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सीएम का ट़्वीट- जो ठान लेते हैं, उसे पाने में कसर नहीं छोड़ते

CM's Tweet - Those who decide

इंदौर. एक बार फिर इंदौर देश का सबसे साफ-सुथरा शहर बनकर उभरा है। इंदौर ने लगातार दूसरे साल यह रुतबा हासिल किया है। आवास राज्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार शाम स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 के नतीजे घोषित किए। उधर, सीएम शिवराज सिंह ने ट्वीट कर कहा कि हमारे इंदौर के भाई-बहनों का क्या कहना, जो ठान लिया, उसे पूरा करने में कसर नहीं छोड़ते, आपने स्वच्छता में अपने शहर की बादशाहत बरकरार रखी। इस गौरवशाली उपलब्धि के लिए शहर की महापौर मालिनी गौर, नगर निगम कमिश्नर आशीष सिंह और उनकी टीम को बहुत-बहुत बधाई।

घरों से ही गीला-सूखा कचरा अलग-अलग करते, कार में रखते डस्टबिन, रात में भी सफाई, इसलिए इंदौर फिर अव्वल

गंदगी और कचरे के ढेर पर पार्षदों के बैठने तक की घटनाएं इंदौर ने 2014 तक देखी। इंदौर नगर निगम में एटूजेड कंपनी के काम से खुद निगम परेशान था। इस बीच निगम चुनाव हुए और फरवरी 2015 में बतौर महापौर मालिनी गौड़ ने भाजपा की परिषद में 65 भाजपा पार्षदों के साथ कमान संभाली। महापौर मालिनी गौड़ बतौर प्रत्याशी जब चुनी गईं तो दैनिक भास्कर ने ही शहर की सफाई को मुद्दा बनाया और शहर के लिए यह वादा लिया कि वे मेयर बनीं तो इंदौर को स्वच्छ शहर बनाएंगी। इसमें सबसे पहले एक ऐसी सड़क बनाकर देंगी, जिस पर बैठकर खाना खाया जा सके। शुरुआत हुई कचरा उठाने वाली कंपनी एटूजेड को हटाने से। 2015 में यह काम हो गया था। 2016 में निगम ने सफाई को मिशन के रूप में लिया। डेढ़ हजार से ज्यादा नाकारा कर्मचारियों को निकाला तो नई भर्ती की और सफाई के नए संसाधन भी जुटाए।

बदलाव आया डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन शुरू करने के बाद कचरा पेटियां पूरी तरह शहर से हटाने से। परिणाम यह रहा कि 2017 के सर्वेक्षण में इंदौर नंबर-1 घोषित हुआ। बात यहीं खत्म नहीं हुई, अवाॅर्ड मिला तो कचरे को अलग-अलग करने पर फोकस हुआ। गीले और सूखे कचरे को अलग करने के साथ सेनेटरी वेस्ट का तीसरा डस्टबिन भी इंदौर शहर ने ही लगाया। इसके बाद कचरे से खाद बनाने काम शुरू हुआ और शहर भर में कम्पोस्ट प्लांट लग गए। इंदौर में सर्वेक्षण के लिए जब टीम आई तो भास्कर ने ही बताया शहर में क्या खास हुआ सफाई में। परिणाम यह रहा कि इंदौर दोबारा नंबर-1 बना।

क्या हुआ सफाई का असर

30 हजार कम हो गए बीमारियों के केस

सफाई बढ़ने से हमारी सेहत भी तंदुरुस्त हुई है। आंकड़ों की मानें तो वर्ष 2017 में कालरा जैसी बीमारी शहर में रजिस्टर्ड ही नहीं हुई। वहीं डेंगू, डायरिया और मलेरिया के मरीज भी कम मिले। नंबर 1 के बाद शहर में धूल-मिट्टी तो कम हुई ही, बीमारियां भी घटी हैं। 2016 में कालरा के 16 मामले आए थे सामने। जबकि पिछले साल एक भी ऐसा केस सामने नहीं आया था। वायरल बीमारियों में कमी आई।

14 प्रतिशत की गिरावट रही प्रदूषण में

सफाई के कारण इंदौर में डेढ़ साल में पर्यावरण में सुधार आया है। 2016 की अपेक्षा 2017 में प्रदूषण में 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। यह खुलासा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट से हुआ। पीएम-10 (10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर माप के वे धूल कण जो सांस लेते वक्त शरीर में प्रवेश करते हैं) कम हुए हैं। इनका मानक स्तर 60 है। 2016 में यह 92 थे और अप्रैल 2018 में 80 दर्ज हुए। पीएम 2.5 का स्तर 2016 में 51 था। 2018 में यह मानक के लगभग बराबर 43 दर्ज हुआ है।

