खास खबर टू द पॉइंट

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महिलाओं को लेकर कि बड़ी घोषणा

ShivrajSinghChouhan_PTI

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को रेडियो कार्यक्रम ‘दिल से’ में कहा कि कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के लिए भोपाल में 100 सीटर हॉस्टल बनाया गया है। सरकार पीपीपी मोड पर प्राइवेट हॉस्टल भी किराए पर लेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा, महिला सशक्तिकरण गतिविधियों के लिए मुख्यमंत्री महिला कोष बनाने, उच्च और जिला न्यायालयों के शासकीय अधिवक्ताओं में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रयास किए जाएंगे।

बसों में कागज के थैले रखने के निर्देश
भोपाल के राघव सिंह ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बसों में कागज के थैले रखवाने, गुमटियों और हॉकर्स के पास डस्टबिन रखवाने का सुझाव दिया था। मुख्यमंत्री ने यह सुझाव मानते हुए बस ऑपरेटरों को निर्देश देने को कहा है।

गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्रित करने के लिए जागृति अभियान के सुझाव भी सीएम ने मान्य किया।

विधानसभा में सवाल लगा तो अफसर को थमाई चार्जशीट

स्वास्थ्यकर्मी भर्ती फर्जीवाड़े के जिम्मेदार अफसर को स्वास्थ्य विभाग दो साल तक बचाता रहा। मामला विधानसभा पहुंचा तो विभाग ने चार्जशीट जारी कर दी।
दतिया जिले के तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. राधेश्याम गुप्ता के कार्यकाल में 112 स्वास्थ्य कर्मचारियों को फर्जी तरीके से भर्ती किया था। इसका खुलासा 2016 में हुआ। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर चालान भी पेश की थी। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने डॉ. गुप्ता को महज नोटिस देकर मामला दबा दिया।

कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह ने विधानसभा में सवाल लगाकर दोषियों पर कार्रवाई की जानकारी मांगी, तब 20 फरवरी को आनन-फानन में डॉ. गुप्ता को चार्जशीट जारी की गई। यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह ने नौ मार्च को सदन में दी।

संदिग्ध भर्ती में 2010 में महेंद्र सिंह भदौरिया का नाम सामने आया। पुलिस जांच के समानांतर स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह तथ्य आया था कि गड़बड़ी 2008 से की जा रही थी।

माइनिंग अफसरों को लेनी होगी पर्यावरण स्वीकृति
पंचायतों की रेत खदानों की पर्यावरण स्वीकृति और प्लान बनाने का काम खनिज विभाग को सौंपा गया है। पंचायतों ने 821 खदानों में से करीब 80 खदानें शुरू कर दी हैं। ये खदानें पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल में हैं।
प्रदेश में वर्ष 2013 में करीब 1500 खदानें चिह्नित की गई थी।

500 खदानों में पर्याप्त रेत नहीं होने के कारण इन्हें नीलाम नहीं किया गया था। नीलाम की गई 956 खदानों में से 445 खदानों को पर्यावरणीय स्वीकृति मिल पाई है। इसमें नर्मदा नदी की 87 और अन्य नदियों की 358 खदानें हैं।

सरकार को 2017 में रेत खनन से 240 करोड़ का राजस्व मिला था। इस वर्ष 400 करोड़ रुपए के व्यवसाय की संभावना खनिज अधिकारियों ने बताई थी, लेकिन पंचायतों को रेत खनिज मिलने से 50 करोड़ रुपए भी मिलना मुश्किल लग रहा है।