सवाल दर सवाल

“यशवंत सिन्हा” के निशाने पर होगा “शिव-राज” राकेश अग्निहोत्री “सवाल दर सवाल” नया इंडिया

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सवाल दर सवाल..राकेश अग्निहोत्री
“यशवंत सिन्हा” के निशाने पर होगा “शिव-राज”
(मालवा के बाद महाकौशल में किसान आंदोलन की सुगबुगाहट)

भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा जिनके निशाने पर मोदी सरकार पहले से ही है, अब वो शिवराज के राज पर सवाल खड़े करते हुए नजर आएंगे..केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों की मुखालफत कर सवाल खड़े कर रहे यशवंत सिन्हा पिछले दिनों भाजपा शासित महाराष्ट्र में भी किसानों के समर्थन में धरने पर जाकर बैठ गए थे..यशवंत सिन्हा बुधवार को जबलपुर पहुंच रहे हैं..जो बाद में गाडरवारा के पास मुआवजे की मांग को लेकर धरने पर बैठे किसानों की आवाज को अपना समर्थन देंगे..इस प्रदर्शन में पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री सोमपाल शास्त्री के भी शामिल होने की संभावना है..ऐसे में सवाल खड़ा होना लाजमी है कि भाजपा से जुड़े इन नेताओं ने यदि किसानों के समर्थन में मोदी से लेकर शिवराज सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है तो क्या यह मान लिया जाए कि इससे मध्यप्रदेश में चर्चित मंदसौर गोलीकांड के बाद ठंडा हुआ किसान आंदोलन एक बार फिर आने वाले समय में उग्र रूप अख्तियार कर सकता है..

