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मंत्री शेजवार के खिलाफ लोकायुक्त जांच शुरू

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भोपाल। मध्यप्रदेश के वन मंत्री गौरीशंकर शेजवार के खिलाफ पद का दुरुपयोग मामले में लोकायुक्त ने जांच शुरू कर दी है। लोकायुक्त ने इस बारे में मुख्य सचिव से 16 जनवरी तक जवाब भी मांगा है। इसी मामले में लोकायुक्त ने आईएफएस विनय वर्मन सहित एक अन्य कर्मचारी की भी जांच शुरू की है।

RTI कार्यकर्ता ने की थी शिकायत

आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे ने इसी साल अप्रैल में लोकायुक्त से शिकायत की थी। इसमें कहा गया था कि शेजवार ने पद का दुरुपयोग करते हुए परिजनों सहित सरकारी खर्च पर मार्च 2016 में कर्नाटक की यात्रा की। यात्रा का खर्च ईको टूरिज्म बोर्ड ने उठाया। ईको टूरिज्म बोर्ड के तत्कालीन सीईओ विनय वर्मन ने तमाम नियम ताक पर रखकर मंत्री को लाभ पहुंचाया। सरकारी पैसों से शेजवार, उनकी पत्नी किरण, रिश्तेदार शशि ठाकुर, बोर्ड के तत्कालीन सीईओ वर्मन, बोर्ड की संविदा कर्मचारी वर्षा परिहार ने भी यात्रा की।

राज्य अतिथि का मिला था दर्जा-
शिकायत में दुबे ने कहा, शेजवार को 11 से 15 फरवरी 2016 की समयावधि में राज्य अतिथि घोषित करवाने के लिए तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक नरेंद्र कुमार ने कर्नाटक के प्रधान मुख्य वन संरक्षक को पत्र लिखा था। उनका अनुरोध स्वीकार करते हुए कर्नाटक सरकार ने शेजवार को राज्य अतिथि का दर्जा दिया।

एेसे उजागर हुआ मामला –
यात्रा का खर्च दो लाख रुपए हुआ। मामला उजागर होने पर मंत्री ने 68 हजार रुपए का चेक पर्यावरण विभाग के खाते में जमा कराया। आरटीआई के माध्यम से होटल की कैशबुक से यह जानकारी सामने आई। इसी आधार पर दुबे ने लोकायुक्त से शिकायत की।

बर्खास्त हों मंत्री : दुबे
दुबे का कहना है कि वन विभाग के अधीन ईको टूरिज्म बोर्ड है। शेजवार विभाग के मंत्री हैं। एेसे में निष्पक्ष जांच कैसे हो सकती है, इसलिए मंत्री को बर्खास्त किया जाए। वहीं जानकारों का कहना है कि इस जांच के बाद कई खुलासे हो सकते है। खुलास होने पर इसका प्रभाव आने वाले मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 में पड़ेगा।