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तेजप्रताप के बाद मीसा के बयान पर बवाल, क्या मुश्किल में है लालू की विरासत, जानिए

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पटना । राजद सुप्रीमो लालू यादव के परिवार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है, ऐसा बार-बार सुनने को मिलता रहा है। कभी लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप केे बयान सेे और अब उसके बाद लालू की बड़ी बेटी मीसा भारती के बयान से हंगामा मचा हुआ हैै, जिससे लालूू के परिवार में फिर सेे कलह और विवाद की बात कही जा रही है।

मीसा के बयान से मचा हंगामा, राजद ने दी सफाई

तेजस्वी और तेजप्रताप के बीच मनमुटाव की बात कोई नई नहीं है। लेकिन, दोनों भाइयों के बीच की बात जब बड़ी बहन मीसा भारती ने खुलेआम स्वीकार कर ली तो उनके इस बयान पर जहां विपक्ष को बोलने का मौका मिल गया वहीं मीसा भारती को खुद लगा होगा कि मैंने ये क्या कह दिया?

हालांकि बाद में उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि मेरी बात को मीडिया में तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। मीसा ने कहा था कि जब पांचो उंगलियां बराबर नहीं हैं। जब हमारे घर में भाई-भाई में नहीं पटता है। तब राजद तो बहुत बड़ा परिवार है। उनके बयान का वीडियो वायरल हो रहा है।

उनके बयान पर राजद के उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने डैमेज कंट्रोल करते हुए कहा कि लालू परिवार में फूट की तलाश करना रोचक और रसीला काम है। राजनीति से लेकर मीडिया तक को इसमें बहुत रस मिलता है। मीसा के भाषण पर गर्मा-गर्म चर्चा है।

अब इस भाषण के ‘हमारे घर’ को ‘मेरा घर’ बनाकर भाई लोग ले उड़े। रोज़ाना गरियाने के लिए बहाल लोग ज़ोर-ज़ोर से से भविष्यवाणी करेंगे। ‘परिवार में गृहयुद्ध हो रहा है।’ राजद का ‘इतिश्री’ हो रहा है। लोग इस मुग़ालते में रहें। हमें ख़ुशी होगी। ऐसों को भारी निराशा हाथ लगने वाली है, क्योंकि न तो लालू परिवार में कोई समस्या है और न राजद परिवार में।

तेजस्वी-तेजप्रताप के बीच विवाद, क्यों बनती है सुर्खियां…

शिवानंद तिवारी भले ही अपने बयान से डैमेज कंट्रोल कर लें लेकिन भाई-भाई के बीच मनमुटाव-ये कोई नई बात नहीं है। इससे पहले 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी देवी के आधिकारिक निवास पर 11 सितंबर को हुई पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की बैठक में उनके बड़े बेटे तेज प्रताप की अनुपस्थिति भी लोगों को खटकी थी। तेजप्रताप घर में ही थे लेकिन बैठक में नहीं आए।

यह बैठक अगले लोकसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने के लिए बुलाई गई थी और इसकी अध्यक्षता बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और तेज के छोटे भाई तेजस्वी यादव कर रहे थे और बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनकी सांसद बेटी मीसा भारती भी इस बैठक में मौजूद थीं। बहन को तेजप्रताप की कमी तो जरूर खटकी होगी।

बाद में तेजप्रताप की तबियत खराब होने की बात कही गई और तेजप्रताप ने भी बयान दिया कि मेरी तबियत ठीक नहीं थी इसीलिए मैं बैठक में नहीं गया तो वहीं तेजस्वी ने कहा कि भाई थके हुए थे इसीलिए नहीं आ सके। तेजस्वी जहां नपे-तुले शब्दों में अपनी बात कह जाते हैं वहीं तेजप्रताप मनमौजी हैं इसीलिए उनकी बातों से लालू परिवार मुसीबत में पड़ जाता है।

तेजप्रताप के कई बयान और ट्वीट्स मीडिया की सुर्ख़ियों में छा गए थे, जिसमें लालू परिवार और पार्टी के अंदरूनी कलह की झलक बिलकुल साफ़ दिख रही थी। तेजप्रताप ने अपना दर्द ट्वीट के जरिए कई बार जाहिर किया है लेकिन बाद में फिर डैमेज कंट्रोल कर भाई के प्रति प्रेम दर्शा कर लोगों को चुप करा दिया।

लालू ने तेजस्वी को सौंपी थी राजनीतिक विरासत, कहीं ये वजह तो नहीं…

पिछले साल नवंबर महीने में लालू ने अपने छोटे बेटे को राजनीतिक विरासत सौंपने का ऐलान कर दिया और साथ ही इशारों में ये भी बता दिया बिहार में अगला विधानसभा चुनाव उनके बेटे तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। एक तरह से लालू ने तेजस्वी को आरजेडी की ओर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बता दिया।

इस मौके पर लालू ने तेजस्वी के काम की तारीफ भी की। लेकिन इस वक्त लालू तेज प्रताप का जिक्र करना भूल गए या फिर नजरअंदाज कर गए। यहीं से तेजप्रताप और तेजस्वी के बीच दूरी बढ़ती गई।

तेजप्रताप के बयान से जाहिर होता है उनका दर्द

तेजप्रताप बड़े बेटे होने के बावजूद खुद को पार्टी के भीतर और पिता के नजरों में अपना कद बड़ा नहीं कर पाए, जैसा कद पिता की नजरों में और पार्टी की नजरों में तेजस्वी की है. जिसकी टीस बार-बार उन्हें बेचैन करती है और वे अपनी उपेक्षा का आरोप लगाते रहते हैं। उनके इस दर्द को बहन मीसा शायद बेहतर समझती हैं और इसीलिए रविवार को मनेर में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में अपने दर्द को बयां करने से खुद को नहीं रोक सकीं।