आगे क्या : अब थ्री-आर रूल्स के पालन की बनेगी रणनीति

शहर के दोबारा नंबर-1 बनने के बाद अब नगर निगम स्वच्छ भारत मिशन और एशिया पेसिफिक कॉन्फ्रेंस में 3-आर (रिड्यूस, रियूज और रिसाइकल) तय किए गए इंदौर संकल्प-2018 को पालन करने पर काम करेगा। महापौर मालिनी गौड़ ने बताया लोकमान्य नगर से जो शुरुआत कचरे को रिड्यूज करने की गई है, उसे अब पहले हर विधानसभा क्षेत्र के एक-एक वार्ड में लागू करेंगे। बाद में दूसरे क्षेत्रों मेें भी इसे बढ़ाया जाएगा। इसी के साथ कचरे के निपटान के कुछ आधुनिक तरीकों पर काम करेंगे। साथ ही अन्य शहरों को प्रशिक्षण मिले, इसके लिए भी एक संस्थान खोला जाएगा।

40 से ज्यादा शहर हमारे मॉडल पर कर रहे हैं काम

देश के 40 से ज्यादा शहर सफाई को लेकर हमारे द्वारा शुरू किए गए अलग-अलग मॉडल को अपना रहे हैं। इनमें बेंगलुरू, चेन्नई, वारंगल, मेंगलोर, कोच्चि, त्रिवेंद्रम, नवी मुंबई, कल्याण, डोंबीवली, मुंबई, जलगांव, नागपुर, अमरावती, नासिक, सिरपुर, अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, नवसारी, राजकोट, धनबाद, रांची, कानपुर, वाराणसी, लखनऊ, इलाहाबाद, झांसी, गोरखपुर, बरेली, पटना, अलीगढ़, गाजियाबाद, दिल्ली, गुरुग्राम, चंडीगढ़, शिमला, धर्मशाला, अंडमान निकोबार, फरीदाबाद, मेरठ, रामपुर, मुजफ्फरनगर।

विधायक ने दिया कमल तो मंत्री ने इंदौर के दोबारा नंबर-1 बनने का हवाला देकर सौंप दिया मेयर को

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह बुधवार को भोपाल आए तो एक कार्यक्रम में विधायक सुदर्शन गुप्ता ने कमल के फूल की प्रतिकृति उन्हें भेंट की। अध्यक्ष ने तुरंत यह फूल महापौर मालिनी गौड़ को थमाते हुए कहा कि इंदौर को सफाई में नंबर वन बनाने के लिए इसकी हकदार आप हैं।

किसने क्या कहा

सबके सहयोग का है ये परिणाम : महाजन

लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा कि नि:संदेह ऊंचाई पर पहुंचना कठिन काम है, लेकिन इस ऊंचाई पर बने रहना उससे भी बड़ी चुनौती थी। इंदौर ने यह कर दिखाया है। इस सफलता में इंदौर की संस्कृति, सबका सहयोग और सहभागिता है। यहां के जागरूक नागरिकों ने जिस तरह से सहयोग किया है, जिससे देश में अलग पहचान बनी है। इंदौर के लोग इस शहर को अपना मानकर ही काम करते है। सभी को बधाई देती हूं।

शहर से मेरा वादा- इंदौर नंबर 1 ही रहेगा : गौड़

मेयर मालिनी गौड़ ने कहा कि सभी शहरवासियों को बधाई। आमजन, विभिन्न संस्थाओं, मीडिया, जनप्रतिनिधि, निगम अधिकारी, कर्मचारियों, एनजीओ, सफाई कार्य में सहयोग देने वाली संस्थाओं व संगठनों के कारण इंदौर दोबारा नंबर-1 बना है। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन और मुख्यमंत्री के सपनों के शहर को दोबारा से नंबर-1 बनाने का हमारा प्रयास सफल रहा। हम इसे आगे भी इसी तरह का बनाकर रखेंगे।

नागरिकों की मेहनत का है ये परिणाम : सिंह

उज्जैन और पूर्व निगमायुक्त इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि इंदौर के नागरिक शहर के लिए सब कुछ दे देते हंै। निगम के 14 हजार से ज्यादा कर्मचारियों के कारण ही यह हो पाया है। इस शहर में वह जिजीविषा है। उसी कारण इंदौर दोबारा नंबर-1 बना है।

नागरिकों के साथ यह थी टीम स्वच्छ इंदौर

मेयर मालिनी गौड़, पूर्व निगमायुक्त मनीष सिंह की इस सबमें खास भूमिका थी तो अपर आयुक्त रोहन सक्सेना, देवेंद्रसिंह, डॉ. अखिलेश उपाध्याय, डॉ. नटवर शारडा, कंसलटेंट असद वारसी, एनजीओ के श्रीगोपाल जगताप, 19 जोन के जेडओ, सीएसआई, दरोगा और 7 हजार से ज्यादा कर्मचारियों का अहम योगदान रहा।