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दाम गिरने से नाराज किसानों ने 10 क्विंटल टमाटर सड़क पर फेंके

tomato

सीहोर.प्रदेश में दाम ठीक नहीं मिलने से नाराज दो जिले के किसानों ने टमाटर सड़क पर फेंक दिए। टमाटर की अवाक ज्यादा और बिक्री कम होने से परेशान किसानों ने टमाटर को बेचने की बजाय सड़कों पर फेंकने लगे हैं। असल में, किसानों को मंडी में 1 और 2 रुपए किलो का भाव मिल रहा है, ऐसे में उन्होंने जितनी लागत टमाटर की फसल पैदा करने लगाई, वह भी नहीं निकल पाई। भारी नुकसान हुआ है।

-किसानों का आरोप है कि टमाटर के दाम इतने ज्यादा गिर गए हैं कि लागत वसूलना भी संभव नहीं हो पा रहा है। टमाटर की बंपर पैदावार के चलते पिछले कुछ दिनों से टमाटर के भावों में लगातार गिरावट देखी जा रही है। कुछ समय पहले तक टमाटर एक रूपए किलो के भाव से बिक रहे थे, लेकिन आज गाडरवारा की थोक सब्जीमंडी में भाव गिरकर 50 से 66 पैसे प्रति किलो हो गए। भाव गिरने से गुस्साए किसानों ने करीब दस क्विंटल टमाटर सड़कों पर फेंककर अपना विरोध जताया।

सीहोर में भी किसानों ने फेंका टमाटर
-टमाटर के अच्छे उत्पादन के लिए मशहूर जिले के शाहगंज और नसरुल्लागंज क्षेत्र के किसान इन दिनों लागत से भी कम भाव मिलने के कारण परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि क्षेत्र में किसानों को टमाटर सड़कों पर फेंकने की नौबत आ गई है। थोक मंडी में टमाटर के भाव मात्र 2 रुपए प्रति किलो रह गए हैं। ऐसे में किसानों को लागत और कर्ज चुकाने के लिए राशि निकलना मुश्किल हो रहा है।
-मछबाई, खिताई, आमोन गांव के मेन रोड पर सोमवार को भी किसानों ने टमाटर फेंके। जब क्षेत्र में टमाटर की बोवनी की थी तब इसके भाव 80 रुपए किलो तक पहुंच गए थे। ग्राम मछबाई के किसान राकेश ने बताया कि मेरा परिवार हर साल टमाटर की खेती करता है जिससे परिवार को अच्छी खासी आमदनी होती रही है। लेकिन इस बार भाव को देखकर बुरी तरह निराश हूं।

दो एकड़ में 50 हजार का खर्च: डोबी निवासी बालचंद्र ने बताया कि दो एकड़ के रकबे में 9 हजार की दवाएं, 10 हजार का बीज, 3 हजार का सिंचाई पानी सहित मजदूरी की राशि जोड़ने पर लगभग 50 हजार का खर्च आता है जो कि निकलना मुश्किल हो रहा है। डोबी के किसान भगतजी ने बताया कि मैंने 1.50 लाख रुपए नकद देकर बंटाई पर जमीन ली थी। अब लागत एवं मूल रकम निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
2 रु किलो भी नहीं बिक रहा : राला के किसान रविंद्र पुत्र नर्बदा प्रसाद सैनी ने सवा एकड़ में टमाटर की खेती की थी। अब इसे खरीदने वाला भी कोई नहीं है। किसान ने बताया कि मजदूरी, तारों की बंधवाई व कीटनाशक दवाओं के छिड़काव सहित काफी लागत लग गई जो निकलना मुश्किल हो गया है। अभी प्रति कैरेट में 25 किलो टमाटर निकल रहे हैं। यदि यही हाल रहा तो 500 कैरेट टमाटर नष्ट करने के सिवाय कोई दूसरा उपाय नहीं बचेगा।