सवाल दर सवाल

कमबैक के लिए ‘कंफ्यूज कांग्रेस’ का ‘फार्मूला कंप्रोमाइज’ राकेश अग्निहोत्री ‘सवाल दर सवाल’ नया इंडिया

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सवाल दर सवाल, राकेश अग्निहोत्री ,नया इंडिया
कमबैक के लिए ‘कंफ्यूज कांग्रेस’ का ‘फार्मूला कंप्रोमाइज’
मध्यप्रदेश की सत्ता में कमबैक के लिए फिलहाल ‘कंफ्यूज कांग्रेस’ ने ‘फार्मूला कंप्रोमाइज’ की लाइन पर आगे बढ़ने के संकेत दे दिए हैं..अभी तक मध्यप्रदेश चुनाव में चेहरा प्रोजेक्ट करने की खुली पैरवी करते रहे एक बड़े दावेदार ज्योतिरादित्य सिंधिया यदि बैकफुट पर आ गए तो प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया ने भी सामूहिक नेतृत्व को वक्त की जरूरत बताकर एक संकेत ये भी दे दिया कि चेहरे को लेकर स्वीकार्यता पर फिलहाल सवाल का सीधा स्पस्ट जवाब देना संभव नहीं है.. बाद में चेहरे की चकल्लस से जूझ रही कांग्रेस के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने जरूर भोपाल से सही समय पर सही फैसला लिए जाने का संकेत देकर चेहरे की चिक-चिक को फिलहाल ठंडे बस्ते में डालने की बात की..जिसने कांग्रेस हाईकमान के सामने लगभग आत्मसमर्पण करने वाले ज्योतिरादित्य को राहत दी होगी..विधानसभा सत्र के अवकाश के बाद आगाज के साथ ही प्रदेश कांग्रेस कार्यालय का एक बार फिर सन्नाटा टूटा और बड़ा संदेश ये गया कि सियासी वनवास खत्म करने को लेकर अब मध्यप्रदेश कांग्रेस केंद्र के राडार पर आ चुका है..जहां 22 मार्च को कमलनाथ और ज्योतिरादित्य की अगुवाई में विरोध-प्रदर्शन में सभी नेता एक बार फिर जुड़ते हुए नजर आएंगे..ऐसे में सवाल खड़ा होना लाजमी है कि क्या कोलारस-मुंगावली जीत के बावजूद ज्योतिरादित्य की स्वीकार्यता पर कांग्रेस के अंदर सवाल खड़े करने की होड़ फिर नए सिरे से लग गई है.. तो आखिर वजह क्या जो जूनियर सिंधिया खुद दो कदम आगे तो चार कदम पीछे की कहावत को चरितार्थ करते हुए नजर आ रहे हैं..क्या जीत के आंकड़े और मतों का ग्राफ गिरना इसकी एक वजह है और सिंधिया ये समझ चुके हैं कि लाज बचाने वाले इन परिणामों के बाद भलाई चुनाव में सामूहिक नेतृत्व में ही आगे बढ़ने में है..

कांग्रेस ने नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की अगुवाई में जमीन घोटाले को लेकर विधानसभा के अंदर शिवराज सरकार को सीधे निशाने पर लिया तो प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में दीपक बाबरिया, ज्योतिरादित्य सिंधिया और राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला, प्रियंका चतुर्वेदी और अरुण यादव ने अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलकर अपने इरादे जता दिए..पहले बाबरिया और सिंधिया ने मीडिया के मार्फत शिवराज सरकार को घेरा, लेकिन चुनाव में चेहरे के पुराने और ज्वलंत मुद्दे पर फार्मूला कंप्रोमाइज की उस लाइन को आगे बढ़ा दिया, जिसमें अभी तक अजय सिंह से लेकर अरुण यादव विशेष रुचि लेते रहे..ये पहला मौका था कि ज्योतिरादित्य ने यदि राष्ट्रीय स्तर से लेकर अलग-अलग राज्य के मुताबिक चेहरा प्रोजेक्ट किए जाने की अपनी पुरानी बात से ये कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उन्होंने मध्यप्रदेश के संदर्भ में ये बात नहीं कही..शायद हाईकमान का हस्तक्षेप कहें या फिर बाबरिया की समझाइश, जो सिंधिया को पहली बार चेहरे के मुद्दे पर बैकफुट पर खड़ा देखा गया..दीपक बाबरिया ने इस मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में जूनियर सिंधिया की बात का उल्लेख कर कोलारस-मुंगावली में मिली जीत का श्रेय सामूहिक नेतृत्व को देकर एक नई बहस को आगे बढ़ा दिया..