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कांग्रेस ने कहा- राफेल सौदे को सिरे चढ़ाने के लिए अपनाये गए सारे हथकंड़े

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नई दिल्ली । राफेल जेट सौदे में गड़बड़ी को बड़ा सियासी हथियार बना रही कांग्रेस ने अब सरकार पर राफेल डील को सिरे चढ़ाने के लिए अधिकारियों को डराने-धमकाने से लेकर पुरस्कृत करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने राफेल सौदे की जांच जेपीसी से कराने की मांग दोहराते हुए कहा है कि रक्षा सौदे के लिए नौकरशाही को इस तरह ध्वस्त करने की देश में दूसरी मिसाल नहीं है।

राफेल विवाद को सियासी मुद्दा बनाने के लिए गठित कांग्रेस की राफेल समिति के प्रमुख पार्टी प्रवक्ता जयपाल रेड्डी ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि इस सौदे को सिरे चढ़ाने के लिए पीएम मोदी ने न केवल कैबिनेट के सुरक्षा मामलों की समिति की पूर्व मंजूरी की प्रक्रिया की अनदेखी की बल्कि कई दूसरी प्रक्रियाओं की धज्जियां भी उड़ाई गई। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार की राफेल डील की बढ़ी कीमतों पर सवाल उठाने वाले संयुक्त सचिव राजीव वर्मा ने 2016 में जब अपनी आपत्ति उठाई तो इसे खारिज करने के लिए उनके उपर की अधिकारी डीजी स्मिता नागराज को सहारा लिया गया।

जयपाल के अनुसार स्मिता को भी इस पद पर पूरी प्लानिंग के साथ सरकार ने कुछ ही दिन पहले आशा राम सिहार की जगह तैनात किया। उन्होंने दावा किया कि सिहार ईमानदार और नियमों को लेकर प्रतिबद्ध थे और उनके इस पद पर रहते सरकार के लिए वर्मा की आपत्तियों को खारिज कराना आसान नहीं था इसलिए उनका तबादला कर स्मिता को कमान दी गई।

कांग्रेस नेता ने कहा कि बतौर डीजी स्मिता ने जब वर्मा की आपत्तियों को खारिज करते हुए राफेल डील की अड़चन खत्म कर दी तो उन्हें सरकार ने ईनाम के तौर पर प्रमोशन देते हुए संघ लोक सेवा आयोग का सदस्य बना दिया। रेड्डी ने कहा कि यह गौर करने की बात है कि स्मिता को जब आयोग का सदस्य बनाया गया तो उनके रिटायरमेंट में आठ महीने ही बचे थे मगर आयोग की सदस्य बनने की वजह से उन्हें पांच साल आठ महीने का कार्यकाल मिल गया।

रेड्डी ने कहा कि टुकड़ों-टुकड़ों में ही सही राफेल सौदे में हुई गड़बड़ी के तथ्य कांग्रेस सामने ला रही है और पीएम मोदी फिर भी इस पर चुप हैं। उन्होंने कहा कि पीएम ने चुप्पी अब भी नहीं तोड़ी तो राफेल पर गलती की उनकी मौन स्वीकारोक्ति मानी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के राफेल विवाद पर आये निर्देश को लेकर पूछे जाने पर रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस का इस याचिका से कोई सरोकार नहीं है और पार्टी जेपीसी जांच की मांग के जरिये सौदे का सच उजागर करने को प्रतिबद्ध है।