सवाल दर सवाल

बदला संघ तो शिवराज हुए और मजबूत… राकेश अग्निहोत्री सवाल’ दर सवाल नया’ इंडिया

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सवाल दर सवाल, राकेश अग्निहोत्री, नया इंडिया मैै
बदला संघ तो शिवराज हुए और मजबूत
*संघ का मध्यप्रदेश में बड़ा बदलाव
*भाजपा से धर्मेंद्र प्रधान, थावरचंद गहलोत के साथ अजय प्रताप सिंह और कैलाश सोनी राज्यसभा में जाएंगे
चुनावी साल में मध्यप्रदेश में संघ ने बड़े बदलाव के साथ  बीजेपी की नई जमावट ने जो संकेत  दिए उससे साफ है कि शिवराज सिंह चौहान और मजबूत हुए हैं.. खासतौर से मुंगावली कोलारस में मिली भाजपा की हार के बाद राज्यसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी और शिवराज के बीच 50-50 का  फार्मूला सामने आया।तो नागपुर में हुई संघ की प्रतिनिधि सभा की बैठक के साथ क्षेत्र प्रचारक अरुण जैन को अखिल भारतीय सह प्रचारक की जिम्मेदारी सौंपते हुए सह क्षेत्र प्रचारक दीपक विसपुते को प्रांत प्रचारक की जिम्मेदारी सौंपी गई,यही नही महाकौशल से लेकर मालवा में भी संघ ने पदोन्नति के साथ नए चेहरों को सामने लाया है..इधर राज्यसभा चुनाव के लिए पहले ही धर्मेंद्र प्रधान और थावरचंद गहलोत को भाजपा अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी है तो दूसरे दो उम्मीदवारों के तौर पर चौंकाने वाले नाम अजय प्रताप सिंह और कैलाश सोनी के तौर पर सामने आए हैं, जिनके जरिए भाजपा ने विंध्य -महाकौशल की राजनीति में भाजपा के अंदर संतुलन के साथ कांग्रेस से निपटने की रणनीति बनाई है तो शिवराज नरेंद्र सिंह को अपने भरोसेमंद समर्थकों को उपकृत करने का भी मौका मिल गया..तो कांग्रेस ने चुनाव को ध्यान में रखते हुए पिछड़े वर्ग के अनुभवी पुरानी पीढ़ी के राजमणि पटेल को राज्यसभा में भेजकर विंध्य क्षेत्र की सियासत को साधने के लिए नया दांव खेलकर सबको चौंका दिया है। जहां से भाजपा ने प्रदेश महामंत्री अजय प्रताप सिंह को राज्यसभा में भेजा है। कुल मिलाकर संघ में बदलाव के बाद अनुभवी शिवराज की जिम्मेदारी पर्दे के पीछे सक्रिय रहने वाले संघ की तुलना में चुनाव में और बढ़ने वाली है..
मध्यप्रदेश से भाजपा ने राष्ट्रीय महामंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत के साथ दो अतिरिक्त उम्मीदवारों के तौर पर प्रदेश भाजपा के महामंत्री अजय प्रताप सिंह और मीसाबंदी कैलाश सोनी शामिल होंगे..गहलोत और प्रधान पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व की पसंद तो अजय प्रताप और कैलाश सोनी का शिवराज सिंह चौहान के वीटो पॉवर के चलते राज्यसभा में जाना तय है..मोदी और शाह की पहली पसंद धर्मेंद्र प्रधान अब राज्यसभा सांसद के तौर पर मिशन 2018-19 के लिए मध्यप्रदेश में ज्यादा सक्रिय नजर आ सकते हैं.. तो भाजपा के सबसे बड़े दलित चेहरे के तौर पर लगातार तीसरी बार थावरचंद को राज्यसभा में भेजकर पार्टी ने एक नई लाइन खोल दी है..अजय प्रताप सिंह को शिवराज और नरेंद्र की पसंद बनकर विंध्य क्षेत्र की राजनीति में नेता प्रतिपक्ष अजय  सिंह की काट के तौर पर लाया गया है तो चौंकाने वाला नाम नरसिंहपुर-महाकौशल की अगुवाई करने वाले कैलाश सोनी का है, जिनकी केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल और हाल ही में शिवराज कैबिनेट में मंत्री बनाए गए जालम सिंह से सियासी प्रतिस्पर्धा जगजाहिर है.. अजय सिंह और कैलाश सोनी  शिवराज और नरेंद्र सिंह की  पहली पसंद  बन कर सामने आए  और मोदी और शाह ने  उस पर अपनी मुहर लगाई। इसके साथ ही पूर्व संगठन महामंत्री माखन सिंह और 4 साल पहले कांग्रेस विधायक रहते इस्तीफे के साथ भाजपा में शामिल हुए चौधरी राकेश सिंह को राज्यसभा में भेजे जाने की खबरें निराधार साबित हुईं तो प्रदेश भाजपा द्वारा हाईकमान को राज्यसभा दावेदारों की भेजे गए पैनल में शामिल दीपक विजयवर्गीय विनोद गोटिया  समेत दूसरे नेताओं को भी निराशा हाथ लगी..