भड़ास

अमेरिका के बाद चीन ने पाक से कहा- हाफिज को देश से बाहर निकालो!

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9/11 के बाद हंगामा मचा तो उसने दुनिया को चकमा देने के लिए अपने आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा का नाम बदल दिया. नया नाम रखा जमात-उद-दावा. इसके बाद मुंबई में 26/11 हुआ, तो उसने फिर वही खेल खेला. अबकी जमात-उद-दावा का नाम बदल दिया और फिर एक नया नाम रखा तहरीक-ए-हुरमत-ए-रसूल. फिर इस पर भी पाबंदी लग गई, तो एक नई राजनीतिक पार्टी खड़ी कर ली ‘मिल्ली मुस्लिम लीग’. सपना था आम चुनाव जीतकर पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनना. मगर अब लश्कर के चीफ हाफिज़ सईद के चेहेरे से मुखौटा हट गया है.

पहले अमेरिका ने दी थी पाक को नसीहत

पहले अमेरिका ने कहा खुदा ‘हाफिज़’. अब चीन ने कहा गुडबाय ‘मौलाना’. कुल मिलाकर पाकिस्तान के लिए भी अब हाफिज़ सईद को खुदा हाफिज़ कहने का वक्त आ गया है. क्योंकि पाकिस्तान के सबसे बड़े हमदर्द चीन ने भी प्रधानमंत्री शाहिद खक्कान अब्बासी से साफ लफ्ज़ों में कह दिया है कि इस मुसीबत को मुल्क से बाहर निकालो वरना पछताओगे बहुत. वो यूं. क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय दबाव में इस अंतर्राष्ट्रीय आतंकी को बिना गिरफ्तार किए मुल्क में रहने देने से पाकिस्तान ऐसी मुश्किल में आ जाएगा की चाहकर भी चीन उसे इस मुसीबत से बाहर नहीं निकाल पाएगा.

अब चीन ने दी पाकिस्तान को सलाह

लिहाज़ा पाकिस्तान को चीनी राष्ट्रपति शी जिंगपिंग ने एक हमदर्द सलाह दी है कि हाफिज़ सईद को लेकर दुनिया में बन रही खराब इमेज को ज़हन में रखते हुए उसे मुल्क से निकालकर किसी पश्चिम एशिया के देश में फेंककर अपना हाथ झाड़ लेना चाहिए. चीन में राष्ट्रपति शी जिंगपिंग और पाकिस्तानी प्रधानममंत्री खक्कान के बीच हुई 35 मिनट की मुलाकात में भारत और इंटरनैशनल एजेंसियों के दबाव को देखते हुए चीनी राष्ट्रपति ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को करीब 10 मिनट तक सिर्फ हाफिज सईद पर उनका दिमाग खोल देने वाला ज्ञान दिया. सईद को सुर्खियों से दूर करने के लिए जिंगपिंग ने पाक को जल्द कोई रास्ता निकालने या फिर नतीजा भुगतने की सलाह दी.

अब चीन ने कहा गुडबाय ‘मौलाना’

अब्बासी के एक करीबी सूत्र के मुताबिक राष्ट्रपति शी जिंगपिंग ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिंगपिंग ने कहा कि कुछ ऐसे रास्ते तलाशिए जिससे हाफिज़ सईद को चर्चा से दूर रखा जा सके. जब तक कोई रास्ता ना निकले. सईद को किसी पश्चिम एशियाई देश में चैन की जिंदगी जीने के लिए भेज दें. क्योंकि मुंबई हमले के बाद से ही वो भारत और वैश्विक एजेंसियों के निशाने पर है. खबर के मुताबिक चीनी राष्ट्रपति से बातचीत के बाद अब्बासी ने सरकार की कानूनी टीम से मामले में सलाह ली है. हालांकि अभी तक हाफिज़ की किस्मत का फैसला नहीं हुआ है.

