भड़ास

सत्ता देने से पहले ही इमरान पर दबाव बनाने में जुटी पाक आर्मी

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नई दिल्ली। जैसे-जैसे पाकिस्तान में इमरान खान के सत्ता संभालने के दिन करीब आ रहे हैं, वैसे-वैसे नियंत्रण रेखा पर पाक सेना की तरफ से अकारण की जा रही गोलीबारी में बढ़ोतरी होती जा रही है। यही नहीं वहां चुनाव संपन्न होने से पहले पाकिस्तान सीमा की तरफ से भारत में आतंकियों की घुसपैठ कराने की जो घटनाएं कम हो गई थी, अब उनमें भी इजाफा हो गया है।

भारतीय खुफिया एजेंसियों और विदेश मंत्रालय की माने तो पाकिस्तान सेना की इन हरकतों के पीछे कहीं न कहीं पीएम बनने जा रहे इमरान खान पर दबाव बनाने की रणनीति भी है ताकि वह भारत के साथ रिश्तों को लेकर कोई पहल नहीं कर सके। साथ ही भारतीय सीमा में लगातार गोलीबारी करने से भारत सरकार पर भी यह दबाव बना रहेगा कि वह पाकिस्तान की नई सरकार को लेकर उत्साह नहीं दिखा सके।

सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2018 के दौरान पाकिस्तान की तरफ से सीजफायर उल्लंघन की घटनाएं बहुत ज्यादा हो रही हैं। 23 जुलाई, 2018 तक के आंकड़े बताते हैं कि इन सात महीनों में पाकिस्तानी सेना ने 2017 से भी ज्यादा सीजफायर उल्लंघन किए हैं। लेकिन 25 जुलाई, 2018 को पाकिस्तान चुनाव से कुछ हफ्ते पहले से सीजफायर की घटनाएं कम हो रही थी। लेकिन चुनाव समाप्त होते ही फिर से पुराने हालात बहाल हो गए हैं।

पिछले मंगलवार को आतंकियों के एक गुट को कश्मीर के गुरेज सेक्टर में घुसपैठ कराने के लिए पाकिस्तान सेना की तरफ से कई घंटों तक भारी गोलाबारी की गई, जिसमें भारतीय सेना के एक मेजर समेत चार सैनिक शहीद हो गए। भारतीय सेना की कार्रवाई में पिछले तीन दिनों में नौ आतंकी भी मारे गए हैं, लेकिन इन घटनाओं से पाकिस्तानी सेना एक बार फिर बेनकाब हुई है।

सनद रहे कि सिर्फ इमरान खान की पार्टी पीटीआइ को छोड़कर लगभग सभी बड़े विपक्षी दलों ने हाल ही में संपन्न आम चुनाव को फर्जी और पाकिस्तान सेना की साजिश करार दिया हैं। सूत्रों का कहना है कि इमरान खान व पाकिस्तान सेना के बीच पर्दे के पीछे जो साठगांठ है, उसको लेकर बहुत कयास लगाने की जरूरत नहीं है। इसके बावजूद पाकिस्तान सेना वर्ष 2013-14 की गलती नहीं दोहराना चाहती। तब पूर्व पीएम नवाज शरीफ की सत्ता में वापसी हुई थी।

पद संभालते हुए उन्होंने भारत के साथ रिश्तों को मजबूत करने और पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के साथ उठाए गये कदमों के मुताबिक आगे बढ़ने की इच्छा जताई थी। वर्ष 2014 में जब पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण में हिस्सा लेने के लिए शरीफ को बुलाया तो उन्होंने पाक सेना की आपत्तियों को दरकिनार करके नई दिल्ली आना स्वीकार किया था। पाक सेना गोलीबारी करके दोनों देशों के तनाव भरे रिश्तों में और तल्खी घोल देना चाहती है ताकि सुलह की कोई गुंजाइश न रहे।