इसी मंच से ज्योतिरादित्य ने उपचुनाव में चुनाव आयोग के हस्तक्षेप पर संतोष जताते हुए यदि उसे धन्यवाद दिया तो दीपक बाबरिया ने त्रिपुरा में भाजपा के बढ़ते अप्रत्याशित ग्राफ पर सवाल खड़ा कर कहीं ना कहीं आयोग की भूमिका पर नाराजगी का इजहार किया..कुल मिलाकर कांग्रेस की लीडरशिप को लेकर फिलहाल दीपक बाबरिया की सोच आगे बढ़ती हुई नजर आई..वो बात और है कि स्पष्टता के साथ प्रदेश प्रभारी और भी बहुत कुछ कह सकते थे, लेकिन इस विवाद से पल्ला झाड़ने में ही उन्होंने भलाई समझी..इस बहस को दोपहर बाद फिर कांग्रेस कार्यालय में मीडिया से रूबरू हुए रणजीत सिंह सुरजेवाला ने ये कहकर एक नया मोड़ दिया कि सही समय पर सही फैसला कांग्रेस हाईकमान जरूर लेगा..इन दोनों प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की गैरमौजूदगी वजह कुछ भी हो यदि चर्चा का विषय बनी तो मौजूद प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव को जो सम्मान और अहमियत मिलनी चाहिए थी वो देखने में नजर नहीं आई..दीपक बाबरिया ने ज्योतिरादित्य की मौजूदगी में विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन की नई तारीख 22 मार्च का ऐलान कर इसकी अगुवाई कमलनाथ और ज्योतिरादित्य द्वारा संयुक्त तौर पर किए जाने का ऐलान जब किया तब संदेश ये गया कि प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव और उनकी टीम पीछे छूट रही है..चेहरे को लेकर कांग्रेस भले ही किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई, लेकिन दीपक बाबरिया ने ये जरूर स्पष्ट कर दिया कि अगले चुनाव की धुरी कमलनाथ और ज्योतिरादित्य ही बनेंगे..बेहतर होता बाबरिया ये कहते कि प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव के नेतृत्व में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य भी प्रदर्शन का हिस्सा बनेंगे तो संदेश साफ है कि अब अरुण यादव से लेकर अजय सिंह जैसे नेताओं को राष्ट्रीय नेतृत्व ने कम से कम कमलनाथ-ज्योतिरादित्य के पीछे चलने का अपने अंदाज में मशविरा दे दिया है, जिसमें संदेश ये छुपा है कि अजय और अरुण की केमिस्ट्री मध्यप्रदेश में भले ही अच्छी हो, लेकिन वो मानस बना लें कि कमलनाथ और ज्योतिरादित्य ही आगे रहेंगे..जिस तरह दीपक बाबरिया ने अपनी ओर से पूर्वोत्तर के राज्यों में भाजपा को मिली जीत पर सवाल खड़े कर चुनाव आयोग से अपनी अपेक्षाएं बढ़ाने की बात कही उससे ये संदेश भी गया कि प्रदेश प्रभारी शायद ये चाहते थे कि चेहरे की स्वीकार्यता की खबर पीछे छूट जाए..जिस तरह ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खुद को मध्यप्रदेश में नेतृत्व का चेहरा बनाए जाने पर अपने पुराने रुख को बदल दिया उसके कारणों की तह तक जाया जाए..तो संदेश साफ है कि हाईकमान सिर्फ कमलनाथ ही नहीं अजय सिंह और अरुण यादव को भी नाराज करके चुनाव में नहीं जाना चाहता..इसकी एक वजह मुंगावली-कोलारस उपचुनाव में जीत के बावजूद वोटों का गिरता प्रतिशत भी माना जा रहा है..वैसे सिंधिया ने जीत की घोषणा के साथ ही सभी वरिष्ठ नेताओं-कार्यकर्ताओं और क्षेत्र की जनता को जीत का श्रेय दिया यानी वो भी अच्छी तरह जानते हैं कि बिना फार्मूला कंप्रोमाइज के मिशन 2018 भी आसान नहीं होगा.. वह बात हो रही थी मुंगावली कोलारस के धन्यवाद दौरे के दौरान ज्योतिरादित्य का जादू एक बार फिर क्षेत्र की जनता के सिर चढ़कर बोला मतलब साफ अपने क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता को कोई चुनौती नहीं दे सकता लेकिन बड़ा सच यह भी इस निर्णय अहम जीत के बावजूद कांग्रेस के अंदर उनकी स्वीकार्यता और चेहरा प्रोजेक्ट किए जाने को लेकर रोड़े कम नहीं है..

