सवाल दर सवाल

‘सिंधिया’ के ‘चेहरे’ पर ‘यादव’ ने डाला ‘पर्दा’! राकेश अग्निहोत्री “सवाल दर सवाल” नया इंडिया

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सवाल दर सवाल राकेश अग्निहोत्री
सिंधिया’ के ‘चेहरे’ पर ‘यादव’ ने डाला ‘पर्दा’!
(अरुण-अजय की जोड़ी नाथ-सिंधिया की राह में बने रोड़ा)

मध्य प्रदेश कांग्रेस में सीएम का चेहरा प्रोजेक्ट किए जाने की मांग पर नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के बाद अरुण यादव ने भी एक बार फिर अध्यक्ष बनने के साथ पूर्ण विराम लगा दिया है।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की एक और नई पारी के आगाज के साथ ही अरुण यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस किसी चेहरे को प्रोजेक्ट नहीं करेगी..चाहे फिर वह ज्योतिरादित्य सिंधिया ही क्यों न हों..यादव ने विधानसभा चुनाव राहुल गांधी की अगुवाई में जीतकर दिखाने का भरोसा जताया है..अरुण यादव ने नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह द्वारा खड़े किए गए इस सवाल को आगे बढ़ाया है, जिसमें उन्होंने कुछ दिन पहले परंपरा का हवाला देकर मध्यप्रदेश में किसी एक नेता पर दांव लगाने की संभावना से इनकार कर दिया था..अरुण यादव का यह बयान उस वक्त सामने आया है, जब कुछ दिन पहले ही उन्हें अध्यक्ष की भूमिका में आगामी आदेश तक कंटिन्यू रखने का फरमान राष्ट्रीय नेतृत्व जारी कर चुका है..ऐसे में सवाल खड़ा होना लाजमी है कि जब ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने संसदीय क्षेत्र के दो विधानसभा उपचुनाव में भाजपा के चक्रव्यूह में उलझे हैं तब उन्हें जो ताकत राष्ट्रीय नेतृत्व और प्रदेश नेतृत्व से मिलना चाहिए वह उन्हें मिलना तो दूर शायद सीएम इन वेटिंग की दौड़ से भी उन्हें बाहर किया जा रहा है..
अरुण यादव की गिनती कांग्रेस के लो प्रोफाइल नेता और सबको साथ लेकर आगे बढ़ने वाले उन गिने-चुने नेताओं में होती है, जो सबकी सुन लेते हैं और करते वही हैं, जिसका इशारा राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से मिलता है..इससे पहले अजय सिंह को कांग्रेस मध्य्प्रदेश में बतौर नेता प्रतिपक्ष दूसरी बार बड़ी जिम्मेदारी सौंप चुका है।अब तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए अरुण को फिर प्रदेश की कमान सौंपी है।इन दिनों अरुण लाठी रैली में मुख्य मंत्री प्रोजेक्ट करने की मांग को ले कर खुद सुर्खियों में है।नई जिम्मेदारी संभालते ही यादव के सुर भी बदल गए है।जिन्हीने कांग्रेस में चेहरे को प्रोजेक्ट किये जाने को 50 साल की परंपरा का हवाला देकर नकार दिया।अरुण यादव अपनी टीम के पुनर्गठन का इशारा कर चुके हैं तो सामूहिक नेतृत्व में चुनाव की रणनीति बनाने पर उन्होंने फोकस कर दिया है..अरुण यादव से जब सवाल पूछा गया कि क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया पार्टी का चेहरा विधानसभा चुनाव 2018 में हो सकते हैं तो उन्होंने बिना समय गंवाए यह कहकर इस मुद्दे को खारिज कर दिया कि वह पहले भी कई बार यह कह चुके हैं कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की परंपरा साथ मिलकर चुनाव लड़ने की रही है..चाहे फिर वह ज्योतिरादित्य हों या कमलनाथ से जुड़े दावे को उन्होंने हवा में उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी..अलबत्ता नर्मदा परिक्रमा पर निकले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की तारीफ में जरूर कसीदे पढ़कर यह स्पष्ट कर दिया कि धार्मिक यात्रा के बाद उनकी राजनीतिक यात्रा से मध्यप्रदेश में कांग्रेस मजबूत होगी..चुनाव जीतने के लिए गठबंधन की राजनीति चाहे फिर वह बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी और दूसरे दलों के साथ वक्त की जरूरत हो, लेकिन इस पर सोच-समझकर ही कोई रणनीति तैयार की जाएगी..युवा चेहरों के तौर पर सामने आए जिग्नेश, अल्पेश, हार्दिक पटेल जैसे नेताओं पर भी अरुण यादव की पैनी नजर है..उन्होंने खुद को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट किए जाने के सवाल पर भी आश्चर्य व्यक्त किया और कहा कि वह एक कार्यकर्ता के तौर पर पिछले 4 साल से मध्यप्रदेश में पार्टी के लिए काम कर रहे हैं और आगे भी इसी तरह करते रहेंगे.. अरुण यादव ने पार्टी छोड़ कर गए उन नेताओं को जरूर यह संदेश दे दिया कि जिन्होंने कांग्रेस की पीठ में छुरा घौंपा है अब उनकी वापसी की संभावना दूर-दूर तक नहीं होगी..सोनिया गांधी की टीम में बतौर प्रदेश अध्यक्ष अपनी भूमिका से संतुष्ट नजर आए अरुण यादव का कहना है कि राहुल गांधी की टीम कांग्रेस को एक नई ऊंचाई पर जरूर ले जाएगी..अरुण यादव के इस बयान से सवाल यह खडा हो गया क्या प्रदेश की राजनीति से जुड़े अरुण और अजय कदमताल कर सिंधिया और नाथ की सीएम इन वेटिंग की दावेदारी की हवा निकाल दी है।ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि राहुल की नई स्क्रीप्ट में सिंधिया और नाथ नई भूमिका की होगी।अब तो मध्य्प्रदेश में ओबीसी का सीएम अरुण को प्रोजेक्ट करने की मांग जोर पकड़ रही। जहां तक बात मध्य प्रदेश में कांग्रेस के अंदर किसी को पीएम इन वेटिंग यानी चेहरा प्रोजेक्ट किए जाने की अटकलों की है तो दो बड़े नेताओं नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मीडिया के मार्फत ही सही ऐसी किसी आवश्यकता से साफ इंकार कर दिया अजय और अरुण के बयान ने सबसे बड़े दावेदार ज्योतिरादित्य सिंधिया के चेहरे पर पर्दा डालने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। देखना होगा राहुल गांधी की नई पटकथा में क्या कोई मोड़ ऐसा देखने को मिलेगा जब सिंधिया के चेहरे पर डाला गया पर्दा हटाया जाएगा.. क्योंकि अरुण यादव ने तो दो कदम आगे बढ़कर चुनाव के बाद ही किसी चेहरे पर अंतिम फैसला लिए जाने की बात राहुल गांधी पर छोड़ दी है।