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खुदरा मुद्रास्फीति ने लगाई बड़ी छलांग तो औद्योगिक वृद्धि दर की गहरी डुबकी

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नई दिल्ली : विनिर्माण व बिजली क्षेत्रों के हल्के प्रदर्शन के चलते देश में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर मई माह में सात महीने के निचले स्तर 3.2 फीसदी रह गई. एफएमसीजी खंड में कमजोर बिक्री का भी वृद्धि दर पर असर रहा. उधर, ईंधन की कीमतें बढ़ने से जून महीने में खुदरा मुद्रास्फीति पांच प्रतिशत पर पहुंच गई. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है.

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में आंकी जाने वाली कारखाना उत्पादन की वृद्धि दर अप्रैल माह में संशोधित 4.8 फीसदी रही है जबकि पहले जारी अनंतिम आंकड़ों में यह 4.9 फीसदी थी. आईआईपी की वृद्धि दर पिछले साल मई में 2.9 फीसदी रही थी. इससे पहले अक्तूबर 2017 में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 1.8 फीसदी के निचले स्तर पर रही थी.

वहीं मौजूदा वित्त वर्ष की अप्रैल -मई अवधि में आईआईपी वृद्धि दर 4.4 फीसदी रही जो गत वर्ष समान अवधि में 3.1 फीसदी रही थी.
आईआईपी में विनिर्माण क्षेत्र का हिस्सा 77.63 प्रतिशत है. मई माह में इस क्षेत्र की वृद्धि दर 2.8 फीसदी रही. बिजली उत्पादन क्षेत्र की वृद्धि दर आलोच्य महीने में 4.2 फीसदी रही जबकि खनन क्षेत्र की वृद्धि दर इस दौरान 5.7 फीसदी रही.

आलोच्य महीने में उपभोक्ता उत्पाद खंड में एफएमसीजी क्षेत्र का प्रदर्शन सबसे खराब रहा और उसके उत्पादन में 2.6 फीसदी की गिरावट आई. जबकि मई 2017 में इसमें 9.7 फीसदी की बढोतरी देखने को मिली थी. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार आलोच्य महीने में उद्योगों के लिहाज से, विनिर्माण क्षेत्र के 23 उद्योग समूहों में से 13 में पिछले साल की तुलना में वृद्धि रही.

खुदरा मुद्रास्फीति 5 प्रतिशत पर
उधर, अगर खुदरा मुद्रास्फीति दर की बात करें तो ईंधन की कीमतें बढ़ने से जून महीने में खुदरा मुद्रास्फीति 5 प्रतिशत पर पहुंच गई. खुदरा मुद्रास्फीति का पिछले पांच महीने में यह सबसे ऊंचा आंकड़ा है. इससे रिजर्व बैंक की अगामी मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में ब्याज दरें कम करने की संभावना कमजोर हुई है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति इस साल मई में 4.87 प्रतिशत तथा पिछले साल जून में 1.46 प्रतिशत रही थी. इससे पहले जनवरी 2018 में यह 5.07 प्रतिशत के उच्च स्तर पर थी.

केंद्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार फलों, सब्जियों एवं दालों के दाम में धीमी वृद्धि के कारण खाद्य श्रेणी में मुद्रास्फीति मई के 3.1 प्रतिशत से कम होकर जून में 2.91 प्रतिशत पर आ गई. हालांकि, ईंधन एवं विद्युत श्रेणी में मुद्रास्फीति मई के 5.8 प्रतिशत से बढ़कर जून में 7.14 प्रतिशत पर पहुंच गयी.

सीएसओ ने कहा कि सीपीआई मुद्रास्फीति के लिए आंकड़े चुनिंदा शहरों में राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) की जमीन परिचालन इकाई ने तथा चुनिंदा गांवों में डाक विभाग ने जमा किए हैं.

आंकड़ों के अनुसार, वस्त्र एवं जूते-चप्पलों की श्रेणी में मुद्रास्फीति 5.67 प्रतिशत पर तथा आवास क्षेत्र में 8.45 प्रतिशत पर रही. ये दोनों पिछले महीने की तुलना में मामूली अधिक हैं. सरकार ने रिजर्व बैंक को मुद्रास्फीति चार प्रतिशत के आसपास रखने का निर्देश दिया है. रिजर्व बैंक को इसे चार प्रतिशत से दो प्रतिशत अधिक या कम के दायरे का लचीलापन भी दिया गया है. रिजर्व बैंक के गवर्नर की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति ब्याज दरों की समीक्षा के लिए इस महीने बाद में बैठक करने वाली है.