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दलित संगठनों ने कोरेगांव हिंसा के बाद किया आज महाराष्ट्र बंद का आह्वान,धारा 144 लागू

Dalit organizations did the violence after Koregaon violence

पिछले दो दिनों से महाराष्ट्र जातीय हिंसा की आग में झुलस रहा है। महाराष्ट्र के पुणे में दलितों और मराठा संगठन के लोगों के बीच सोमवार को हुई झड़प ने बड़ी हिंसा का रूप धर लिया और मंगलवार को भी जारी रहा। पुणे से निकली आग ने मुंबई को बुरी तरह प्रभावित किया जिसके कारण हड़पसर व फुरसुंगी में बसों पर पथराव और तोड़-फोड़ की गई जबकि कई जगह आगजनी की घटना भी देखने को मिली। धीरे-धीरे मामला तूल पकड़ता गया और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में फैल गया। 4 जनवरी में आधी रात के बाद से धारा 144 लगा दी गई है।

वहीं डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के पोते और एक्टिविस्ट प्रकाश आंबेडकर सहित आठ संगठनों ने बुधवार को महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया है। प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने न्यायिक जांच के जो आदेश दिए गए हैं वो उन्हें मंजूर नहीं हैं।

हिंसक घटनाओं को देखते हुए औरंगाबाद में धारा-144 लागू कर दी गई है। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की सभी परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। नासिक में दलित संगठनों ने सड़कें जाम कीं और मुंबई में रेल रोको आंदोलन किया।

औरंगाबाद और अहमदनगर के लिए बस सेवा निरस्त कर दी गई जबकि कई लोकल ट्रेनों की सर्विस भी प्रभावित हुई। वैसे पुलिस ने इस हंगामें से निपटने की पूरी चाक चौबंद व्यवस्था की है लेकिन शाम होते-होते पूरे मामले ने राजनीतिक रूप ले लिया और इस जातीय हंगामें को नया रूप दिया कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के ट्वीट ने। उन्होंने ट्वीट के जरिए कहा कि भारत के लिए आरएसएस और भाजपा के फासीवादी सोच है कि वो भारतीय समाज में दलितों को उठने नहीं देना चाहते हैं। महाराष्ट्र दंगे के बहाने उन्होंने ऊना मामला, रोहित वेमुला और भीम कोरेगांव को याद किया और उनके प्रतिरोध को दलितों की आवाज तक बताया है।

वहीं भीम राव अंबेडकर के पोते और एक्टिविस्ट प्रकाश अंबेडकर ने बुधवार को महाराष्ट्र बंद का आह्वाहन किया है।​

बता दें कि पुणे में सोमवार को उस समय हिंसा भड़की भीम कोरेगांव में लोग शौर्य दिवस मना रहे थे। तभी दलितों और मराठा संगठन के लोगों के बीच हिंसा भड़क गई। हिंसा में एक शख्स की मौत हो गई और कई के घायल होने की खबर है। हिंसा के बाद मुंबई में जगह जगह प्रदर्शन हुए वहीं 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। मुंबई के चेंबूर सहित सभी प्रमुख स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

200 साल पहले 1818 में पेशवा को अंग्रेजों ने दलितों के साथ मिलकर हराया था। 1 जनवरी को भीमा कोरेगांव युद्ध के 200 साल पूरे होने पर लाखों की संख्या में दलित शौर्य दिवस मनाने इकट्ठा हुए थे।

पुलिस के मुताबिक, दलित समुदाय के पांच लाख से ज्यादा लोग शौर्य दिवस मनाने के लिए एकत्र हुए थे। भीम कोरेगांव के जय स्तंभ पर मुख्य कार्यक्रम शांतिपूर्वक चल रहा था, हालांकि पड़ोस के गांवों में हिंसा भड़क गई। कार्यक्रम का आयोजन हर साल किया जाता था, हालांकि इस बार हिंसा भड़क गई।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले की सीआईडी जांच के आदेश दिए हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि हिंसा की न्यायिक जांच भी होगी। मुख्यमंत्री ने मृतक के परिवार को 10 लाख रुपए के मुआवजे का भी ऐलान किया है।