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सुरजेवाला के निशाने पर मामा शिवराज…
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भ्रष्टाचार, घोटालों और दूसरे सरकारी आंकड़ों का हवाला देकर शिवराज के राज पर कई बार सवाल खड़े किए गए..लेकिन इस बार कांग्रेस के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने शिवराज को मुख्यमंत्री से ज्यादा मामा से संबोधित कर व्यक्तिगत तौर पर निशाने पर लिया..सुरजेवाला पूरी तैयारी के साथ आए थे, जिन्होंने 2004 से लेकर 2016 के किसान, महिला, शिशु मृत्यु दर, अत्याचार के साथ घोटालों-घपलों के आरोपों की झड़ी लगाकर सीधे मामा शिवराज को खरी-खोटी सुनाई..रणजीत सिंह सुरजेवाला ने सारे आंकड़े मीडिया के सामने रखे और अपने चिरपरिचित अंदाज में शिवराज पर व्यंग्य-कटाक्ष के जरिए तंज भी खूब कसे..सुरजेवाला ने तर्क, तथ्य, आंकड़े के साथ प्रभावशाली, बेबाकी और आक्रामक अंदाज में मध्यप्रदेश की उस तस्वीर को सामने रखा, जो कांग्रेस को रास नहीं आ रही.. जब सुरजेवाला से पूछा गया कि पिछले 12 साल में कांग्रेस कि केंद्र में सरकार थी तब भी वह मध्य प्रदेश में इन मुद्दों को उठा कर जनता का भरोसा क्यों नहीं जीत पाई तो सुरजेवाला ने खुले दिल से अपनी गलतियों और खामियों को स्वीकार किया.. ये पहला मौका नहीं था  कि आंकड़ों की बाजीगरी के जरिए मीडिया के मार्फत प्रदेश की जनता को शिवराज के खिलाफ कांग्रेस के समर्थन में करने की कोशिश की गई…सुरजेवाला ने हर सवाल का जवाब दिया, लेकिन चुनाव आयोग और ईवीएम के मुद्दे पर कन्नी काटने में ही भलाई समझी..इस दौरान उनकी सहयोगी राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में शांत रहीं..यहीं पर एक सवाल खड़ा होता है जो सोचने को भी मजबूर करता है कि मध्यप्रदेश कांग्रेस और उसके नेता, नीति-निर्धारक आंकड़ों के खेल में पीछे छूट गए और हाईकमान को तैयारी के साथ सामने आना पड़ा तो इसकी मूल वजह क्या है..प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होने से पहले ही रणजीत सिंह सुरजेवाला ने मध्यप्रदेश के इंदौर के ही अभय दुबे को मंच साझा करने के लिए बुलाया, जो फिलहाल दिल्ली में मीडिया विभाग से जुड़कर कांग्रेस में सक्रिय हैं..वैसे सुरजेवाला के इस दौरे का बड़ा मकसद प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ताओं से लेकर मीडिया की प्रभावी मौजूदगी को लेकर विभाग का कायाकल्प करना भी था.. फिर भी सवाल यहीं पर खड़ा होता है कि जब देश में त्रिपुरा पश्चिम बंगाल से लेकर उत्तर प्रदेश में मूर्ति खंडित किए जाने का मामला सुर्खियों में है आख़िर तब सुरजेवाला ने भोपाल आकर मामा शिवराज के आभामंडल और उपलब्धियों पर सवाल खड़ा कर मूर्ति खंडित करने का फैसला क्यों किया ध्यान देने वाली बात यह है कि शिवराज खुद कांग्रेस पर कमर के नीचे वार करने और मूर्ति खंडित करने का आरोप लगाते रहे। नेतृत्व चेहरा वहीं कांग्रेस क्या एक बार फिर भाजपा से ज्यादा शिवराज की घेराबंदी में दिलचस्पी लेती हुई नजर आ रही है क्योंकि मुंगावली कोलारस उपचुनाव के दौरान ज्योतिरादित्य तो पहले ही यह कह चुके हैं कि मुकाबला उनके और शिवराज के बीच है। सुरजेवाला द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद 22 मार्च का विधानसभा घेराव का महत्व बढ़ जाता है।

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(बाबरिया गाइड लाइन तार-तार, सिंधिया बैक फुट पर)
