सवाल दर सवाल

नॉन स्टॉप शिवराज : नो पॉलिटिक्स, न टायर्ड न रिटायर्ड… राकेश अग्निहोत्री ‘सवाल दर सवाल’ नया इंडिया

CM-Birthday

सवाल दर सवाल, राकेश अग्निहोत्री नया इंडिया
नॉन स्टॉप शिवराज : नो पॉलिटिक्स, न टायर्ड न रिटायर्ड…
{शिवराज के एजेंडे में होंगे राज्यसभा चुनाव, भाजपा संगठन का कायाकल्प और सदन का संचालन}
व्यक्ति विशेष का जन्मदिन 59वां यानी सरकारी कर्मचारी के रिटायरमेंट की दहलीज पर और भाजपा के क्राइटेरिया 75 से बहुत पीछे शिवराज सिंह चौहान जिनके रग-रग में राजनीति भरी है.. जिनका अपना बहुआयामी व्यक्तित्व  तो जिनके अपने अंदाज … विरोधी भी उनकी पॉलिटिक्स के कायल लेकिन आडंबर, कुचक्रों और पाखंड से दूर प्रदेश के मुखिया ने अपने इस जन्मदिन  को आखिरकार यादगार और अविस्मरणीय बना ही दिया.. सोते जागते दिन-रात जिनके बारे में कहा जाता है कि वो अपने दिमाग में हमेशा सियासत का ताना-बाना बुनते रहते हैं..लगा ही नहीं कि वो चौहान कोई चक्रवर्ती सियासत का राजा, चक्रवर्ती महाराजा या कोई अपराजेय योद्धा है, जिसने हर चुनाव को गंभीरता से लिया और विरोधियों के दांत खट्टे कर दिए.. दरअसल जब  बीजेपी मिशन 2018 को लेकर एक साथ कई मोर्चों पर चिंतन-मंथन को मजबूर है तब शिवराज ने सियासत से दूर आनंद की अनुभूति और आत्मीयता का जो बोध बाल निकेतन की बच्चियों के साथ और बेसहारा बुजुर्गों के बीच पहुंचकर उन्हें कराया..उससे संदेश यही गया कि भाग-दौड़, उठा-पटक और जोड़-तोड़ की राजनीति से दूर शिवराज के लिए नो पॉलिटिक्स यानी सब कुछ राजनीति नहीं है..जन्मदिन की दूसरी व्यस्तताओं और अलग-अलग फोरम पर पूजा-अर्चना, अभिवादन, बधाइयां इन अनछुए पहलुओं की साक्षी बनी उनकी अपनी धर्मपत्नी साधना सिंह, जिन्होंने नॉन स्टॉप शिवराज के इस जज्बे को सामने लाने में बड़ी भूमिका निभाई,… जो यह साबित करता रहा कि न टायर्ड न रिटायर्ड जिंदगी में अभी और भी बहुत कुछ करना अभी भी बाकी है.. हर नई चुनौती से अनजान नहीं, लेकिन फिलहाल बेफिक्र शिवराज का इस बेशकीमती समय में वोट बैंक पॉलिटिक्स से दूर बेसहारा बच्चियों के बीच उनके रंग में रंग जाना हो या फिर बेसहारा, बुजुर्ग महिला और पुरुषों के सामने साष्टांग दंडवत कर उनका शुभाशीष और दुआओं के साथ पुण्याई के खुद को असली हकदार साबित किया..

