भूमिका निभाने वाले सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल करेंगे, जो दिल्ली में प्रचार प्रमुख की राष्ट्रव्यापी बैठक में शिरकत करने के बाद भोपाल आ रहे हैं..भोपाल से ही पिछले दिनों फेरबदल के बाद मनमोहन वैद्य की जगह लेने वाले अरुण कुमार ने दिल्ली में इसका नेतृत्व किया था..इस महत्वपूर्ण बैठक में पूर्व क्षेत्र प्रचारक अरुण जैन खासतौर से मौजूद रहेंगे तो महाकौशल, मालवा और मध्य भारत क्षेत्र के संघ के पदाधिकारियों को भी बुलाया गया है..इसके अलावा राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री रामलाल की मौजूदगी को लेकर स्थिति क्लियर नहीं हुई है, लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान, संगठन महामंत्री सुहास भगत, संगठन महामंत्री अतुल राय के अलावा कुछ मंत्री भी आमंत्रित बताए जाते हैं..रामलाल इस बैठक में मौजूद रहे तो वो मोदी और शाह की बीजेपी के केंद्रीय प्रतिनिधि के तौर पर इसका हिस्सा बनेंगे..यदि रामलाल नहीं आते हैं तो फिर सीधे तौर पर संवाद संघ के नुमाइंदे कृष्ण गोपाल और मध्यप्रदेश में संघ के पदाधिकारियों की शिवराज के प्रतिनिधियों से चिंतन-मंथन होगा..ना चाहते हुए भी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को लेकर पसोपेश से नेतृत्व बाहर नहीं निकल पाया है, जिसके लिए कई दौर की एक्सरसाइज में कई नामों पर चर्चा हुई, लेकिन सहमति अमित शाह और शिवराज सिंह चौहान के बीच अभी तक नहीं बन पाई है..अभी भी चर्चा में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और प्रदेश के संसदीय मंत्री नरोत्तम मिश्रा के नाम सुर्खियों में हैं..पिछले दिनों ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से दलित आंदोलन के बीच भड़की हिंसा के बाद नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर केंद्र और राज्य दूसरे एंगल पर भी सोचने को मजबूर हुए हैं..जहां हिंसा के दौरान मौत के शिकार हुए लोगों की पहचान दलित और क्षत्रिय वर्ग के बीच हुई है और अब जब सख्ती दिखाते हुए पुलिस आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी में जुटी हुई है तो माहौल क्षेत्र में अभी भी सामान्य नहीं हुआ है, इसलिए ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की राजनीति से ताल्लुक रखने वाले नए प्रदेश अध्यक्ष के दो दावेदारों पर अंतिम मुहर नहीं लगाई जा सकी है..भाजपा को डर है कि कहीं क्षेत्र विशेष की सोशल इंजीनियरिंग ना बिगड़ जाए, लेकिन नया सवाल यहीं पर खड़ा होता है कि यदि इस संबंध में समीक्षा बैठक में अध्यक्ष के तौर पर नंदकुमार सिंह चौहान मौजूद रहेंगे और उन्हें कुछ दिन बाद हटा दिया जाता है तो फिर संघ के हस्तक्षेप और उसकी नई गाइडलाइन का क्या होगा? जानकार ये भी मानते हैं कि भाजपा में अध्यक्ष सांकेतिक है और संगठन महामंत्री सुहास भगत की मौजूदगी ज्यादा मायने रखती है, जिसके मार्फत कृष्ण गोपाल और संघ अपना संदेश टीम शिवराज तक आगे भी पहुंचाएगा..इस बैठक के लिए मुख्यमंत्री निवास से लेकर शारदा विहार और दूसरे विकल्प भी अंतिम समय तक तलाशे जा रहे हैं, जिससे इसकी गोपनीयता बनाई जा सके..आयोजकों की रणनीति और गोपनीयता ने इस बैठक का महत्व बढ़ा दिया है..