सवाल दर सवाल

सत्ता के लड्डू खाना तो तिल-गुड़ लेकर घर-घर जाओ… राकेश अग्निहोत्री सवाल दर सवाल “नया इंडिया

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सवाल दर सवाल.. राकेश अग्निहोत्री

सत्ता के लड्डू खाना तो तिल-गुड़ लेकर घर-घर जाओ…

*शिवराज सरकार के लिए भागवत संदेश, सिर्फ प्रवचन नहीं कुछ करके दिखाओ
*, चिंता उस वर्ग की जो सियासी समीकरण बिगाड़ सकता है
* गुजरात महाराष्ट्र का नाम बिना किए चिंता मध्य प्रदेश की ..
सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि केवल प्रवचनों से काम नहीं चलेगा, कुछ करके दिखाना होगा..इसके लिए जरूरी है कि सभी संप्रदायों का सम्मान और जात-पात का भेदभाव दूर हो..एकात्म यात्रा का मकसद सर्वत्र मैत्री, सर्वत्र समरसता जैसी दुनिया जैसा भव्य भारत खड़ा करना है..विवेकानंद जयंती पर संकल्प लो और मकर संक्रांति के मौके पर तिल-गुड़ लेकर सब्जी वाले, कपड़े धोने वाले, जूते ठीक करने वाले जैसे उपेक्षित और विकास से दूर लोगों के घर पहुंचो..यह सिलसिला रक्षाबंधन से लेकर दीपावली तक चलना चाहिए, जिससे समाज में वैमनस्य और दूरियां खत्म हों..सरसंघचालक मोहन भागवत ने यह सलाह देने से पहले मंच के सामने बैठे लोगों से सवाल कर पूछा कि क्या आपने मुख्यमंत्री की बात सुनी और समझी..
एकात्म यात्रा में शामिल हुए सरसंघचालक ने स्पष्ट तौर पर कहा कि संदेश बोल के नहीं दिया जाता है, काम करके दिया जाता है..उन्होंने कहा कि एक सवाल पूछता हूं आपसे आपको उत्तर देना है..जो आपके मुख्यमंत्री ने कहा आपको समझ आया है..यदि आया है तो जवाब देना..फिर उन्होंने अपनी बात कही जिसमें संदेश सिर्फ मुख्यमंत्री, वहां मौजूद लोगों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे भारत के लिए छुपा था.. ऐसे में सवाल खड़ा होना लाजमी है कि सरसंघचालक मोहन भागवत ने संघ की समन्वय बैठक के दौरान जब मध्य प्रदेश में चुनावी माहौल परवान चढ़ रहा है तब प्रवचन और भागों से आगे कुछ नया कर दिखाने की सलाह क्यों दी और इसमें किस के लिए संदेश छुपा है।