राजनीतिक दलों के लिए परेशानी

अंतर्राष्ट्रीय दबाव के बाद अब हाफिज़ सईद की हालत धोबी के उस गधे जैसी हो गई है जो ना घर का बचा है ना घाट. क्योंकि अमेरिका के प्रतिबंध के बाद अब चीन की सलाह ने हाफिज़ को पाकिस्तान में भी रहने लायक नहीं छोड़ा है. और उस पर सितम ये कि खुद पाकिस्तानी सरकार और दूसरी राजनीति पार्टियां भी नहीं चाहतीं कि हाफिज़ पाकिस्तान में रहे. क्योंकि आगामी आम चुनाव के लिए उसने अपनी पॉलिटिकल पार्टी बना ली है. और वो चुनाव लड़ने की ज़िद पर अड़ा हुआ मगर अभी तक वहां की कोर्ट और चुनाव आयोग से उसे परमिशन नहीं मिली है. लेकिन अगर परमीशन मिल जाती है तो पाकिस्तान में हाफिज़ की पॉपुलेरिटी इन राजनीतिक पार्टियों के लिए मुसीबत खड़ी कर सकती हैं.

हाफिज ने कहा- चीन के इशारे पर चल रहा है पाक

मगर ऐसे वक्त में जब मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड मुल्क का वज़ीर-ए-आज़म बनने के ख्वाब पाल रहा था. चीन की इस चतुर चाल ने उसके चारों खाने चित कर दिया है. हालांकि जमात-उद-दावा सरकार पर अमेरिका और भारत के दबाव में आकर हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगा रही है. वहीं एक रोज़ा इफ्तार में पत्रकारों से बात करते हुए हाफिज़ सईद ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया कि चीन उस पर प्रतिबंध लगाकर पाकिस्तान से बाहर भेजना चाहता है. हालांकि उसने ये कुबूल किया कि चीन सुपर पॉवर के तौर पर काम कर रहा है और पाकिस्तान उसके निर्देश पर चलता है.

एमएमएल को आतंकी संगठन घोषित किया

एक तरफ तो अमेरिका पहले ही हाफिज सईद की राजनीतिक पार्टी मिल्ली मुस्लिम लीग यानी एमएमएल को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर चुकी है. वहीं अब दूसरी तरफ चीन ने भी पाकिस्तान को हाफिज़ से छुटकारा पाने की सलाह दे दी है. आपको बता दें कि इसी साल अप्रैल के महीने में अमेरिका के हाफिज़ सईद की सियासी पार्टी को आतंकी संगठनों की लिस्ट में शामिल किया था. अमेरिका की इस लिस्ट में मिल्ली मुस्लिम लीग के पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तयब्बा और तहरीक-ए-आजादी-ए कश्मीर यानी ताजक का नाम भी शामिल है. इतना ही नहीं अमेरिका ने हाफिज सईद के राजनीतिक संगठन मिल्ली मुस्लिम लीग के 7 सदस्यों को भी लश्कर-ए-तय्यबा की तरफ से आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के लिए विदेशी आतंकवादी घोषित किया था.

हाफिज पर दस मिलियन डॉलर का इनाम

हाफिज़ पर पाबंदियों का सिलसिला अमेरिका पर हुए 9-11 हमलों के हमलों के बाद से ही शुरू हो गया. जब हाफिज़ के शुरूआती संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा पर पाबंदी लगाई गई.. इसके बाद उसने लश्कर को जमात-उद-दावा के नाम से दोबारा शुरू कर दिया. मगर मुंबई हमले के बाद दुनिया भर की सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए उसने जमात-उद-दावा यानी लश्कर के मजहबी चेहरे को तहरीक-ए-हुरमत-ए-रसूल बना दिया. इसके बाद पाकिस्तानी राजनीति में दाखिल होने के लिए ही उसने मिल्ली मुस्लिम लीग के नाम से एक नय़ा संगठन खड़ा किया था. लेकिन ये भी अब अमेरिका की ब्लैक लिस्ट में शामिल है. इतना ही नहीं उसके सिर पर अमेरिका ने दस मिलियन डॉलर यानी करीब 60 करोड़ का इनाम भी रखा हुआ है.