देर रात तक राजनीति के लिए समर्पित तो सोने से पहले चिंतन-मंथन सुबह से नए फीडबैक के साथ मेल मिलाप, संवाद, समन्वय बनाकर रोज समाज के बीच किसी वर्ग विशेष की सुध लेने के लिए पहुंचना..जनता और मुख्यमंत्री के बीच किसी दीवार को बर्दाश्त नहीं करने वाले शिवराज ने अपने एक और जन्मदिन की शुरुआत यदि अर्धांगिनी साधना सिंह के साथ पूजा-अर्चना और ईश्वर के ध्यान के साथ शुरू की तो परिवार, रिश्तेदार, शुभचिंतक से मेल मिलाप का यह सिलसिला शिवराज को मुख्यमंत्री के तौर पर अधीनस्थ अधिकारियों कर्मचारियों और भाजपा के नेताओं के बीच उनकी शुभकामनाएं स्वीकार करने में बीत गया.. धीरे-धीरे प्रदेश के मुखिया को बधाई देने वालों का तांता बढ़ता चला गया..मुख्यमंत्री निवास का उनका अपना व्यक्तिगत कक्ष हो, जहां वो योगा और दिनचर्या की दूसरी जरूरी औपचारिकताओं से आगे नाश्ता कर नए एजेंडे के साथ निकल पड़ते हैं..इस जन्मदिन के मौके पर वह कहीं से भी वीआईपी नजर नहीं आए.. आवास का दरवाजा हो या फिर मुख्यमंत्री का अपना आधिकारिक कक्ष के सारे दरवाजे जन्मदिन पर खास हों या फिर आम दोनों के लिए खुले थे.. हर किसी के हाथ में गुलदस्ता, फूल और कुछ ना कुछ उपहार थे, लेकिन सभी लौटे तो शिवराज को दुआएं देकर इस बीच भी मुख्यमंत्री ने अपने अधिकारियों और भाजपा के पदाधिकारियों से बेहतर तालमेल और समन्वय बनाकर उन कार्यकर्ताओं को भी भरोसे में लिया, जो उन तक पहुंचने के लिए लंबी लाइन में तो कहीं भीड़ का हिस्सा बने अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे.. ये सब कुछ नया नहीं था.. जब भी शिवराज सिंह चौहान प्रवास पर निकलते तो ऐसे दृश्य रोज देखने को मिले..जन्मदिन पर कुछ अलग..यदि नजर आया तो वो था सलकनपुर की देवी दर्शन और समर्पण और आस्था के केंद्र बाढ़ वाले गणेश मंदिर में हर साल की तरह इस बार भी धार्मिक अनुष्ठान और नियमित पूजा-अर्चना से पहले .. शिवराज ने धर्मपत्नी साधना सिंह के साथ बाल निकेतन की बेसहारा बच्चियों और वृद्धा आश्रम में असहाय बुजुर्गों के बीच समय बिताना..इस मौके पर उनके बालसखा और भोपाल के प्रथम नागरिक महापौर सपत्नीक आलोक शर्मा की प्रभावी मौजूदगी और प्रबंधन ने मीडिया का ध्यान खासतौर से आकर्षित किया..यानि जिस शिवराज तक पहुंचने के लिए दिनभर अलग-अलग मंच और फोरम पर एक विशेष दिलचस्पी देखी गई, जो उन्हें बधाई देकर अपनी मौजूदगी एक शुभचिंतक के तौर पर दर्ज कराना चाहते थे, उस भीड़-भाड़ से दूर शिवराज और साधना सिंह को यदि सुकून कहीं मिला तो वो था बुजुर्गों का आशीर्वाद और बच्चियों का अपनापन..खास बात ये है कि बुजुर्ग हो या फिर बच्ची वो भी बेसहारा..इन्हें वोट बैंक तो कतई नहीं माना जा सकता है, फिर भी मुख्यमंत्री ने एक लंबा समय सब कुछ भूलकर इन दो वर्गों के बीच बिताया.. इस दौरान कैमरे का फोकस बने इसे शिवराज का समर्पण कहें या फिर उनके बीच में खुद को रमा लेना, जो भी नाम दो लेकिन 12 साल के इस मुख्यमंत्री ने साबित कर दिया कि सियासत में रहते हुए भी वो दूसरे राजनेताओं से यदि अलग हैं तो उसकी एक मिसाल ये भी है.. बुजुर्ग महिलाओं और बुजुर्ग पुरुषों जिसने भी शिवराज के सिर पर हाथ फेरा उन्हें आशीर्वाद दिया तो उसे गले ही नहीं लगाया, बल्कि साष्टांग दंडवत कर अपना सिर मुख्यमंत्री ने उनके चरणों में रख दिया.. जब कोई शिवराज के सम्मान में उनके गले में अंगवस्त्र डाल रहा था या फिर फूलों की माला और तिलक लगाकर आशीष दे रहा था तब शिवराज और उनकी पत्नी साधना सिंह के चेहरे के भाव गौर करने लायक थे.. बनावटी तो कतई नहीं जो अपनापन ,आत्मीयता  और अंतरंगता का  बोध करा रहे थे शायद इस जन्मदिन पर यदि सबसे ज्यादा कहीं सुकून और संतोष शिव-साधना को मिला तो वो असहाय बुजुर्गों के बीच ही मिला होगा, जिनकी दुआओं से बढ़कर कोई पुरस्कार और उपहार इस जन्मदिन के मौके पर कोई दूसरा नहीं हो सकता.. दिल को झकझोर और भावुक  कर देने वाले इन दृश्य के बीच मुख्यमंत्री भी भावुक नजर आए …तो जब उनका स्वागत बाल निकेतन की बच्चियों ने किया तो शिवराज ये भूल गए कि वो मुख्यमंत्री हैं.. सबके सिर पर हाथ रख उन्हें गले लगा लेने से आगे बढ़कर मुख्यमंत्री कभी बिल्ली तो कभी शेर-खरगोश की भाव-भंगिमाएं बनाते हुए नजर आए..