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SC/ST एक्ट का विरोध कौन कर रहा है?

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केंद्र सरकार की ओर से अभी हाल ही में पारित संशोधित अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) कानून (एससी/एसटी एक्ट) के विरोध में देश के कई राज्यों में सवर्णों से जुड़े सामाजिक संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. मध्य प्रदेश, यूपी, राजस्थान में तो केंद्र सरकार के मंत्रियों और बीजेपी सांसदों तक को लोगों के इस विरोध का सामना करना पड़ रहा है.

बीती 10 अगस्त को पटना में इस कानून के विरोध में प्रदर्शन हुआ था, वहीं 4 सितंबर को कर्मचारियों के संगठन सपाक्स ने ग्वालियर में, जबकि परशुराम सेना ने जयपुर के रामलीला मैदान में बड़ी रैली बुलाई है. बता दें कि 2 अप्रैल को SC/ST के भारत बंद के दौरान ग्वालियर में ही हिंसा हुई थी, जिसमें 4 लोगों की मौत भी हो गई थी. ख़ास बात ये है कि इनमें से ज्यादातर संगठन उच्च शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण का भी विरोध करते रहे हैं.

मध्य प्रदेश में सपाक्स और सवर्ण समाज पार्टी
आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र मध्य प्रदेश में SC/ST कानून में बदलाव के मुद्दे ने शिवराज सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बीते दिनों प्रदर्शन कर रहे लोगों ने ग्वालियर में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर के बंगले का को घेर लिया इसके आलावा गुना में भी थावरचंद गहलोत को रास्ते में घेरकर प्रदर्शन किया गया.

मुरैना में विरोध-प्रदर्शन के दौरान राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह की गाड़ी रोक ली गई और उन पर पर कांच की चूड़ियां भी फेंकी गई. इस प्रदर्शन को मुख्य रूप से सामान्य, पिछड़ा एवं कर्मचारी संघ (सपाक्स) लीड कर रहा है. ये मध्य प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों का संगठन है और इसके लोगों ने बीते दिनों प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष राकेश सिंह का भी घेराव किया था. सपाक्स ने ही पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका लगाई हुई है.

सिर्फ बीजेपी ही नहीं कांग्रेस नेताओं को भी विरोध झेलना पड़ रहा है. बीते शुक्रवार को कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा सांसद प्रभात झा को लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा. सपाक्स के आलावा अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज भी कई जिलों में इस आंदोलन के लिए लोगों को संगठित कर रहा है. इनकी मांग है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून में जो संशोधन किए थे उन्हें बहाल किया जाना चाहिए. इस संगठन के पदाधिकारी चंद्र शेखर तिवारी का कहना है कि इस कानून को जल्द से जल्द सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक लागू किया जाना चाहिए, जब तक ऐसा नहीं हुआ तब तक ये आंदोलन जारी रहेगा. सवर्ण समाज पार्टी भी मध्य प्रदेश के कई इलाकों में सक्रिय है और सपाक्स के साथ मिलकर इस कानून का विरोध कर रहा है. इसी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ग्वालियर में केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र तोमर के बंगले का घेराव किया था.

सपाक्स ने महाकाल मंदिर क्षेत्र से लेकर पटनी बाजार तक 200 से ज्यादा फ्लेक्स लगवाए हैं. इन सभी पर लिखा है कि मैं और मेरा परिवार एट्रोसिटी एक्ट का विरोधी है और आर्थिक आधार पर आरक्षण का पक्षधर हैं उक्त बातों का समर्थन ना करने वाले राजनीतिक दल हमसे वोट मांग कर शर्मिंदा ना हो. सपाक्स के जिला अध्यक्ष अरविंद सिंह चंदेल के मुताबिक शाही सवारी के मद्देनजर ये फ्लेक्स यहां लगाए गए हैं और हम चाहते हैं कि ये साफ़ हो जाए कि हमारे हितों की बात न करने वालों को हमारा साथ भी नहीं मिलेगा.

राजस्थान में भी हो रहा है विरोध
SC/ST एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ 4 सितंबर को जयपुर के रामलीला मैदान में परशुराम सेना ने एक रैली बुलाई है, इस रैली को ‘धर्मसभा’ का नाम दिया गया है. परशुराम सेना से जुड़े एडवोकेट अनिल चतुर्वेदी के मुताबिक ये विरोध तब तक होता रहेगा जब तक कानून को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक संशोधित नहीं कर दिया जाता. राजस्थान में इसके खिलाफ समता आंदोलन नाम का संगठन सबसे आगे हैं. इस संगठन के नेता पाराशर नारायण शर्मा हैं.

