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‘ग्रे लिस्ट’ में डाले जाने के बाद बौखलाया पाक, भारत पर लगाए आरोप

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आतंकवाद को पालने वाला पाकिस्तान ‘ग्रे सूची’ में डाले जाने के बाद बौखलाहट में भारत पर उल्टा आरोप लगा रहा है। आतंकवाद के मुद्दे को लेकर पाकिस्तान पर शिकंजा कसते हुए फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने उसे ग्रे सूची में डाल दिया था। आतंकियों को आर्थिक मदद करने के आरोप के बाद यह कार्रवाई की गई। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहम्मद आजम ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एफएटीएफ पर अमेरिका और भारत का अत्यधिक दबाव है। आजम ने आगे कहा कि इन देशों ने चीन और सऊदी अरब पर भी दबाव डाला है कि वह पाकिस्तान की मदद ना करें और ना ही इस मामले में कोई हस्तक्षेप करें।

स्थानीय मीडिया के मुताबिक, पाकिस्तान ने अपने वित्त मंत्री शमशाद अख्तर को देश का बचाव करने के लिए चुना है। अख्तर एफएटीएफ की बैठक में पाकिस्तान का पक्ष रखेंगे और ग्रे सूची से अपना नाम हटाने की मांग करेंगे। इसके साथ ही पाक वित्त मंत्री मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकी फंडिंग और आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में एफएटीएफ को जानकारी देंगे।

बता दें कि पाकिस्तान पर आतंकवाद को आर्थिक मदद मुहैया कराने वाले देशों की सूची में डाले जाने का और ब्लैक लिस्ट होने का खतरा मंडरा रहा है। इस खतरे को भांपते हुए पाकिस्तान सरकार ने एक नया प्लान बनाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ब्लैक लिस्ट होने से बचने के लिए पाकिस्तान ने 15 महीनों के अंदर 26-सूत्रीय एक्शन प्लान तैयार किया है। इस प्लान में यह बताया गया है कि वह आतंकियों को दिए जाने वाली आर्थिक मदद पर कैसे रोक लगाएगा और इसके लिए कौन-कौन से कदम उठाएगा।

अंतर सरकारी संस्था एफएटीएफ का गठन 1989 में किया गया था। यह धन को अवैध तरीके से एक देश से दूसरे देश भेजने, आतंकवाद को आर्थिक मदद देने और वैश्विक आर्थिक ढांचे के लिए अन्य खतरनाक तरीकों पर नजर रखता है। पाकिस्तान को आतंकवाद के लिए धन मुहैया कराने वाले देशों की निगरानी सूची (ग्रे लिस्ट) में एफएटीएफ की फरवरी माह में हुई बैठक में डाल दिया गया था, तब पाकिस्तान को कुछ महीनों की मोहलत देते हुए कहा गया था कि एफएटीएफ की समीक्षा बैठक में पाकिस्तान को इस मामले में एक्शन टेकेन रिपोर्ट देनी होगी।

एफएटीएफ बैठक में फैसला होना है कि आतंकवादियों को आर्थिक मदद मुहैया कराने वाली गतिविधियों के खिलाफ पाकिस्तान ने क्या ठोस कदम उठाए हैं और इसे लेकर पाकिस्तान के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई हो या नहीं। खुद को इस संकट से बचाने के लिए पाकिस्तान ने काले धन को वैध बनाने की प्रक्रिया पर लगाम लगाने के मकसद से नए नियम की पेशकश की है जिससे आतंकियों को आर्थिक मदद पहुंचाने वाली गतिविधियों को रोका जा सके।