मौका एकात्म यात्रा जो आदि शंकराचार्य पर केंद्रित तो सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपने चिरपरिचित अंदाज में एक कहानी सुनाकर वहां मौजूद लोगों का आव्हान किया कि मकर संक्रांति पर कुछ ऐसा करो जिसमें पिछड़े, गरीब, दलित वर्ग को अपनत्व का एहसास हो और जाति, धर्म, वर्ग, समुदाय के बीच मतभेद खत्म हो..सरसंघचालक ने संदेश यही दिया कि समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए कुछ करना होगा सिर्फ भाषण से कुछ नहीं होगा.. भागवत ने यह बात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में कही, जिसके कयास यह निकाले गए कि मध्यप्रदेश में अभी बहुत कुछ करना बाकी है..यदि इस भागवत संदेश के तार देश में बने माहौल से जोड़कर देखे जाएं तो निश्चित तौर पर संघ की चिंता दलित और पिछड़े वर्ग के एजेंडे से जुड़ी नजर आई..यह बात इसलिए और पक्की हो जाती है क्योंकि महाराष्ट्र में भड़की दलित हिंसा के बीच संघ उज्जैन बैठक के दौरान सफाई देने के लिए मनमोहन वैद्य को आगे लाया था..उस वक्त आरोप-प्रत्यारोप के बीच में कांग्रेस, संघ और मोदी विरोधी नेतृत्व के इर्द-गिर्द सियासत जोरों पर थी.. इस बीच प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के उत्तराधिकारी की तलाश को लेकर भी कयासबाजी जोरों पर है.. अमित शाह के उज्जैन दौरे के दौरान संघ नेताओं का मंथन और शिवराज की मौजूदगी यदि मायने रखती है तो इस बैठक के बाद उमा भारती काफी उज्जैन पहुंचकर सरकार्यवाह भैयाजी जोशी से मुलाकात और फिर नागपुर जाकर सरसंघचालक से उनकी चर्चा ने भाजपा की अंदरूनी राजनीति गरमा रखी है। जहां तक बात एकात्म यात्रा की है तो अमरकंटक में आदि शंकराचार्य की मूर्ति स्थापित किए जाने की योजना पर शिवराज सरकार आगे बढ़ चुकी है..जिसमें शामिल होने के लिए आमंत्रण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी भेजा गया है..पूरे प्रदेश में इस यात्रा के जरिए सहयोग मांग कर संदेश दिया जा रहा है..मकसद सियासी तौर पर शंकराचार्य दर्शन के तहत सभी को जोड़ना और सभी की सुध लेकर वर्ग विशेष की नाराजगी को दूर करना ही है..नर्मदा यात्रा के बाद शिवराज खुद इस यात्रा में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं, जिसे मिशन 2018 में सियासत से आगे सामाजिक सरोकार से भी जोड़कर देखा जा रहा है..यात्रा के विदिशा पड़ाव से पहले भोपाल में करीब आधे घंटे की सरसंघचालक से शिवराज की चर्चा हो चुकी थी तो उधर मध्यप्रदेश की समन्वय बैठक की अगुवाई खुद सरसंघचालक कर रहे हैं..इस बैठक में दूसरे कुछ लोग कुछ लोग समवैचारिक संगठनों के साथ भाजपा के प्रतिनिधि भी मौजूद हैं..मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भी इसमें शामिल होने की चर्चा है..सरसंघचालक की बात को मशविरा, हिदायत जो भी कहें, लेकिन इसे यदि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार-भाजपा को जगाने और जनता को उसका दायित्व समझाने के साथ नीति निर्धारकों के लिए चेतावनी माना जाए तो शायद गलत नहीं होगा..क्योंकि यदि सरकार के काम-काज, उसकी दशा-दिशा से सरसंघचालक पूरी तरह संतुष्ट होते तो शायद इस मौके पर पीड़ित, शोषित, दलित वर्ग के बीच जाकर उन्हें सम्मान देने की बात नहीं करते, वह भी तब जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर दूसरे नेताओं में दलित वर्ग के घर जाकर भोजन करने की खबरें देखने और सुनने को मिलती रहती हैं..यहीं पर सवाल खड़ा होता है कि क्या मिशन 2018 को ध्यान में रखते हुए इस वर्ग विशेष के मतदाताओं के समर्थन को लेकर संघ चिंतित है। और उसने बहुत कुछ सीधे तौर पर तो इशारों में यह संदेश दे दिया है कि समय रहते इस उपेक्षित वर्ग के विकास के लिए सिर्फ घोषणाएं नहीं बल्कि उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जाए..यह वह वर्ग है जिसके जातीय समीकरण सोशल इंजीनियरिंग के नाम पर राजनीतिक दल नफा-नुकसान देखकर फैसले लेते हैं..फिलहाल मुंगावली-कोलारस विधानसभा उपचुनाव में हर वर्ग, समाज के सम्मेलन इस ओर इशारा करते हैं कि चुनाव जीतने के लिए इनका समर्थन जरूरी है..प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गुजरात चुनाव के बाद जातीय राजनीति को बढ़ावा देने पर चिंता जता चुके हैं, तो आदि शंकराचार्य से जुड़ी इस एकात्म यात्रा के एजेंडे को समझना होगा जिसे अभी तक संघ का एजेंडा माना जा रहा था जिसकी आड़ में समाज के हर वर्ग का समर्थन खासतौर से दलित, आदिवासी, पिछड़े, उपेक्षित वर्ग को साधने के साथ सवर्ण को भरोसे में लेने की कोशिश की जा रही है.. निश्चित तौर पर भागवत संदेश के बाद इस यात्रा का स्वरूप बदला हुआ नजर आएगा..कम से कम अगले एक हफ्ते के दौरान तो खासतौर से जब मुख्यमंत्री और भाजपा के दूसरे बड़े नेता उपेक्षित वर्ग के बीच पहुंचेंगे तो निश्चित तौर पर भाजपा और संघ के दूसरे कार्यकर्ता और स्वयं सेवकों के लिए भी इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेना जरूरी हो जाएगा..ऐसे में यदि इसके सियासी अर्थ निकाले जाएं तो साफ तौर पर भागवत संदेश 14 साल पूरे कर चुकी भाजपा सरकार के लिए है, जिसके खाते में उपलब्धियों की भरमार का दावा किया जाता है। जिसके दम पर वह चौथी बार सरकार बनाने को लेकर आत्मविश्वास से लबरेज नजर आ रही है तो उसे शायद भागवत ने यह कहकर आईना दिखाया है कि भाषण-प्रवचन से कुछ नहीं होगा कुछ करना होगा । संघ की मंशा साफ तौर पर भजपा को आत्ममुग्धता से दूर जगाने के साथ इसे मिशन के तौर पर लिया जाए। तभी मध्यप्रदेश में भाजपा के अच्छे दिन बरकरार रहेंगे..यह कहना गलत नहीं होगा कि गुजरात चुनाव में जिन 3 लड़कों ने सोशल इंजीनियरिंग के आधार पर मोदी और शाह की परेशानी बढ़ाई कम से कम मध्यप्रदेश में यदि ऐसे हालात नहीं पैदा होने देना है तो घर-घर भाजपा और स्वयंसेवकों को जाना होगा। जिससे मतभेद और दूरियां खत्म हों..भागवत ने एकात्म यात्रा के मंच से संदेश भले ही गैर सियासी तौर पर दिया हो लेकिन चुनावी साल 2018 को ध्यान में रखते हुए इसे भाजपा को गंभीरता से लेना होगा..क्योंकि शिवराज सरकार की उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार में भाजपा संगठन की भूमिका सवालों के घेरे में है और इसका नतीजा सूचना तंत्र के विफल होने के साथ किसान आंदोलन के तौर पर सामने आ चुका है..अब जबकि गुजरात से लेकर महाराष्ट्र और दूसरे राज्यों में वर्ग विशेष के युवा नेता सक्रिय हो रहे हैं तब संघ की चिंता मध्यप्रदेश में बढ़ना लाजमी है तो भागवत संदेश का सार यही है कि यदि सत्ता के लड्डू फिर खाना है तो तिल-गुड़ लेकर उन घरों में पहुंचें जिसकी अपेक्षाएं सरकार से हैं और उस कर्तव्य को निभाना जरूरी है..