संघ का ये हस्तक्षेप नए सिरे से उस वक्त सामने आ रहा है, जब कुछ दिन पहले उसके नुमाइंदे राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री सौदान सिंह अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की गाइडलाइन के तहत 3 दिन रुककर भाजपा की दशा और दिशा का आंकलन कर दिल्ली लौट चुके हैं..6 माह पहले खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष भी भोपाल में अपने दिशानिर्देश बता चुके हैं.. उनके भोपाल से जाने के बाद यह पहला मौका होगा  जब कोर कमेटी  की बैठक भी होने जा रही है  इस बीच में कई उपचुनाव हो गए  तो मंत्रिमंडल का विस्तार भी  लेकिन  कोर कमेटी की बैठक की औपचारिकता फोन तक ही सीमित रही। संघ की चिंता सिर्फ विधानसभा के लगातार चार उपचुनाव में मिली भाजपा की हार तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी बड़ी चिंता मंदसौर गोलीकांड से लेकर ग्वालियर-चंबल में दलित हिंसा भड़कने से उपजे और बने वो हालात हैं, जिसने यदि भाजपा संगठन की पोल खोलकर रख दी तो सरकार की योजनाओं के बावजूद किसानों की नाराजगी थमने का नाम नहीं ले रही है..मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा डैमेज कंट्रोल के लिए कर्मचारियों से लेकर वर्ग समुदाय को दी जा रही लगातार सौगात के बावजूद संघ कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता को इस चुनाव के लिए नई चुनौती के रूप में देख रहा है..जिस कांग्रेस को नेतृत्वहीन ,चेहरा विहीन और गुटबाजी में उलझा बता कर भाजपा जीत की हैट्रिक बनाती रही है..लेकिन आज परिदृश्य बदला हुआ नजर आता है..संघ का मानना है कि भाजपा के अंदर भी सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है और समय रहते यदि संभल गए तो एक बार फिर शिवराज के नेतृत्व में सरकार बनाने से विपक्ष उसे नहीं रोक पाएगा, लेकिन इसके लिए भाजपा में सभी नेताओं को एकजुटता दिखाना होगी तो कार्यकर्ता की नाराजगी दूर करना उसके लिए बड़ी चुनौती होगी… पिछले 6 माह में मध्यप्रदेश के सियासी माहौल में जो तब्दीली अचानक देखने को मिली है उसे संघ ने भी संजीदगी के साथ लिया..इसी क्रम में  उस सत्ता और संगठन को समय रहते आईना दिखाने की जरूरत महसूस की है जिसके खाते में पिछले डेढ़ दशक में उपलब्धियों की भरमार है, लेकिन नई चुनौतियों का अंबार मौजूद है..विधायक से लेकर सरकार के खिलाफ एन्टीइनकम्बेंसी तो कार्यकर्ताओं और जनता की अपेक्षाओं की भरमार शिवराज के लिए किसी चुनौती से कम नहीं..चुनौती सरकार की उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार के साथ जमीनी हकीकत की तह तक जाने के भी है..ऐसे में  भाजपा के सर्वे के साथ  संघ की सभी 230 विधानसभा की आंकलन रिपोर्ट पर मंथन से इन्कार नही किया जा सकता। सूत्र बताते हैं कि संघ ने पहली बार चुनाव जीतने वाले विधायकों के अलावा दो और 3 से अधिक भी चुनाव जीते चले आ रहे विधायकों की उनके अपने क्षेत्र में मजबूत और कमजोर पकड़ को जानने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दों और बिंदुओं पर निजी स्तर पर आंकलन कराया है। संघ की समन्वय बैठक के साथ भाजपा की स्कूल कमेटी के सदस्यों को भी बुलाया गया है जिसकी मौजूदगी में अमित शाह ने 6 माह पहले भोपाल में 3 दिन रुक कर करीब डेढ़ दर्जन बैठ कर ली थी यह अंतिम मौका था जब कोर ग्रुप उस हर दूसरी बैठक का हिस्सा बना था.. जिसके बाद भाजपा के सत्ता संगठन और संघ के नेताओं की कई बैठकें हुई लेकिन कोर कमेटी के सभी सदस्यों के साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कोई भी बैठक नहीं की पहले समन्वय और बाद में कोर कमेटी की बैठक उस वक्त होने जा रही है जब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को लेकर पेंच फंसा हुआ है…