संगठन की राजनीति के दो बड़े चेहरे अजय प्रताप सिंह और कैलाश सोनी को राज्यसभा में भेजे जाने के बाद अब सबकी नजर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के उत्तराधिकारी पर टिक गई है, जिनको बदले जाने की चर्चा पर अभी विराम लगना बाकी है..फिलहाल संदेश साफ है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की व्यक्तिगत पसंद का हाईकमान ने पूरा ध्यान रखा तो दूसरे नेताओं में नरेंद्र सिंह भी पर्दे के पीछे बड़ी भूमिका निभाते हुए नजर आए.. मुंगावली कोलारस विधानसभा चुनाव में मिली हार के बावजूद हाईकमान ने ना सिर्फ शिवराज की सुनी बल्कि उनकी पसंद को ही अपनी पसंद बनाया। इसके साथ ही मिशन 2018 और 19 को ध्यान में रखते हुए शायद अब जल्द ही संगठन में फेरबदल की अटकलों पर भी विराम लग जाएगा । राज्यसभा की सूची सेक्स संदेश और निकल कर सामने आता है राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के पदाधिकारी और प्रवक्ताओं को राज्यसभा में उपकृत करने के साथ यदि विधायक रहते राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी निभा रहे कैलाश विजयवर्गीय को इस बार राज्यसभा में नहीं भेजा गया तो मतलब साफ है कि हाईकमान  जनाधार और संगठन पर पकड़ रखने वाले इस नेता चुनाव लड़ा कर ही भाजपा में आगे बढ़ाएगा यह चुनाव विधानसभा का होगा या लोकसभा का इसके लिए इंतजार करना होगा। राज्यसभा की अपनी दावेदारी को लेकर कैलाश विजयवर्गीय पहले ही साफ इनकार कर चुके हैं..

फिल्म भागवत में बड़ा बदलाव
मनमोहन वैद्य और अनंत जी दो नए संघ के सह कार्यवाह होंगे…फिलहाल सुरेश सोनी, दत्तात्रेय होसबोले, कृष्ण गोपाल और  भगैय्या जी भी सह कार्यवाह की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, जबकि भैयाजी जोशी को लगातार चौथी बार सर कार्यवाह पहले ही चुना जा चुका है..टीम भागवत में बदलाव के साथ मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ से जुड़े प्रचारकों की भूमिका में भी बड़े स्तर पर बदलाव सामने आया है..अरुण कुमार जिनका भोपाल हेड क्वार्टर था वो मनमोहन वैद्य का स्थान अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख के तौर पर लेंगे..क्षेत्र प्रचारक अरुण जैन को अखिल भारतीय सह प्रचारक प्रमुख का दायित्व सौंपते हुए दीपक विसपुते को नया क्षेत्र प्रचारक नियुक्त किया गया है..वहीं मालवा प्रांत के सह प्रांत प्रचारक बलिरामजी पटेल को पदोन्नत कर मालवा का प्रांत प्रचारक बनाया गया है..इस भूमिका को निभाते रहे श्रीकांत को साहित्य परिषद में नई जिम्मेदारी के साथ भेजा गया है, जबकि प्रदीप गुप्ता जो शारीरिक प्रमुख विभाग से जुड़े थे, उन्हें महाकौशल क्षेत्र के सह प्रांत प्रचारक की जिम्मेदारी सौंपी गई है..कुल मिलाकर चुनावी साल में संघ के अनुभवी क्षेत्र प्रचारक अरुण जैन की पदोन्नति और नई भूमिका के साथ दीपक विसपुते की जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ जाती है, जो छत्तीसगढ़ से जुड़े रहे और पिछले कई माह से अरुण जैन के साथ सह क्षेत्र प्रचारक की भूमिका निभा रहे थे..