यानी बुजुर्गों के प्रति जिसका समर्पण तो छोटे बच्चों के बीच खुद को उनके रूप में ढाल देना कोई शिवराज से सीखे..बतौर मुख्यमंत्री चौहान ने हर वर्ग के लिए सरकार की योजनाओं के साथ सुविधा और सहयोग का पिटारा पहले ही खोल रखा है, लेकिन कीमती समय ऐसे लोगों के बीच बिताना वो भी जन्मदिन के मौके पर ये कहने को मजबूर करती है कि कोई तो बात है शिवराज सिंह चौहान में, जिसने अपनी मेहनत और परिश्रम का लोहा मनवाया तो भाग्य, किस्मत और पुण्याई में भी उनकी ताकत में इजाफा किया है… शिवराज सिंह..शाम ढले जब वापस भोपाल लौटे तो फिर उनका सामना पार्टी के पदाधिकारियों-रणनीतिकारों से ही हुआ, जिनकी भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है, जो मुंगावली कोलारस की हार की कसक से बाहर निकलना चाहते हैं .. यतीम नई चुनौतियों को चिन्हित कर  मिशन  पूरा करने में जुट गई है..इस जन्मदिन के साथ ही शिवराज जिस मिशन 2018 की ओर अपने कदम आगे बढ़ाने को मजबूर हैं वो मंजिल फिलहाल भले ही दूर हो, लेकिन  शिवराज सिंह चौहान के लिए बड़ी चुनौती यदि विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ के नफा-नुकसान को ध्यान में रखते हुए माहौल बनाने की है तो उससे पहले उपचुनाव की हार का ठीकरा यदि प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के सिर फोड़ा जाता है तो अपने पसंदीदा नए प्रदेश अध्यक्ष की तैनाती भी सुनिश्चित कराना बड़ी चुनौती के तौर पर सामने है..इस बीच मध्यप्रदेश से राज्यसभा की 4 सीटें जो भाजपा के खाते में जाना हैं उसके जरिए भी चुनाव की बिसात बिछाना बड़ी जरूरत के तौर पर सामने है तो तो विधानसभा  का सत्र  अभी  सामने है..इस जन्मदिन के साथ अभी विधानसभा के फ्लोर पर भी शह और मात के खेल खेला जाना बाकी हैं..कह सकते हैं कि इस जन्मदिन को यादगार और कुछ अलग साबित कर शिवराज को अब सही मायने में अपने लंबे सियासी अनुभवों का उपयोग करना होगा..
अलग से बॉक्स
बच्चों को दुलारा तो बड़ों से लिया आशीष
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने सुबह आराध्य देवों की प्रार्थना के साथ अपने दिन की शुरुआत की..इसके बाद चौहान दोपहर में स्थानीय बाल निकेतन पहुंचे और वहां अनाथ बच्चों के बीच अपने जन्मदिन की खुशियां बांटीं.. उन्होंने बच्चों के साथ केक काटा और उन्हें चादरें तथा मिठाई वितरित की.. चौहान ने कहा कि बाल निकेतन जैसी संस्थाओं में पढ़ने वाले बच्चों को यदि मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज अथवा अन्य किसी उच्च शिक्षा संस्थाओं  में प्रवेश मिलता है, तो उनकी शिक्षा का पूरा खर्च सरकार उठाएगी.. बच्चों ने मुख्यमंत्री की दीर्घायु की कामना की और उन्हें गुलदस्ते भेंट किये.. बच्चों के आग्रह पर शिवराज सिंह चौहान और साधना सिंह चौहान ने ‘बच्चे मन के सच्चे’ गीत गाया.. बच्चों ने आदिशक्ति को समर्पित भजन सुनाये.. वो शाहजहाँनाबाद स्थित वृद्ध आश्रम ‘आसरा’ पहुंचे और बुजुर्गों से आशीर्वाद प्राप्त किया.. मुख्यमंत्री ने वृद्धजनों के बीच कुछ आत्मीय क्षण बिताये.. उन्होंने ‘आसरा’ आश्रम में बुजुर्गों की सेवा के लिये वाहन उपलब्ध कराने की घोषणा करते हुए कहा कि बुजुर्गों को बेसहारा नहीं रहने देंगे.. उन्होंने बताया कि जो बेटे सरकारी सेवा में  और अपने माता-पिता का पालन-पोषण करने की जिम्मेदारी उठाने से बच रहे हैं, उनके वेतन में से उनके माता-पिता को पैसे देने की व्यवस्था की गई है.. चौहान ने बताया कि मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना जैसी धार्मिक योजना बनाई गई है.. उन्होंने कहा कि बुजुर्ग समाज की पूंजी हैं, ईश्वर तुल्य हैं, उनकी सेवा मानवता की सच्ची सेवा है..