तेजप्रताप ने पहली बार अपने दर्द को ट्वीट के जरिेए साझा किया था और लिखा था कि पार्टी में उनकी अनदेखी की जा रही है, जिससे उन्हें दुख होता है। उन्होंने ये भी लिखा कि मुझे साजिश की आशंका सता रही है।

तेज प्रताप ने शिकायती लहजे में कहा कि पार्टी में कई सीनियर नेता उन्हें ठीक तरीके से रेस्पॉन्स नहीं करते हैं। हालांकि इस ट्वीट के बाद तेज प्रताप ने ये भी साफ किया कि उनका तेजस्वी के साथ कोई भी विवाद नहीं है।तेजप्रताप ने तेजस्वी को अपने कलेजे का टुकड़ा भी बताया था।

उसके कुछ दिनों के बाद अपने फेसबुक पोस्ट में तेजप्रताप ने लिखा कि उनकी पार्टी के ही लोग उनके बारे में अफवाह फैला रहे हैं। कुछ लोग उन्हें पागल, सनकी और जोरू का गुलाम तक बताते हैं और जब वह इसकी शिकायत अपनी मां राबड़ी देवी से करते हैं तो उन्हें ही डांट पड़ जाती है। इससे उनका तनाव बढ़ रहा है।

इतना ही नहीं, पोस्ट के जरिए उन्होंने राजनीति छोड़ने के संकेत भी दे दिए। लेकिन फिर बाद में उन्होंने कहा कि उनका फेसबुक अकाउंट हैक हो गया था और इस पोस्ट के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया। लेकिन उनके द्वारा डैमेज कंट्रोल की बात लोगों की समझ में आ गई।

भाईयों के बीच मतभेद को भुनाता रहता है जदयू

उनके इस पोस्ट पर जदयू नेता संजय सिंह ने तंज कसते हुए कहा था कि भाई-भाई के बीच कुर्सी की लड़ाई शुरू हो गई है। बड़ा बेटा होने के बाद भी तेज़ प्रताप यादव को पार्टी और परिवार में दबाया गया, सम्मानित पद नहीं दिया गया और उसी का नतीजा है कि पिछले तीन साल का दर्द तेज़ प्रताप के बयान में छलक गया।

समय-समय पर दिखती है परिवार की एकजुटता

इस बार लालू के जन्मदिन पर राजद की तरफ से आयोजित कार्यक्रम के दौरान तेजस्वी तेजप्रताप मां राबड़ी के साथ पहुंचे। दोनों ने साथ केक काटा और मां को खिलाया। फिर दोनों भाईयों ने एक-दूसरे को केक खिलाया और उसके बाद राबड़ी ने भी मीडिया के सामने कहा था कि दोनों बेटों के बीच किसी तरह का मतभेद नहीं है। केक की मिठास के बीच दोनों भाईयों के प्यार की तस्वीरें मीडिया के चमकते कैमरों में कैद हो गईं।

उसके बाद राजद की स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान तेजप्रताप और तेजस्वी दोनों मौजूद थे और दोनों आसपास ही बैठे थे। कार्यक्रम में तेजप्रताप के भाषण के दौरान तेजस्वी समेत राजद के अधिकांश नेता असहज दिखे।

तेजप्रताप के भाषण से डरते हैं राजद नेता

ख़ुद तेजप्रताप ने कहा कि तेजस्वी ने उनसे आग्रह किया था कि भैया कम भाषण देना क्योंकि उन्हें बोलना है।उसके बाद वहां मौजूद लोगों से मुख़ातिब होते हुए तेजप्रताप ने कहा कि ‘वो दिल्ली जाएगा तब हम ना सम्भालेंगे यहां सब कुछ। तेजप्रताप के इस भाषण से साफ़ था कि वो पार्टी में अपने लिए एक बड़ी भूमिका की तलाश कर रहे हैं।

तेजप्रताप हैं मनमौजी, मस्तमौला, विपक्ष को कर देते धराशायी

तेजप्रताप को कोई भी सीरियसली इसलिए नहीं लेता क्योंकि वो मनमौजी हैं। कभी तो वे कृष्ण का रूप धर बांसुरी बजाने लगते हैं तो कभी गायें चराने लगते हैं। कभी शंखनाद कर विपक्ष को ललकारते हैं तो कभी भगवान शिव का रूप धारण कर लेते हैं।

किसी समय में तेजप्रताप बेहद शालीन और धार्मिक भाव से ओतप्रोत एवं अनुशासित दिखते हैं, तो कभी झोंक में बेतुकी बातें और ऊटपटांग हरकतें कर के सब को दुखी कर देते हैं। एेसे ही उनके बयान को कोई गंभीरता से नहीं लेता है।

यही वजह है कि सोच-समझ के मामले में इनके छोटे भाई तेजस्वी को बेहतर मान कर उन्हें लालू यादव की राजनीतिक विरासत सौंप दी गई और पार्टी की कमान संभाल रहे अपने छोटे भाई और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का रुख़ जब-जब उन्हें अपने अनुकूल नहीं लगता है, तब-तब वह भड़क उठते हैं।

लेकिन उनका यह भड़कना स्थायी इसलिए नहीं बन पाता है, क्योंकि समझाने-बुझाने से मान जाना भी उनके स्वभाव में शामिल है। यही बात लालू परिवार और राजद को अब तक बड़ी राहत देती रही है और दूसरी तरफ़ इस परिवार में स्थायी फूट की राह देख रहे विरोधियों को इसी बात से निराशा होती है।