नागपुर में हुई प्रतिनिधि सभा में संघ की प्राथमिकताओं में मध्यप्रदेश खासतौर से सबसे ऊपर रहा है..फिलहाल संदेश साफ है कि मोदी के मिशन 19 को ध्यान में रखते हुए सरसंघचालक मोहन भागवत ने सर कार्यवाह के तौर पर भैयाजी जोशी की एक और पारी सुनिश्चित करने में यदि विशेष दिलचस्पी दिखाई है तो उसकी वजह है भाजपा की एक बार फिर केंद्र में सरकार बनाने के लिए संघ में अनुभवी पदाधिकारियों का और प्रभावी और बेहतर उपयोग करना..बड़े फैसले के तौर पर 4 सह सर कार्यवाह के साथ दो अतिरिक्त सह सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य और अनंतजी को मुख्यधारा में लाया गया है, जो नीति निर्धारक के तौर पर बड़े फैसले के सहभागी बनेंगे..इस बैठक में किसी पुराने सह कार्यवाह की भूमिका ना तो बदली गई न ही नए सिरे से तय की गई और न ही उन्हें ड्रॉप किया गया..संकेत साफ है कि यदि युवा चेहरे के तौर पर दत्तात्रेय होसबोले की दावेदारी को ध्यान में रखते हुए उन्हें भैयाजी जोशी के स्थान पर सर कार्यवाह की जिम्मेदारी सौंपी जाती तो वरिष्ठता के दायरे में 4 सह कार्यवाह में शामिल वरिष्ठ प्रचारक के बीच समन्वय बनाना बड़ी चुनौती साबित हो सकता है..चर्चा संघ की ओर से दक्षिण के एक प्रचारक को बीजेपी में भेजे जाने की भी है तो राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल की नई भूमिका को लेकर भी सस्पेंस खत्म नहीं हुआ है..जिस पर संघ की नई टीम के कोर ग्रुप के पदाधिकारी अगले 2 दिनों में कोई फैसला ले सकते हैं, जिससे अमित शाह को अवगत कराया जाएगा..

कांग्रेस ने ओबीसी राजमणि पटेल पर लगाया दांव
कांग्रेस ने विंध्य क्षेत्र के ओबीसी कुर्मी नेता राजमणि पटेल को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है..राजमणि श्यामाचरण शुक्ल से लेकर अर्जुन सिंह मंत्रिमंडल का बड़ा चेहरा रह चुके हैं, जो दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में चुनाव हार गए थे..सिरमौर-रीवा से चार बार विधायक रह चुके राजमणि को राज्यसभा में भेजकर कांग्रेस ने विंध्य क्षेत्र की राजनीति में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के साथ क्षत्रिय और ओबीसी के बीच एक बेहतर समन्वय बनाकर जनाधार बढ़ाने की कोशिश की है..बीजेपी के इस क्षेत्र में सर्वमान्य नेता राजेंद्र शुक्ल से मुकाबला करने के लिए ये जोड़ी जिसमें सुंदरलाल तिवारी जैसे नेता भी शामिल होंगे, राजमणि की उम्मीदवारी के साथ उन लोगों को झटका लगा है जो कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव को राष्ट्रीय राजनीति में भेजे जाने की अटकलों को हवा दे रहे थे..मध्यप्रदेश से सत्यव्रत चतुर्वेदी ब्राह्मण नेता की जगह पिछड़े वर्ग के राजमणि की दावेदारी का विंध्य के साथ बुंदेलखंड और महाकौशल तक में भी उपयोग किया जा सकता है..इसके साथ ही अब कांग्रेस के महाधिवेशन के बाद सीएम इन वेटिंग के 2 बड़े दावेदारों कमलनाथ और ज्योतिरादित्य के साथ अरुण यादव प्रदेश अध्यक्ष और अजय सिंह नेता प्रतिपक्ष नए सिरे से समन्वय बनाकर आगे बढ़ने को मजबूर होंगे.. दीपक बाबरिया पहले ही किसी एक चेहरे को प्रोजेक्ट किए जाने पर पल्ला झाड़ चुके हैं.. रणदीप सिंह सुरजेवाला सही समय पर अपने पत्ते खोलने का इशारा कर चुके हैं..कुल मिलाकर पिछड़े वर्ग पर अपनी पकड़ और मजबूत करने के लिए कांग्रेस ने राजमणि पर नया दांव खेला है..