मालवा के बाद महाकौशल में किसान की आवाज बुलंद करने के लिए अब भाजपा के ही दिग्गज नेता यहां पहुंच रहे हैं।वह भी तब जब मध्यप्रदेश में इन दिनों जब अति विशिष्ट लोगों का जमावड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है। खासतौर से संघ की लगातार बैठकों का दौर चल रहा ..तब किसानों के समर्थन में भाजपा के दो राष्ट्रीय नेताओं यशवंत सिन्हा और सोमपाल शास्त्री के खुलकर सामने आने को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है..संघ की पहले दौर की बैठक उज्जैन में हो चुकी और अब मध्यप्रदेश की समन्वय बैठक में शामिल होने के लिए खुद सरसंघचालक मोहन भागवत एक बार फिर विदिशा पहुंच रहे हैं। जिसमें मालवा और मध्य भारत के साथ उस महाकोशल के भी प्रतिनिधि मौजूद होंगे जहां किसान पिछले कई दिनों से धरने पर बैठे हैं।इधर विदिशा में किसान आंदोलन से लेकर भावांतर योजना के साथ दूसरे मुद्दों पर फीडबैक संघ द्वारा लिया जा सकता है..तब एक दिन पहले देश के पूर्व वित्त और पूर्व कृषि मंत्री महाकौशल के एनटीपीसी प्लांट से जुड़े उन किसानों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन करते हुए नजर आएंगे..यह वह किसान हैं, जिनकी संख्या लगभग 250 है और जिन्होंने अपनी जमीन एनटीपीसी प्लांट के लिए दी थी, लेकिन अभी तक उन्हें मुआवजा राशि नहीं मिली है, जबकि प्लांट का 75 फीसदी से ज्यादा का काम पूरा हो चुका है..यह किसान 22 दिसंबर से प्लांट के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं और निर्माण कार्य ठप हो चुका है..इस आंदोलन के पीछे शिवकुमार शर्मा का राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ सक्रिय भूमिका निभा रहा है, जिसने अब पुनर्वास नीति पर सवाल खड़े किए हैं..खबर आ रही है कि मुंबई से रवाना होकर पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा पहले सीधे जबलपुर पहुंचेंगे, जहां मीडिया से चर्चा कर अपनी बात रखेंगे और बाद मेंदूसरे दिन गाडरवारा का रुख करेंगे, जहां किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं..पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री सोमपाल शास्त्री के भी यहां पहुंचने के संकेत मिले हैं.. किसान आंदोलन के मामले में शरद यादव से लेकर राहुल गांधी और हार्दिक पटेल ही नहीं, देश के दूसरे संगठनों ने पहले ही मंदसौर का रुख किया था, लेकिन यह पहला मौका होगा जब भाजपा के अंदर से वरिष्ठ नेता जिनकी गिनती भले ही मोदी विरोधी नेताओं में होती है, लेकिन मध्यप्रदेश में किसानों को उनका हक दिलाने के लिए शिवराज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए नजर आएंगे.. क्षेत्र विशेष की समस्या से जुड़े किसानों की संख्या भले ही सीमित हो, लेकिन यदि यह आंदोलन क्षेत्र से बाहर दूसरे इलाके तक पहुंचता है तो निश्चित तौर पर शिवराज सरकार के लिए यह शुभ संकेत नहीं होगा..शिवराज की दूरदर्शिता के चलते किसान आंदोलन भले ही ठंडा पड़ गया हो, लेकिन भावांतर को लेकर अभी भी विपक्ष की भूमिका निभा रही कांग्रेस सवाल खड़े कर रही है..तो किसान भी कहीं न कहीं संतुष्ट नजर नहीं आ रहा, लेकिन यदि यशवंत सिन्हा और सोमपाल शास्त्री जैसे नेता मध्यप्रदेश के किसान नेता शिवकुमार शर्मा के साथ खड़े नजर आते हैं तो इसे नजरअंदाज करना सरकार के लिए शायद ठीक नहीं माना जाएगा.. किसानों के लिए शिवराज और उनकी सरकार ने बहुत कुछ किया लेकिन इसके बावजूद पिछले साल आंदोलन भड़क गया था और अब भावांतर योजना के जरिए किसानों के खाते में सीधे कैसे पहुंचाए जा रहे हैं। पिछले दिनों किसान जब आंदोलित थे तब शिवकुमार शर्मा ने दिल्ली पहुंचकर देश के दूसरे संगठनों को भी एकजुट कर दिया था..एक बार फिर अन्ना हजारे की मौजूदगी में यही संगठन दिल्ली घेरने का कार्यक्रम बना रहे हैं..जहां तक बात मध्यप्रदेश में ठंडे पड़ चुके किसान आंदोलन की है तो गाडरवारा से यदि भाजपा सरकार की कृषि नीति के साथ उद्योग नीति और पुनर्वास नीति पर सवाल खड़े किए जाएं तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए..यह विरोध प्रदर्शन भले ही महाकौशल क्षेत्र तक सीमित हो, लेकिन यह समय भाजपा और उसकी सरकार के लिए अच्छा नहीं है.. पुनर्वास मुआवजे की मांग को लेकर प्रदेश में अलग-अलग किसानों की समस्या किसी से छुपी नहीं है। एक ओर सरसंघचालक मोहन भागवत खुद संघ वैचारिक संगठनों से जनता की सरकार से अपेक्षाओं को लेकर फीडबैक ले रहे होंगे तो दूसरी ओर मुंगावली और कोलारस विधानसभा के उपचुनाव की तारीख का ऐलान कभी भी किया जा सकता है..यशवंत सिन्हा की गिनती निश्चित तौर पर मोदी सरकार बनने के बाद उनके विरोधी खेमे के नेताओं में होती है, जिनके तार भाजपा के मार्गदर्शक मंडल से जुड़े हैं.. पिछले दिनों किसानों के समर्थन में महाराष्ट्र में यशवंत सिन्हा आमरण अनशन पर बैठ गए थे तब शीर्ष नेतृत्त्व को हस्तक्षेप करना पड़ा था। मोदी और शाह की सरकार भले ही यशवंत सिन्हा के इस विरोध प्रदर्शन को गंभीरता से ना लें लेकिन शिवराज और उनकी सरकार को उन मुद्दों की ओर जरूर ध्यान आकर्षित करना होगा जिसे हवा देने के लिए यशवंत सिन्हा यहां पहुंच रहे हैं। मध्य प्रदेश दूसरे राज्यों की तुलना में फिलहाल शांत है और मंदसौर गोलीकांड के बाद भी मामला ठंडा पड़ चुका है ।वह भी तब जब महाराष्ट्र में दलित हिंसा से आक्रोश दिल्ली तक जा पहुंचा है और नए-नवेले नेता एक अलग माहौल देश में बना रहे बात यहीं खत्म नहीं होती बल्कि भाजपा जिसकी केंद्र से लेकर ज्यादातर राज्यों में सरकार है उसे ध्यान रखना होगा कि लोकपाल की मांग को लेकर अन्ना हजारे एक बार फिर सक्रिय होने जा रहे हैं तो अलग-अलग मुद्दों पर अलग-अलग राज्यों और अलग-अलग क्षेत्रों में नई पीढ़ी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में है। फिलहाल भाजपा के लिए मध्य प्रदेश में संतोष देने वाली बात यह कि नेतृत्व संकट से जूझ रही कांग्रेस सड़क की लड़ाई के लिए अभी तक मानस नहीं बना पाई है। तो आम आदमी पार्टी से लेकर बहुजन समाज पार्टी के नेताओं ने मध्यप्रदेश की थाह लेने की जरूर कोशिश की लेकिन शिवराज और उनकी सरकार के खिलाफ किसी भी क्षेत्र में कोई बड़ा आंदोलन भाजपा के लिए अभी तक सिर दर्द नहीं बन पाया है।


पूर्व केन्द्रीय मंत्री और सांसद यशवंत सिन्हा मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में होने वाले किसान आंदोलन में शामिल होंगे..NTPC प्रोजेक्ट गाडरवारा, नरसिंहपुर में जिन किसानों की जमीन प्रोजेक्ट में रोजगार देने का वादा करके ली गई थी, उन किसानों को स्थाई रोजगार देने की मांग को लेकर राष्ट्रीय किसान मज़दूर संघ 22 दिसम्बर से अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन कर रहा हैं..किसानों द्वारा प्रोजेक्ट पर काम भी बंद करा दिया गया है. इसी किसान आंदोलन में भाग लेने के लिए पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा 10 जनवरी को शाम 4:30 फ्लाइट से जबलपुर पहुंचेंगे..शाम 6 बजे सर्किट हाउस में राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा कक्काजी के साथ संयुक्त पत्रकार वार्ता करेंगे. अगले दिन 11 जनवरी को दोपहर 11 बजे NTPC पर चल रहे धरना स्थल पर पहुंच कर सभा को संबोधित करेंगे..