मीडिया मिर्ची

पत्रकार साहब का ‘लोचासन’ – ‘अकडासन’

ashish choubey

– आशीष चौबे
बहुत दिनों बाद जनसंपर्क संचानालय जाना हुआ | इस ओर जाने में ही फुरफुरी आ जाती है लेकिन कुछ आवश्यक काम था तो रुख करना ही पड़ा | लौटते वक्त अचानक एक बड़े पत्रकार से साहब से भेंट हो गई | फुर्सत में हम भी थे और शायद वो भी ! औपचारिक दुआ सलाम के बाद चर्चा आगे बढ़ी तो चुनावी मौसम के मद्देनजर मैं पूछ बैठा …|
‘सर…चुनाव की तैयारियां में क्या कुछ खास ?
मेरा सीधा आशय ..इलेक्शन प्रोग्राम को लेकर था …लेकिन पत्रकार साहब ने इस पर कोई रूचि न दिखाई बल्कि बोले …’यार ..प्रोग्राम तो ठीक ..मगर कुछ खास करना है इस बार..’
बात जब तक दिमाग में बैठती तब तक अचानक एक गाडी मुख्य द्वार के अंदर घुसी | ‘आशीष ..बस दो मिनिट’ ….कहकर पत्रकार साहब गाडी की ओर लपक लिये | कुछ ऐसे अंदाज में जैसे कि ड्राइवर ..मालिक के आते ही गाडी के गेट खोलने के लिये लपक पड़ता है |
मै दूर खड़ा देख रहा था | साहब बहादुर अकड़े खड़े थे और पत्रकार साहब एक दम पहली कक्षा के छात्र के माफिक हाथ बांधे | चेहरे पर असमंजस के भाव लपक झपक हो रहे थे | झुककर कमर इतनी लोच खा रही थी कि लग रहा था कि मीडिया की यह शख्सियत ‘लोचासन’ कर रही हो | चंद मिनिट की बात के बाद पत्रकार साहब के चेहरे पर आशा के भाव उमड़े | साहब बहादुर अचानक तेज़ आवाज में बोले जो मेरे कानो तक आ धमकी …’ठीक है ..कुछ जमाते हैं’
इस जुमले के साथ ही साहब बहादुर अपनी गुफा की ओर बढ़ गये | पत्रकार साहब ..वापिस अपनी ठसक ओढ़ कर आ खड़े हुये |
‘अरे यार …कई दिनों से बोल रहे थे ..आ जाओ कुछ बात करना है ..व्यस्तता के चलते समय ही नही मिल पा रहा था ..तो आज सोचा मिल लूं ‘
बिना पूछे ही पत्रकार साहब ने अनावश्यक स्पष्टीकरण मुझे पकड़ा दिया ..जिससे मुझे कोई लेना देना न था …सीधी बात है ..आपके समीकरण आपके गुणा भाग ..आप जानो ..|
लेकिन जिसको थोड़ी देर पहले ‘लोचासन’ करते देखा हो उसको अब ‘अकडासन’ करते देख अजीब लग रहा था ..|
यही हक़ीकत है …तभी नेता,अफसर हावी है और उफ्फ्फयह .. मीडिया लोटपोट हो रहा है ..|
खैर ..सबकी जय जय …….