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धीमा पड़ा मानसून, मध्यप्रदेश में 8 से 10 दिन तक लेट होने का अनुमान

Moderate monsoon

भोपाल। मानसून आने की आस लगाए बैठे लोगों के लिए बुरी खबर है। मप्र से लगे छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में प्रवेश करने के बाद अरब सागर से चला मानसून आगे नहीं बढ़ पा रहा है। अरब सागर में वैदर सिस्टम सक्रिय नहीं होने से मानसून को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल रही है। मौसम विभाग के अनुसार अब मानसून के लिए आठ से दस दिन और इंतजार करना पड़ सकता है। लेकिन इस दौरान प्री-मानसून एक्टीविटी होती रहेंगी। करीब एक सप्ताह पहले मौसम विभाग ने प्रदेश में मानसून आने की संभावना व्यक्त की गई थी।

– मौसम केंद्र के वैज्ञानिक अजय शुक्ला ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने शनिवार को कोंकण का अधिकांश भाग,मध्य महाराष्ट्र का कुछ और हिस्सा, मराठवाड़ा, विदर्भ, छत्तीसगढ़, उड़ीसा के कुछ हिस्सों में प्रवेश कर लिया था। लेकिन उसके बाद वह स्थिर हो गया है।

– अरब सागर में फिलहाल मानसूनी गतिविधियां सुस्त पड़ी हैं। इससे मानसून को आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त एनर्जी नहीं मिल पा रही है। उधर बंगाल की खाड़ी में एक अवदाब का क्षेत्र बना है। लेकिन उसका रुख बांग्लादेश की तरफ होने की संभावना है।

ऐसे पता चलता है मानसून आ गया

– करीब तीन किमी ऊपर हवा में 90 फीसदी नमी होनी चाहिए।

– मौजूदा हवा का रुख बदलकर दक्षिण-पश्चिमी होना चाहिए।

– एक या दो दिन लगातार ज्यादा मात्रा में पानी बरसना चाहिए।

दक्षिण-पूर्वी मप्र में पहुंचकर अटक सकता है मानसून

– मौसम एक्सपर्ट एसके नायक ने कुछ दिन पहले संभावना जताई थी कि मानसून दक्षिण पूर्व शहडोल, अनूपपुर, डिंडोरी, बालाघाट और सिवनी में पहुंच सकता है। इसके बाद यह अटक सकता है। और हुआ भी ऐसा ही।

इसकी दो बड़ी वजह

पहली:बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र यानी लो प्रेशर सिस्टम बन गया है, उसके और स्ट्रांग होने की संभावना है। इसके डिप्रेशन बदलने की संभावना है। यह सिस्टम मप्र के लिए फायदेमंद नहीं है। इसकी वजह यह है कि यह पश्चिम बंगाल के उत्तर पश्चिमी हिस्से में या ओडिशा में मैदानी इलाकों में पहुंचकर विलुप्त हो जाएगा।

दूसरी:मौसम विभाग के पूर्वानुमान बताने वाले ज्यादातर मॉडल के अनुसार अगले दो हफ्ते तक हिंद महासागर में बड़ा सिस्टम बनने की संभावना नहीं है। इसीलिए मानसून के आगे बढ़ने की संभावना कम है।