कांग्रेस के मध्यप्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया ने भले ही नेतृत्व और चेहरे के मुद्दे पर देर से ही सही बड़े दावेदार ज्योतिरादित्य सिंधिया को भरोसे में ले लिया हो, लेकिन बाबरिया की गाइडलाइन और अनुशासन का मशविरा एक बार फिर तार-तार होता नजर आया..जब भी ज्योतिरादित्य प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचे तो हमेशा अति उत्साही उनके व्यक्तिगत समर्थक-कार्यकर्ताओं का जोश.. व्यवस्था और अनुशासन की कमजोर कड़ी साबित होगा और जिम्मेदार वरिष्ठ नेता लाचार नजर आए..मुंगावली-कोलारस की जीत के बाद क्षेत्र के मतदाताओं को धन्यवाद देने से पहले सिंधिया जब प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचे तब भी उन्होंने प्रदेश के नेताओं को इंतजार कराया..इसके बावजूद समर्थक हो हल्ला करते हुए उस हॉल में दाखिल हो गए, जहां प्रेस कॉन्फ्रेंस होना थी..बाहर नारेबाजी और सिंधिया के पोस्टर कुछ और ही कहानी बयां कर रहे थे तो अंदर प्रेस कॉन्फ्रेंस के मंच पर मौजूद प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया के चेहरे की भाव-भंगिमाएं ये बता गईं कि वो तनाव में हैं..वो बात और है कि पहले अरुण यादव और बाद में खुद ज्योतिरादित्य ने समर्थकों को शांत रहने और हॉल से बाहर जाने का फरमान सुनाया, लेकिन जब बात नहीं बनी तो सिंधिया खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस बीच में रोककर कार्यकर्ताओं के बीच जा पहुंचे और उन्हें हॉल से बाहर किया, लेकिन इस बीच दीपक बाबरिया को कड़ा हस्तक्षेप करना पड़ा, जिन्होंने सिंधिया और यादव की बात अनसुनी करने पर खुद हाथ में माइक संभालकर कार्यकर्ताओं को हॉल से बाहर जाने का फरमान सुनाया.. इस दौरान सिंधिया समर्थक विधायक पूर्व विधायक मंच के इर्द-गिर्द नजर आए । प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद कांग्रेस नेता और खबरनवीस खुसुर-पुसुर करते हुए नजर आए, जिसका केंद्र बिंदु सिंधिया समर्थकों का जोश ही बना, जो ये कहते सुने गए यदि प्रदेश की लीडरशिप ज्योतिरादित्य के हाथों में सौंप दी गई तो दूसरे नेताओं पर उनके समर्थकों का हावी होना तय है..दिलचस्प बात ये है कि इस नजारे के दौरान प्रदेश के प्रवक्ता और दूसरे नेता भी असहज नजर आए..प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ज्योतिरादित्य ने भी मध्यप्रदेश खासतौर से भोपाल में अपनी मौजूदगी से जुड़े सवाल को हल्के में लेकर टाल दिया..चाहे फिर वो भोपाल में चुनाव को ध्यान में रखते हुए आवास और उन तक मीडिया की पहुंच से जुड़ा ही सवाल क्यों ना हो..सिंधिया ने ये कहकर दोनों सवालों को टाल दिया कि वो उनके दिल में रहते हैं..दरअसल मीडिया ये जानना चाहता था कि मुंगावली-कोलारस का कांग्रेस का ये हीरो कब, कैसे और कहां पर उनके लिए उपलब्ध रहेगा.. गौर करने वाली बात यह है कि दीपक बाबरिया और अरुण यादव की मौजूदगी में पूरी प्रेस कांफ्रेंस के दौरान सिंधिया ने अपनी अहमियत और धमक का एहसास जरूर कराया लेकिन उपचुनाव की जीत के बाद उनकी स्वीकार्यता पर कांग्रेस के अंदर जो समन्वय बनने की संभावनाएं बढ़ गई थी वह खुद सिंधिया के बैक फुट पर आने के बाद सवालों के घेरे में आ चुकी। वह बात और है कि ज्योतिरादित्य ने कांग्रेस में समय समय पर सौंपी गई अपनी भूमिका को असरदार तरीके से सामने रखकर यह याद दिलाने की कोशिश की कि लगातार सफलता के बाद उनकी नई भूमिका का फैसला हाईकमान को करना है ..मीडिया से सिंधिया का संवाद सार्वजनिक तौर पर एक बार फिर जरूर आत्मीयता का बोध करा गया लेकिन गिने चुने पत्रकारों तक ही । जो उनकी गुड लिस्ट में है जिनकी पहुंच उन तक नहीं है या जिन्हें वह नहीं जानते और संपर्क में नहीं उन्हें एक बार फिर निराशा हाथ लगी।