राजस्थान में भी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र ये मामला काफी तूल पकड़ रहा है. राजपूताना यूथ फाउंडेशन नाम के एक संगठन ने इस कानून के खिलाफ कोटा-बूंदी सांसद ओम बिड़ला के घर पर उग्र प्रदर्शन किया था. प्रदर्शनकारियों ने सांसद के घर पर चूडि़यां फेंकी और वहां टायर भी जलाए. कोटा (दक्षिण) विधायक संदीप शर्मा प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए आए तो लोगों ने उनके साथ धक्का-मुक्की भी कर दी.

इसके अलावा कोटा में ब्राह्मण कल्याण परिषद और श्री राजपूत करणी सेना जबकि हिंडौन सिटी में अग्रवाल समाज ने भी इस कानून के विरोध में प्रदर्शन किया है. ​सर्वसमाज संघर्ष समिति नाम के संगठन ने सभी राजनीतिक दलों को चेतावनी दी है कि अगर कानून बदलने के लिए कदम नहीं उठाए गए तो सभी राजनीतिक दलों का पिंडदान कर आंदोलन किया जाएगा. उधर कोटा में करणी सेना के प्रधान संरक्षक लोकेंद्र सिंह कालवी ने धमकी देते हुए कहा है कि समाज हित में वो और उनके समर्थक सात बार गुंडे बनने के लिए तैयार हैं.

यूपी में भी सवर्ण संगठनों ने दी चेतावनी
यूपी के कई जिलों में भी इस कानून के विरोध में छोटे-छोटे विरोध प्रदर्शन जारी हैं. हालांकि ज्यादातर संगठन इस मुद्दे पर अलग-अलग ही नज़र आ रहे हैं. भारतीय क्षत्रिय महासभा के जिला अध्यक्ष सतपाल बजरंगी ने एक सितंबर को गाजियाबाद के दादरी में इस कानून के खिलाफ 6 सितंबर को भारत बंद का एलान भी किया है. सतपाल का कहना है कि बीजेपी को एससी/एसटी एक्ट लगाना ही था तो इसके गलत इस्तेमाल से बचने लिए झूठा केस करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की बात को भी शामिल करना चाहिए था.

उधर मथुरा में 2 सितंबर को मैथिल ब्राह्मण महासभा कि एक बैठक हुई जिसमें महाराणा प्रताप राष्ट्रीय युवा सेना के लोगों ने भी हिस्सा लिया. इस बैठक में 6 सितंबर को बुलाए गए बंद को समर्थन देने का ऐलान किया गया है. इस कानून के खिलाफ फिलहाल अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा, मैथिल ब्राह्मण महासभा, महाराणा प्रताप राष्ट्रीय युवा सेना के अध्यक्ष ठा. सुरेश सिसौदिया, कुंडा के निर्दलीय विधायक राजा भैया के पिता उदय प्रताप सिंह, अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सुमंत गुप्ता, युवा राजपूताना संगठन और बलिया के बैरिया से बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह खुलकर अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं. इन सभी ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि जल्दी ही इस मामले में रुख स्पष्ट नहीं किया गया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा.

बिहार में हुआ था बंद
बीती 10 अगस्त को बिहार में इस कानून के खिलाफ सवर्ण सड़कों पर उतरे थे. गया, बेगूसराय, नालंदा और बाढ़ जिलों में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया. गया में सड़कों पर जाम हटाने गई पुलिस पर उग्र लोगों ने हमला कर दिया. कहीं-कही से पथराव की ख़बरें भी आई थीं. इस विरोध का बाजारों पर मिला-जुला असर देखने को मिला था. गया में इस कानून के विरोध में सवर्ण संगठनों ने मानपुर में बाजार-हाट बंद करा दिए. बेगूसराय में लोगों ने नगर थाना के काली स्थान चौक, हेमरा चौक और मुफसिल थाना क्षेत्र के मोहनपुर-राजौरा सड़क को जाम कर दिया था. लखीसराय में भी आरक्षण और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निरोधक कानून (SC/ST एक्ट) के विरोध में लोगों ने प्रदर्शन किया था.

इस दौरान सवर्ण सेना, ब्राह्मण महासभा परशुराम सेवा संस्थान, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, जनसेवा क्षत्रिय विकास समिति समेत कई संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था. इन संगठनों का आरोप है कि आरक्षण के जरिये सवर्ण समाज के युवाओं से नौकरियां छीनी जा रही हैं. पढ़ने वाले होनहार छात्रों को इस एक्ट में फंसाया जा रहा है. इनकी भी मांग है कि सुप्रीम कोर्ट के संशोधनों को बहाल किया जाए.