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‘कभी हां, कभी ना’ के खेल में राजीव शुक्ला के हाथ से निकली राज्यसभा की कुर्सी

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नई दिल्ली : काग्रेस के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला के साथ सोमवार को सियासत के साथ-साथ किस्मत ने भी अजब खेल खेला. राजीव शुक्ला सोमवार को गुजरात से राज्यसभा चुनाव में पार्टी हाईकमान से हरी झंडी मिलने के बावजूद अपना नामांकन पत्र नहीं भर पाए. पार्टी सूत्रों ने बताया कि शुक्ला को सोमवार की सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे पार्टी हाईकमान की ओर से यह बताया गया कि उन्हें गांधीनगर जाकर गुजरात से राज्यसभा के लिए अपना नामांकन पत्र भरना है. गुजरात सहित विभिन्न राज्यों से राज्यसभा के लिए होने वाले चुनावों में 12 मार्च नामांकन पत्र भरने की अंतिम तिथि थी. इन सीटों के लिए आवश्यकता पड़ने पर 23 मार्च को चुनाव होंगे.

एयरपोर्ट ने नहीं दी मंजूरी
सूत्रों के अनुसार समय कम होने के बावजूद शुक्ला ने दिल्ली से गांधीनगर जाने के लिए चार्टर्ड विमान का प्रबंध भी कर लिया. किंतु दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचने पर उन्हें पता चला कि अहमदाबाद में हवाई पट्टी की मरम्मत के कारण उनके विमान को वहां उतरने की अनुमति नहीं मिली है. इस कारण अंतिम समय पर उनका गांधीनगर जाना टल गया.

नामांकन भरने के आखिरी दिन मिला संकेत
कांग्रेस ने रविवार को गुजरात से नारायणभाई राठवा और डॉ. अमी याज्ञनिक को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना प्रत्याशी बनाये जाने की घोषणा की थी. गुजरात में राज्यसभा की खाली चार सीटों के लिए मतदान होना है. राठवा द्वारा बिल्कुल अंतिम समय में नामांकन भरे जाने के कारण इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि इस सीट से शुक्ला नामांकन भरेंगे. देरी का कारण पूछे जाने पर राठवा ने गांधीनगर में संवाददाताओं को बताया कि उन्हें कुछ आवश्यक दस्तावेज हासिल करने के कारण विलंब हुआ.

अभिषेक मनु सिंघवी ने पर्चा भरा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने सोमवार को पश्चिम बंगाल से राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने सिंघवी का समर्थन किया है. कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के 20-20 विधायकों ने सिंघवी के नाम का प्रस्ताव रखा. कांग्रेस के कुछ विधायकों के साथ सिंघवी ने यहां राज्य विधानसभा में निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपना नामांकन पत्र दाखिल किया.